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Siddharthnagar News: पराली जलाने पर 74 किसानों को जुर्माने का नोटिस
Thu, 16 Nov 2023 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 16 Nov 2023 11:23 PM IST
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शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में खेतों में पराली जलाते लोग। संवाद
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तहसील स्तरीय टीम ने की कार्रवाई, 87,500 रुपये लगाया जुर्माना, पराली जलाने के कारण बिगड़ रही है हवा, शहर के आसपास कार्रवाई का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में पर्यावरण की चिंता किए बिना पराली जलाने वाले किसानों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रशासन की चेतावनी के बावजूद लोगों ने धड़ल्ले से पराली जला ली। इन लोगों ने सोचा था कि हर बार की तरह इस बार भी कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इस बार प्रशासन से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने को गंभीरता से लिया है। जिले के 74 लोगों के खिलाफ 87,500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। पराली जलाने की शिकायतों के अनुसार तहसील स्तरीय टीमें सर्वे कर रही हैं और जुर्माना वसूलने के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है।
दीपावली में पटाखे के बाद पराली जलाने से हवा बिगड़ गई है। हवा में धुआं घुल जाने के कारण लोगों की सेहत पर भी खराब असर पड़ रहा है। पराली जलाने वाले किसानों ने चंद रुपये बचाने की लालच में पर्यावरण खराब करने में भूमिका निभाई है। 15 दिन पहले से पराली जलाने की तस्वीरें प्रकाशित हो रही है। इसे प्रशासन ने अब गंभीरता से लिया है। जिन लाेगों ने पराली जलाई थी, उनके घर अब जुर्माना वसूलने का नोटिस पहुंच रहा है। हालांकि, कुछ शिकायतों के मामले में प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर भी कार्रवाई कर रही है।
संयुक्त निदेशक आरके विश्वकर्मा ने बताया कि पराली जलाने के मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले में जो भी व्यक्ति पराली जलाएगा, उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
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शहर क्षेत्र के आसपास कार्रवाई का इंतजार
शहरी क्षेत्र में दीपावली के बाद हवा में प्रदूषण की मात्रा (एक्यूआई) बढ़ गया है। दीपावली के बाद शहर में पीएम-10 का स्तर 173 पहुंच गया था, जो तीन दिन बाद भी बृहस्पतिवार को 160 तक ही उतर पाया। विशेषज्ञों के अनुसार पीएम-10 की मात्रा 100 से अधिक है तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रसायन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि दीपावली में पटाखों के बाद पराली जलाने से भी वातावरण में धुएं का स्तर बढ़ा है।
धुएं से हो रही हैं कई प्रकार की बीमारियां
फोटो- डॉ. सुबोध चंद्रा
वातावरण में धुआं और धूल के कण बढ़ जाने के कारण श्वांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ गई है। हालांकि, जो लोग बीमार नहीं हैं, उन्हें भी दिक्कत हो रही है। लाेगों की आंखों में जलन, लाली और दर्द भी हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, धुआं की मात्रा बढ़ने से फेफड़े के साथ गले में भी दर्द हो रहा है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुबोध चंद्रा ने बताया कि सर्द मौसम में हवा में धुआं ऊपर नहीं गया है। इस कारण लोगों को सर्दी जुकाम और गले में संक्रमण हो रहा है। सांस फूलना, कफ आना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हैं। सिरदर्द और आंखाें संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। कोविड काल में जिनके फेफड़ों में संक्रमण हुआ था, जिन्हें पहले टीवी और निमोनिया हुई थी, ऐसे लोगों की तकलीफ बढ़ गई है। ओपीडी में इन दिनों 35 से 40 प्रतिशत मरीज धुआं के दुष्प्रभाव से बीमार हुए लोग पहुंच रहे हैं।
