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Siddharthnagar News: निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाला सुधार लेता है जीवन
Mon, 22 Jun 2026 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 22 Jun 2026 12:04 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बर्डपुर ब्लॉक के बनियाभारी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास मगन मिश्रा महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा व्यास ने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप और त्याग किया। उन्होंने शिव-पार्वती विवाह का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव की बारात में सांप, बिच्छू, भूत और प्रेत भी शामिल थे। इसके बावजूद माता पार्वती ने अटूट श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान शिव को स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है। भागवत कथा सुनने से जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल सत्य है लेकिन मनुष्य इसे स्वीकार करने से बचता रहता है। जो व्यक्ति निष्काम भाव से भगवान का स्मरण करता है, वह अपने जन्म और मरण दोनों को सफल बना लेता है।
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मगन मिश्रा महाराज ने कहा कि जब भगवान अवतार लेते हैं तो माया भी उनके साथ आती है। साधारण मनुष्य माया को ही स्थायी मान बैठता है और शरीर को सर्वश्रेष्ठ समझने लगता है, जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत हमें ऐसा कर्म करने की प्रेरणा देती है, जिसमें किसी प्रकार का स्वार्थ न हो। निष्काम कर्म और सच्ची भक्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। आयोजन में मुन्नीलाल पाल, दिनेश कुमार यादव, सतीश पाल, अजय कुमार, मनीष समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
कथा व्यास ने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप और त्याग किया। उन्होंने शिव-पार्वती विवाह का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव की बारात में सांप, बिच्छू, भूत और प्रेत भी शामिल थे। इसके बावजूद माता पार्वती ने अटूट श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान शिव को स्वीकार किया।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है। भागवत कथा सुनने से जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल सत्य है लेकिन मनुष्य इसे स्वीकार करने से बचता रहता है। जो व्यक्ति निष्काम भाव से भगवान का स्मरण करता है, वह अपने जन्म और मरण दोनों को सफल बना लेता है।
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मगन मिश्रा महाराज ने कहा कि जब भगवान अवतार लेते हैं तो माया भी उनके साथ आती है। साधारण मनुष्य माया को ही स्थायी मान बैठता है और शरीर को सर्वश्रेष्ठ समझने लगता है, जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत हमें ऐसा कर्म करने की प्रेरणा देती है, जिसमें किसी प्रकार का स्वार्थ न हो। निष्काम कर्म और सच्ची भक्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। आयोजन में मुन्नीलाल पाल, दिनेश कुमार यादव, सतीश पाल, अजय कुमार, मनीष समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।