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Siddharthnagar News: अब फेक एप से हैक कर रहे मोबाइल, उड़ा रहे रकम
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साइबर ठगों ने बिछाया जाल, फंसने वाले हो रहे कंगाल
गूगल से कस्टमर केयर नंबर लेने वालों को एप एनी डेस्क एप अपलोड करने का दे रहे झांसा
एप पर क्लिक करते ही मोबाइल का संचालन ठगों के हाथ में चल जा रहा है
तीन दिन में चार लोगों से सवा चार लाख रुपये ठगे, हर माह पहुंच रहे 15-20 मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर गूगल से कोई कस्टमर केयर नंबर लेकर कॉल करते हैं और बात करने वाला कोई एप डाउनलोड करने के लिए कह रह है तो सावधान हो जाएं। कॉल सेंटर के बजाए आपकी बात साइबर ठग से हो रही है। एप डाउनलोड करते हुी मोबाइल का संचालन साइबर ठग के पास चला जाएगा। देखते ही देखते ठग आपकी गाढ़ी कमाई खाते से उड़ देगा और आपको पता भी नहीं चलेगा। तीन दिन के भीतर चार लोगों से सवा चार लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। साइबर सेल में दो माह से 15-20 मामले आ रहे हैं।
संचार क्रांति के युग में हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है। बैंकिंग कार्य के साथ ही लेनदेन और खरीद लोग इसी से कर रहे हैं। लेनदेन या किसी योजना संबंधित जानकारी के लिए लोग गूगल से ही कस्टमर केयर नंबर लेते हैं और बात करते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। अभी तक एटीएम कार्ड का नंबर बदलने, आधार और सरकारी योजना के नाम पर साइबर ठगी करते थे। लेकिन अब व्यक्ति खुद उनके बिछाए जाल में फंस रहा है। वह गूगल के कस्टमर केयर में बैंक सहित, सभी प्रकार के टोल फ्री नंबर को अपडेट कर देते हैं। लोगों का गूगल पर विश्वास है। ऐसे में जैसे ही कोई कॉल करता है, बात उनसे होती है। समस्या पूछते हैं और मोबाइल पर एक लिंक देते हैं और एप लोड करने के लिए कहते हैं। उस लिंक पर क्लिक करते ही कई एप आ जाते हैं, जिस पर क्लिक करते ही मोबाइल का संचालन उनके पास चला जाता है। मोबाइल हाथ में रहते हुए एनी डेस्क पर लेकर संचालन वह खुद करते हैं। मैसेज सहित सब कुछ उनके फोन पर जाएगा। देखते ही देखते बैंक खाता खाली हो जाएगा। इसके बारे में पता भी नहीं चलेगा। रुपये निकलने का मैसेज उनके पास जाता है। बाद में जब रुपये निकालने लोग बैंक जाते हैं, गूगल पे से किसी के खाते में रुपये ट्रांसफर करते हैं या बैलेंस चेक करते हैं, तब धोखाधड़ी के शिकार होने की जानकारी लोगों को हो रही है। इस प्रकार की ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तीन दिन में चार लोगों से सवा चार लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जिसकी साइबर सेल जांच कर रही है।
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एप पर क्लिक करते ही कुछ देर में उड़ा दिए 37 हजार
जोगिया कोतवाली क्षेत्र के देवरा गांव निवासी राजकुमार समाचार पत्र वितरक हैं। उनके मुताबिक गूगल पे में दिक्कत होने पर गूगल से कस्टमर केयर नंबर मांगा। नंबर मिलने पर बात की तो एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने के लिए कहा। जैसे-जैसे बताया करते गए। इसके बाद मोबाइल को रख दिया। कारण हैक करने लगा। इसके बाद 37 हजार रुपये खाते से कट गए। राजकुमार ने जोगिया पुलिस के साथ ही साइबर सेल में इसकी शिकायत की है।
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तीन बार में उड़ा दिए खाते से तीन लाख रुपये
खेसरहा थाना क्षेत्र के कलनाखोर गांव निवासी अवधेश कुमार के मुताबिक गूगल से मिले एक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके इर्नवटर के संबंध में शिकायत की थी। उसी दिन व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया और लिंक पर क्लिक करके शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा गया। जैसे-जैसे कहा गया, करते गए। उसी एप के जरिए गूगल पे पर पांच रुपये भेजा गया। इसके बाद तीन बार में तीन लाख रुपये खाते से कट गए। एक हजार रुपये एक व्यक्ति ने भेजा था, उसे देने के लिए जब चेक किया तो पता चला की तीन दिन में तीन लाख रुपये कट गए। पीडि़त की शिकायत पर साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है। इनके अलावा दो अन्य लोग भी 80 हजार रुपये ठगी का शिकार हुए हैं।