12 नवंबर को डुमरियागंज क्षेत्र के भनवापुर के तरहर में तीन लोगों पर 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज के ग्राम जुड़़वनिया में तीन लोगों के खिलाफ 5000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज के ग्राम देईपार में एक व्यक्ति के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज के समड़ा में चार लोगों के खिलाफ 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज क्षेत्र के ग्राम गदहरिया में दो लोगों पर 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज तहसील के भनवापुर क्षेत्र की धनोहरी ग्राम पंचायत में पांच लोगों के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को डुमरियागंज के भनवापुर क्षेत्र के महतिनिया खुर्द में 12 लोगों के खिलाफ 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को शोहरतगढ़ क्षेत्र के टेकनार के कपिया ग्रांट में दो लोगों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नंवबर को इटवा क्षेत्र के सिरसिया के ग्राम बभनी में दो किसानों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के खुनियाव के ग्राम सेहरी में आठ लोगों के खिलाफ 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के ग्राम पदमपुर में एक किसान के खिलाफ 2500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के मेहदानी के वीरवापुर में एक किसान के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के भगौसा में चार लोगों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा को सेमरी खान खुर्द के सलवन जोत में दो लोगों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को बांसी क्षेत्र के मिठवल के गजहड़ा में एक व्यक्ति के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को बांसी क्षेत्र के खेसरहा के नसीरगंज में ग्राम दुबई में तीन लोगों पर 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को बांसी क्षेत्र के मिठवल के पाला में एक व्यक्ति के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
14 नवंबर को डुमरियागंज तहसील के भनवापुर क्षेत्र की धनोहरी ग्राम पंचायत में 19 लोगों के खिलाफ 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
बृहस्पतिवार को भी जलती रही पराली, धुआं-धुआं हुआ वातावरण
फोटो--
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को भी पराली जलने की तस्वीरें सामने आईं। जहां भी पराली जली, वहां वातावरण में धुआं भर गया। सड़क पर चलने वाले लोगों को स्पष्ट दिखाई नहीं दिया तो लोगों को आंख में भी दिक्कत हुई।
भनवापुर प्रतिनिधि के अनुसार कृषि विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसान पाठशाला आयोजित कर पराली को खेतों में सड़ा कर खाद बनाने का तरीका बताया गया, मगर इस बार भी पराली जलाई जा रही है।
बृहस्पतिवार को ब्लाॅक क्षेत्र के हिजुरा, मंगराव, पंड़िया, सेखुई गोवर्धन, तेतरी आदि गांवों में किसानों के द्वारा खेतों में पराली जलाने का काम किया जा रहा था। हिजुरा गांव के पूरब अपने खेत में पराली जला रहे किसान को देखकर पहुंचे कृषि विभाग भनवापुर के कर्मचारियों ने आग बुझाई और चेतावनी दी कि कानूनी कार्रवाई होगी। किसानों ने गलती को मान कर आगे से खेत में पराली नहीं जलाने की बात कही।
इस संबंध में एसडीएम डुमरियागंज प्रवेंन्द्र कुमार ने कहा कि जहां भी पराली जलाई जा रही है, उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी ।
तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, सेटेलाइट से निगरानी के बावजूद भी क्षेत्र में पराली जलाई जा रही है। बृहस्पतिवार को शोहरतगढ़ से बढ़नी मार्ग से ही पराली जलाने की तस्वीरें नजर आईं। घोसियारी प्रतिनिधि के अनुसार, खेसरहा विकास क्षेत्र के कई गांव से लेकर जिले में जहां भी धान की कटाई हुई है । लोग खेत को साफ सुथरा बनाने के लिए बेहिचक पराली जला रहे हैं। बृहस्पतिवार को क्षेत्र में पराली जलाई गई।
