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पेश की भाईचारे की मिसाल
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 10 Oct 2016 11:00 PM IST
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aबस्ती-डुमरियागंज मार्ग पर नौहा मातम करते अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। नवरात्र व मोहर्रम के मौके पर हल्लौर में आपसी भाईचारे व हिंदू-मुस्लिम एकता की नायाब तश्वीर सोमवार को देखने को मिली। दोनों समुदाय के लोगों ने एक साथ सड़क पर निकलकर आपसी सौहार्द का संदेश दिया। इस बार दशहरा व मोहर्रम पर्व यहां एक साथ दोनों समुदाय के लोग मिलकर मना रहे हैं।
सोमवार की दोपहर दोनों समुदाय के युवाओं ने शांति मार्च निकाल कर संदेश दिया कि वे एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों का सम्मान करते हैं और किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। कस्बे में मोहर्रम को लेकर काफी कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इसी दौरान दुर्गा पूजा पडने से लोगों ने आपस में बैठ कर यह तय किया कि जब भजन का कार्यक्रम होगा तब नौहा बंद रहेगा और जब नौहा होगा तब भजन बंद रहेगा। इस पर दोनों समुदाय के लोगों ने अमल भी किया और किसी भी तरह की परेशानी किसी को नहीं हुई।
सड़क के किनारों पर एक तरफ काला झंडा देखा जा रहा है तो एक तरफ भगवा झंडा लहरा रहा है। इतना ही नहीं दोनों समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा भी लिया। ताजिया के पास हिंदू समाज के लोग आस्थानुसार पूजा-पाठ करते नजर आए और अपने घरों में ताजिया भी रखा। हल्लौर में बना शिवालय भी मुस्लिम परिवार द्वारा दी गई भूमि पर बना है जिसमें हिंदू व मुस्लिम समाज, दोनों की बराबर की भागीदारी रही है।
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सोमवार की दोपहर दोनों समुदाय के युवाओं ने शांति मार्च निकाल कर संदेश दिया कि वे एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों का सम्मान करते हैं और किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। कस्बे में मोहर्रम को लेकर काफी कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इसी दौरान दुर्गा पूजा पडने से लोगों ने आपस में बैठ कर यह तय किया कि जब भजन का कार्यक्रम होगा तब नौहा बंद रहेगा और जब नौहा होगा तब भजन बंद रहेगा। इस पर दोनों समुदाय के लोगों ने अमल भी किया और किसी भी तरह की परेशानी किसी को नहीं हुई।
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सड़क के किनारों पर एक तरफ काला झंडा देखा जा रहा है तो एक तरफ भगवा झंडा लहरा रहा है। इतना ही नहीं दोनों समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा भी लिया। ताजिया के पास हिंदू समाज के लोग आस्थानुसार पूजा-पाठ करते नजर आए और अपने घरों में ताजिया भी रखा। हल्लौर में बना शिवालय भी मुस्लिम परिवार द्वारा दी गई भूमि पर बना है जिसमें हिंदू व मुस्लिम समाज, दोनों की बराबर की भागीदारी रही है।
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