{"_id":"6681ce21a34ff63f3c069007","slug":"only-five-percent-planting-took-place-in-nepals-kapilvastu-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1004-120005-2024-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: नेपाल के कपिलवस्तु में पांच प्रतिशत ही हुई रोपाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: नेपाल के कपिलवस्तु में पांच प्रतिशत ही हुई रोपाई
Mon, 01 Jul 2024 02:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 01 Jul 2024 02:59 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
खुनुवां। सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले में 21वें राष्ट्रीय धान दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न स्थानों पर रोपण उत्सव आयोजित किया गया। रविवार को कृषि ज्ञान केंद्र धान सुपर जोन कपिलवस्तु, बुद्धभूमि नगर पालिका, कालिका स्वावलंबन सामाजिक केंद्र व अन्य ने मिलकर पौधरोपण महोत्सव मनाया। कृषि ज्ञान केंद्र के अनुसार जून के मध्य में जिले में मात्र पांच प्रतिशत ही रोपनी हुई है। किसानों का कहना है कि इस साल सिंचाई के लिए पानी की कमी और खाद की भारी कमी है। उन्होंने शिकायत की कि रियायती सरकारी खाद केवल कृषि सहकारी समितियों को जाती है। जिले में 69480 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। जिले में राधा चार, सावित्री, सांबा, मंसुरी, कालानमक और अन्य प्रकार के धान उगाए जाते हैं। कृषि ज्ञान केंद्र के महेंद्र ओझा ने कहा कि विभिन्न समस्याओं के कारण चावल के उत्पादन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई।
-- -
69 हजार हेक्टेयर में होती है धान की खेती
कृषि ज्ञान केंद्र के अनुसार लुंबिनी प्रांत के 311 हजार 443 हेक्टेयर में से कपिलवस्तु में 69 हजार 480 हेक्टेयर पर खेती होती है। कपिलवस्तु नगर पालिका 10 बिकुली में जिला समन्वय समिति के प्रमुख बाबूराम आचार्य ने कपिलवस्तु नगर पालिका 9 के कृषि ज्ञान केंद्र एवं लघु कृषक कृषि सहकारी समिति लिमिटेड द्वारा आयोजित रोपण महोत्सव में खाद्यान्न पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की श्रम शक्ति विदेश चली गयी है और खाद एवं सिंचाई की असुविधा के कारण चावल सहित खाद्य फसलों का उत्पादन कम हो रहा है। ज्ञान केंद्र के प्रमुख भास्कर पौडेल ने कहा कि आजीविका एवं पारंपरिक खेती को हटाकर औजारों का उपयोग बढ़ाना जरूरी है।
विज्ञापन
खुनुवां। सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले में 21वें राष्ट्रीय धान दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न स्थानों पर रोपण उत्सव आयोजित किया गया। रविवार को कृषि ज्ञान केंद्र धान सुपर जोन कपिलवस्तु, बुद्धभूमि नगर पालिका, कालिका स्वावलंबन सामाजिक केंद्र व अन्य ने मिलकर पौधरोपण महोत्सव मनाया। कृषि ज्ञान केंद्र के अनुसार जून के मध्य में जिले में मात्र पांच प्रतिशत ही रोपनी हुई है। किसानों का कहना है कि इस साल सिंचाई के लिए पानी की कमी और खाद की भारी कमी है। उन्होंने शिकायत की कि रियायती सरकारी खाद केवल कृषि सहकारी समितियों को जाती है। जिले में 69480 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। जिले में राधा चार, सावित्री, सांबा, मंसुरी, कालानमक और अन्य प्रकार के धान उगाए जाते हैं। कृषि ज्ञान केंद्र के महेंद्र ओझा ने कहा कि विभिन्न समस्याओं के कारण चावल के उत्पादन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई।
69 हजार हेक्टेयर में होती है धान की खेती
कृषि ज्ञान केंद्र के अनुसार लुंबिनी प्रांत के 311 हजार 443 हेक्टेयर में से कपिलवस्तु में 69 हजार 480 हेक्टेयर पर खेती होती है। कपिलवस्तु नगर पालिका 10 बिकुली में जिला समन्वय समिति के प्रमुख बाबूराम आचार्य ने कपिलवस्तु नगर पालिका 9 के कृषि ज्ञान केंद्र एवं लघु कृषक कृषि सहकारी समिति लिमिटेड द्वारा आयोजित रोपण महोत्सव में खाद्यान्न पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की श्रम शक्ति विदेश चली गयी है और खाद एवं सिंचाई की असुविधा के कारण चावल सहित खाद्य फसलों का उत्पादन कम हो रहा है। ज्ञान केंद्र के प्रमुख भास्कर पौडेल ने कहा कि आजीविका एवं पारंपरिक खेती को हटाकर औजारों का उपयोग बढ़ाना जरूरी है।
विज्ञापन