पराली जलाने के नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से भूमि के सल्फर तत्व जल जाते हैं। जमीन की परत अधिक गर्म होने से पोषक तत्वों का क्षरण होता है। इसमें मित्र कीट एवं सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। ये उर्वरा शक्ति के लिए उपयोगी हैं।
पराली नहीं जलाने के फायदे
पराली नहीं जलाने से जीवांश कार्बन बनता है, जिसके सहारे बैक्टीरियां पनपते हैं। ये बैक्टीरिया भूमि को समृद्ध बनाते हैं। बैक्टीरिया को पर्याप्त भोजन मिलता है, वे जीवित रहते हैं।उर्वरकों को पौधों तक पहुंचने में भी बैक्टीरिया की आवश्यकता होती है। ऊपरी सतह ज्यादा गर्म नहीं होगी तो उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।
इस तरीके से होगा फायदा
फोटो-
सिद्धार्थनगर। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह ने बताया कि सभी कंबाइन मशीन में एसएमएस मशीन लगी होनी चाहिए ताकि डंठल के बचे हुए हिस्से को कतर दें। उसके बाद सुपर सीडर मशीन से बुआई करनी चाहिए। इसमें ज्यादा लागत नहीं बढ़ेगी और उर्वरा शक्ति का क्षरण भी नहीं होगा। सुपर सीडर मशीन 2.65 लाख रुपये की आती है। इसमें 1.05 लाख रुपये की छूट मिल जाती है। इस मशीन से एक बीघा गेहूं की बुआई में 400 रुपये का डीजल लगता है। किसानों को सही तरीके अपनाने की आवश्यकता है।
शहर में उड़ रही है धूल
सिद्धार्थनगर। शहर की खराब सड़कों पर धूल उड़ने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। शहर के खजुरिया रोड पर उड़ती धूल गर्मी में लोगों के घरों में जा रही थी, लेकिन यही धूल वातावरण में घुल रही है। इसी प्रकार रेलवे स्टेशन रोड से निकले सोहांस रोड पर धूल उड़ने से शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। मंडी रोड पर भी धूल उड़ने से लोगाें को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग कॉलोनी निवासी डॉ. रंबीत चंद्र द्विवेदी ने बताया कि नम मौसम में धूल और धुआं के कण ऊपर नहीं जा पाते हैं। इस कारण धुंध बन जाता है, जिसका सेहत पर खराब असर पड़ता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में पर्यावरण की चिंता किए बिना पराली जलाने वाले किसानों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रशासन की चेतावनी के बावजूद लोगों ने धड़ल्ले से पराली जला ली। इन लोगों ने सोचा था कि हर बार की तरह इस बार भी कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इस बार प्रशासन से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने को गंभीरता से लिया है। जिले के 74 लोगों के खिलाफ 87,500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। पराली जलाने की शिकायतों के अनुसार तहसील स्तरीय टीमें सर्वे कर रही हैं और जुर्माना वसूलने के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है।
दीपावली में पटाखे के बाद पराली जलाने से हवा बिगड़ गई है। हवा में धुआं घुल जाने के कारण लोगों की सेहत पर भी खराब असर पड़ रहा है। पराली जलाने वाले किसानों ने चंद रुपये बचाने की लालच में पर्यावरण खराब करने में भूमिका निभाई है। 15 दिन पहले से पराली जलाने की तस्वीरें प्रकाशित हो रही है। इसे प्रशासन ने अब गंभीरता से लिया है। जिन लाेगों ने पराली जलाई थी, उनके घर अब जुर्माना वसूलने का नोटिस पहुंच रहा है। हालांकि, कुछ शिकायतों के मामले में प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर भी कार्रवाई कर रही है।
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संयुक्त निदेशक आरके विश्वकर्मा ने बताया कि पराली जलाने के मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले में जो भी व्यक्ति पराली जलाएगा, उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