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कॉल सेंटर वाला बोले एप लोड करें तो हो जाएं सतर्क
कॉल सेंटर से कभी कोई एप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहा जाता है। इसके साथ ही उनके बात करने का तरीका अलग होता है। वह जानकारी लेंगे और नोट करेंगे। अधिक समस्या होने पर इंजीनियर नजदीक के सेंटर पर जाने के लिए कहेंगे। जबकि ठग बात-बात में बार-बार यही बोलते हैं कि चिंता मत करो, समस्या का समाधान हो जाएगा। बस जो बोल रहे हैं, उसे करते जाओ। इसलिए बात करते ही परख में आ जाते हैं। अगर आपके साथ कोई ऐसा करता है तो समझिए की वह साइबर ठग है और आप फंस रहे हैं।
अतुल कुमार चौबे, साइबर एक्सपर्ट, साइबर सेल सिद्धार्थनगर
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गूगल में घुसपैठ, रहिए सतर्क
आज हर व्यक्ति गूगल पर निर्भर हो चुका है। जानकारी तक तो सीमित है, लेकिन कस्टमर केयर नंबर और उसे पूछकर एप लोड करना खतरे से खाली नहीं है। इसमें विभिन्न कंपनी, बैंक सहित अन्य के कस्टमर केयर नंबर डाल दिए हैं। फेक एप तैयार किए हैं, जिसके लोड करते ही मोबाइल का संचालन एनी डेस्क की तरह से उनके हाथ में चला जा रहा है। देखते ही देखते आपके खाते से रकम कट जा रही है। फेक एप के मामले बढ़े हैं। अब तक ऐसे 10 से अधिक एप चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें लोड करवाकर वह लोगों को ठग रहे हैं। इस एप को लोड करने से बचें।
राजेश कुमार शुक्ल, प्रभारी साइबर सेल सिद्धार्थनगर
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यह है एप
एनीडेस्क रिमोट डेस्कटॉप, टीम बीवर रिमोट कंट्रोल, क्रोम रिपोट डेस्क टॉप, एयर ड्रायड फाइल एंड रिमोट एक्सेज, टीम वीबर क्वीक स्पोर्ट, रिमोट डेस्क टॉप, एवसन रिमोट डेस्क टाप, एयर ड्रायड कास्ट स्क्रीन मीलोरिन से अब तक ठगी के मामले आ चुके हैं।
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बोले अधिकारी
साइबर क्राइम लगातार बढ़ रहा है। इस अपराध से बचने के लिए स्कूल कॉलेज और अन्य स्थानों पर पुलिस जागरूक कर रही है। ठगी के मामलों की जांच करने के साथ ही धन की रिकवरी भी कर रही है। अगर ठगी का शिकार होते हैं तो तत्काल सूचना दें, जिससे धन की वापसी साइबर टीम करा सके।
सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर
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साइबर ठगों ने बिछाया जाल, फंसने वाले हो रहे कंगाल
गूगल से कस्टमर केयर नंबर लेने वालों को एप एनी डेस्क एप अपलोड करने का दे रहे झांसा
एप पर क्लिक करते ही मोबाइल का संचालन ठगों के हाथ में चल जा रहा है
तीन दिन में चार लोगों से सवा चार लाख रुपये ठगे, हर माह पहुंच रहे 15-20 मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर गूगल से कोई कस्टमर केयर नंबर लेकर कॉल करते हैं और बात करने वाला कोई एप डाउनलोड करने के लिए कह रह है तो सावधान हो जाएं। कॉल सेंटर के बजाए आपकी बात साइबर ठग से हो रही है। एप डाउनलोड करते हुी मोबाइल का संचालन साइबर ठग के पास चला जाएगा। देखते ही देखते ठग आपकी गाढ़ी कमाई खाते से उड़ देगा और आपको पता भी नहीं चलेगा। तीन दिन के भीतर चार लोगों से सवा चार लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। साइबर सेल में दो माह से 15-20 मामले आ रहे हैं।
संचार क्रांति के युग में हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है। बैंकिंग कार्य के साथ ही लेनदेन और खरीद लोग इसी से कर रहे हैं। लेनदेन या किसी योजना संबंधित जानकारी के लिए लोग गूगल से ही कस्टमर केयर नंबर लेते हैं और बात करते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। अभी तक एटीएम कार्ड का नंबर बदलने, आधार और सरकारी योजना के नाम पर साइबर ठगी करते थे। लेकिन अब व्यक्ति खुद उनके बिछाए जाल में फंस रहा है। वह गूगल के कस्टमर केयर में बैंक सहित, सभी प्रकार के टोल फ्री नंबर को अपडेट कर देते हैं। लोगों का गूगल पर विश्वास है। ऐसे में जैसे ही कोई कॉल करता है, बात उनसे होती है। समस्या पूछते हैं और मोबाइल पर एक लिंक देते हैं और एप लोड करने के लिए कहते हैं। उस लिंक पर क्लिक करते ही कई एप आ जाते हैं, जिस पर क्लिक करते ही मोबाइल का संचालन उनके पास चला जाता है। मोबाइल हाथ में रहते हुए एनी