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शहर क्षेत्र के आसपास कार्रवाई का इंतजार
शहरी क्षेत्र में दीपावली के बाद हवा में प्रदूषण की मात्रा (एक्यूआई) बढ़ गया है। दीपावली के बाद शहर में पीएम-10 का स्तर 173 पहुंच गया था, जो तीन दिन बाद भी बृहस्पतिवार को 160 तक ही उतर पाया। विशेषज्ञों के अनुसार पीएम-10 की मात्रा 100 से अधिक है तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रसायन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि दीपावली में पटाखों के बाद पराली जलाने से भी वातावरण में धुएं का स्तर बढ़ा है।
धुएं से हो रही हैं कई प्रकार की बीमारियां
फोटो- डॉ. सुबोध चंद्रा
वातावरण में धुआं और धूल के कण बढ़ जाने के कारण श्वांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ गई है। हालांकि, जो लोग बीमार नहीं हैं, उन्हें भी दिक्कत हो रही है। लाेगों की आंखों में जलन, लाली और दर्द भी हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, धुआं की मात्रा बढ़ने से फेफड़े के साथ गले में भी दर्द हो रहा है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुबोध चंद्रा ने बताया कि सर्द मौसम में हवा में धुआं ऊपर नहीं गया है। इस कारण लोगों को सर्दी जुकाम और गले में संक्रमण हो रहा है। सांस फूलना, कफ आना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हैं। सिरदर्द और आंखाें संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। कोविड काल में जिनके फेफड़ों में संक्रमण हुआ था, जिन्हें पहले टीवी और निमोनिया हुई थी, ऐसे लोगों की तकलीफ बढ़ गई है। ओपीडी में इन दिनों 35 से 40 प्रतिशत मरीज धुआं के दुष्प्रभाव से बीमार हुए लोग पहुंच रहे हैं।
12 नवंबर को डुमरियागंज क्षेत्र के भनवापुर के तरहर में तीन लोगों पर 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज के ग्राम जुड़़वनिया में तीन लोगों के खिलाफ 5000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज के ग्राम देईपार में एक व्यक्ति के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज के समड़ा में चार लोगों के खिलाफ 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज क्षेत्र के ग्राम गदहरिया में दो लोगों पर 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
12 नवंबर को डुमरियागंज तहसील के भनवापुर क्षेत्र की धनोहरी ग्राम पंचायत में पांच लोगों के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को डुमरियागंज के भनवापुर क्षेत्र के महतिनिया खुर्द में 12 लोगों के खिलाफ 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को शोहरतगढ़ क्षेत्र के टेकनार के कपिया ग्रांट में दो लोगों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नंवबर को इटवा क्षेत्र के सिरसिया के ग्राम बभनी में दो किसानों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के खुनियाव के ग्राम सेहरी में आठ लोगों के खिलाफ 7,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के ग्राम पदमपुर में एक किसान के खिलाफ 2500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के मेहदानी के वीरवापुर में एक किसान के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा क्षेत्र के भगौसा में चार लोगों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को इटवा को सेमरी खान खुर्द के सलवन जोत में दो लोगों के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को बांसी क्षेत्र के मिठवल के गजहड़ा में एक व्यक्ति के खिलाफ 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को बांसी क्षेत्र के खेसरहा के नसीरगंज में ग्राम दुबई में तीन लोगों पर 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
13 नवंबर को बांसी क्षेत्र के मिठवल के पाला में एक व्यक्ति के खिलाफ 2,500 रुपये जुर्माना लगाया गया।
14 नवंबर को डुमरियागंज तहसील के भनवापुर क्षेत्र की धनोहरी ग्राम पंचायत में 19 लोगों के खिलाफ 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
बृहस्पतिवार को भी जलती रही पराली, धुआं-धुआं हुआ वातावरण
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को भी पराली जलने की तस्वीरें सामने आईं। जहां भी पराली जली, वहां वातावरण में धुआं भर गया। सड़क पर चलने वाले लोगों को स्पष्ट दिखाई नहीं दिया तो लोगों को आंख में भी दिक्कत हुई।
भनवापुर प्रतिनिधि के अनुसार कृषि विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसान पाठशाला आयोजित कर पराली को खेतों में सड़ा कर खाद बनाने का तरीका बताया गया, मगर इस बार भी पराली जलाई जा रही है।
बृहस्पतिवार को ब्लाॅक क्षेत्र के हिजुरा, मंगराव, पंड़िया, सेखुई गोवर्धन, तेतरी आदि गांवों में किसानों के द्वारा खेतों में पराली जलाने का काम किया जा रहा था। हिजुरा गांव के पूरब अपने खेत में पराली जला रहे किसान को देखकर पहुंचे कृषि विभाग भनवापुर के कर्मचारियों ने आग बुझाई और चेतावनी दी कि कानूनी कार्रवाई होगी। किसानों ने गलती को मान कर आगे से खेत में पराली नहीं जलाने की बात कही।
इस संबंध में एसडीएम डुमरियागंज प्रवेंन्द्र कुमार ने कहा कि जहां भी पराली जलाई जा रही है, उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी ।
तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, सेटेलाइट से निगरानी के बावजूद भी क्षेत्र में पराली जलाई जा रही है। बृहस्पतिवार को शोहरतगढ़ से बढ़नी मार्ग से ही पराली जलाने की तस्वीरें नजर आईं। घोसियारी प्रतिनिधि के अनुसार, खेसरहा विकास क्षेत्र के कई गांव से लेकर जिले में जहां भी धान की कटाई हुई है । लोग खेत को साफ सुथरा बनाने के लिए बेहिचक पराली जला रहे हैं। बृहस्पतिवार को क्षेत्र में पराली जलाई गई।
पराली जलाने के नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से भूमि के सल्फर तत्व जल जाते हैं। जमीन की परत अधिक गर्म होने से पोषक तत्वों का क्षरण होता है। इसमें मित्र कीट एवं सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। ये उर्वरा शक्ति के लिए उपयोगी हैं।
पराली नहीं जलाने के फायदे
पराली नहीं जलाने से जीवांश कार्बन बनता है, जिसके सहारे बैक्टीरियां पनपते हैं। ये बैक्टीरिया भूमि को समृद्ध बनाते हैं। बैक्टीरिया को पर्याप्त भोजन मिलता है, वे जीवित रहते हैं।उर्वरकों को पौधों तक पहुंचने में भी बैक्टीरिया की आवश्यकता होती है। ऊपरी सतह ज्यादा गर्म नहीं होगी तो उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।
इस तरीके से होगा फायदा
फोटो-
सिद्धार्थनगर। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह ने बताया कि सभी कंबाइन मशीन में एसएमएस मशीन लगी होनी चाहिए ताकि डंठल के बचे हुए हिस्से को कतर दें। उसके बाद सुपर सीडर मशीन से बुआई करनी चाहिए। इसमें ज्यादा लागत नहीं बढ़ेगी और उर्वरा शक्ति का क्षरण भी नहीं होगा। सुपर सीडर मशीन 2.65 लाख रुपये की आती है। इसमें 1.05 लाख रुपये की छूट मिल जाती है। इस मशीन से एक बीघा गेहूं की बुआई में 400 रुपये का डीजल लगता है। किसानों को सही तरीके अपनाने की आवश्यकता है।
शहर में उड़ रही है धूल
सिद्धार्थनगर। शहर की खराब सड़कों पर धूल उड़ने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। शहर के खजुरिया रोड पर उड़ती धूल गर्मी में लोगों के घरों में जा रही थी, लेकिन यही धूल वातावरण में घुल रही है। इसी प्रकार रेलवे स्टेशन रोड से निकले सोहांस रोड पर धूल उड़ने से शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। मंडी रोड पर भी धूल उड़ने से लोगाें को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग कॉलोनी निवासी डॉ. रंबीत चंद्र द्विवेदी ने बताया कि नम मौसम में धूल और धुआं के कण ऊपर नहीं जा पाते हैं। इस कारण धुंध बन जाता है, जिसका सेहत पर खराब असर पड़ता है।