डेस्क पर लेकर संचालन वह खुद करते हैं। मैसेज सहित सब कुछ उनके फोन पर जाएगा। देखते ही देखते बैंक खाता खाली हो जाएगा। इसके बारे में पता भी नहीं चलेगा। रुपये निकलने का मैसेज उनके पास जाता है। बाद में जब रुपये निकालने लोग बैंक जाते हैं, गूगल पे से किसी के खाते में रुपये ट्रांसफर करते हैं या बैलेंस चेक करते हैं, तब धोखाधड़ी के शिकार होने की जानकारी लोगों को हो रही है। इस प्रकार की ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तीन दिन में चार लोगों से सवा चार लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जिसकी साइबर सेल जांच कर रही है।
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एप पर क्लिक करते ही कुछ देर में उड़ा दिए 37 हजार
जोगिया कोतवाली क्षेत्र के देवरा गांव निवासी राजकुमार समाचार पत्र वितरक हैं। उनके मुताबिक गूगल पे में दिक्कत होने पर गूगल से कस्टमर केयर नंबर मांगा। नंबर मिलने पर बात की तो एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने के लिए कहा। जैसे-जैसे बताया करते गए। इसके बाद मोबाइल को रख दिया। कारण हैक करने लगा। इसके बाद 37 हजार रुपये खाते से कट गए। राजकुमार ने जोगिया पुलिस के साथ ही साइबर सेल में इसकी शिकायत की है।
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तीन बार में उड़ा दिए खाते से तीन लाख रुपये
खेसरहा थाना क्षेत्र के कलनाखोर गांव निवासी अवधेश कुमार के मुताबिक गूगल से मिले एक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके इर्नवटर के संबंध में शिकायत की थी। उसी दिन व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया और लिंक पर क्लिक करके शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा गया। जैसे-जैसे कहा गया, करते गए। उसी एप के जरिए गूगल पे पर पांच रुपये भेजा गया। इसके बाद तीन बार में तीन लाख रुपये खाते से कट गए। एक हजार रुपये एक व्यक्ति ने भेजा था, उसे देने के लिए जब चेक किया तो पता चला की तीन दिन में तीन लाख रुपये कट गए। पीडि़त की शिकायत पर साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है। इनके अलावा दो अन्य लोग भी 80 हजार रुपये ठगी का शिकार हुए हैं।
कॉल सेंटर वाला बोले एप लोड करें तो हो जाएं सतर्क
कॉल सेंटर से कभी कोई एप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहा जाता है। इसके साथ ही उनके बात करने का तरीका अलग होता है। वह जानकारी लेंगे और नोट करेंगे। अधिक समस्या होने पर इंजीनियर नजदीक के सेंटर पर जाने के लिए कहेंगे। जबकि ठग बात-बात में बार-बार यही बोलते हैं कि चिंता मत करो, समस्या का समाधान हो जाएगा। बस जो बोल रहे हैं, उसे करते जाओ। इसलिए बात करते ही परख में आ जाते हैं। अगर आपके साथ कोई ऐसा करता है तो समझिए की वह साइबर ठग है और आप फंस रहे हैं।
अतुल कुमार चौबे, साइबर एक्सपर्ट, साइबर सेल सिद्धार्थनगर
गूगल में घुसपैठ, रहिए सतर्क
आज हर व्यक्ति गूगल पर निर्भर हो चुका है। जानकारी तक तो सीमित है, लेकिन कस्टमर केयर नंबर और उसे पूछकर एप लोड करना खतरे से खाली नहीं है। इसमें विभिन्न कंपनी, बैंक सहित अन्य के कस्टमर केयर नंबर डाल दिए हैं। फेक एप तैयार किए हैं, जिसके लोड करते ही मोबाइल का संचालन एनी डेस्क की तरह से उनके हाथ में चला जा रहा है। देखते ही देखते आपके खाते से रकम कट जा रही है। फेक एप के मामले बढ़े हैं। अब तक ऐसे 10 से अधिक एप चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें लोड करवाकर वह लोगों को ठग रहे हैं। इस एप को लोड करने से बचें।
राजेश कुमार शुक्ल, प्रभारी साइबर सेल सिद्धार्थनगर
यह है एप
एनीडेस्क रिमोट डेस्कटॉप, टीम बीवर रिमोट कंट्रोल, क्रोम रिपोट डेस्क टॉप, एयर ड्रायड फाइल एंड रिमोट एक्सेज, टीम वीबर क्वीक स्पोर्ट, रिमोट डेस्क टॉप, एवसन रिमोट डेस्क टाप, एयर ड्रायड कास्ट स्क्रीन मीलोरिन से अब तक ठगी के मामले आ चुके हैं।
बोले अधिकारी
साइबर क्राइम लगातार बढ़ रहा है। इस अपराध से बचने के लिए स्कूल कॉलेज और अन्य स्थानों पर पुलिस जागरूक कर रही है। ठगी के मामलों की जांच करने के साथ ही धन की रिकवरी भी कर रही है। अगर ठगी का शिकार होते हैं तो तत्काल सूचना दें, जिससे धन की वापसी साइबर टीम करा सके।
सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर