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आवास बिना नहीं हो पा रही बेटों की शादी, घर देख लौट जाते हैं वर देखने वाले

Thu, 09 Dec 2021 11:00 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 11:00 PM IST
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Not Marriage Without home
बगैर आवास नहीं हो पा रही बेटों की शादी
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बिस्कोहर (सिद्धार्थनगर)। बिस्कोहर नगर पंचायत बन गया। लोगों को शहर का नाम मिला गया। पर दो वर्ष बाद भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। आवास की आस में कई परिवार भटक रहे हैं। छप्पर और पॉलिथीन डालकर गुजारा करने को विवश हैं। जरूरतमंद आवेदन तो करते हैं, लेकिन उन्हें आवास नहीं मिल पा रहा है। कुछ परिवारों का कहना है कि घर न होने से बेटों की शादी नहीं हो पा रही है। वर देखने वाले यह कहकर चले जाते हैं कि हमारी बेटी किस घर में रहेगी।
नगर पंचायत बने बिस्कोहर में 23 गांवों को शामिल किया गया। दो वर्ष पूरा यह गांव नगर पंचायत में चल गए। तब लोगों को लगा कि अब सारी सुविधाएं मिलेंगी। दो वर्ष बाद भी कुछ नहीं बदला। शामिल गांवों के बहुत गरीब परिवार आवास इस योजना से वंचित हैं। बरसात के महीने में पुराने मकानों में रहने को मजबूर हैं। बारिश से बचने के लिए इन परिवारों को पॉलीथिन या दूसरे के छत का सहारा लेना पड़ता है। नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के माधोपुर निवासी प्रेम नारायन नाइक का कहना है कि पिछले 40 वर्षों से छप्पर में सर्दी, गर्मी व बरसात का मौसम गुजरता हैं। कई बार आवास के लिए ग्राम प्रधान और अब नगर पंचायत के कर्मचारियों को जरूरी कागजात दिया। अधिकारी गांव में आए आवास देने का आश्वासन देकर चले गए। मेरे दो लड़के बालिग हो चुके हैं। आवास के बगैर उनकी शादी नहीं हो पा रही है। शादी करने के लिए लड़के मेहनत मजदूरी करते हैं ताकि कुछ पैसा जुट जाए, जिससे मकान बनवा सकूं। लेकिन जो पैसा मिलता है घर खर्च में चला जाता है।
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संग्रामपुर निवासिनी रेशमा गौतम का कहना कि मेरे चार छोटे बच्चे हैं। पति घर का खर्चा चलाने के लिए शहर में मजदूरी कर रहा है। आवास के लिए ग्राम प्रधान से लेकर अब नगर पंचायत के अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया। करीब दो बार अधिकारी घर पर आए और एक-एक हजार रुपये लेकर आश्वासन की पोटली थमाकर चले गए। बच्चों के साथ छप्पर में सर्दी की रात गुजारना कठिन साबित हो रहा है। बिस्कोहर उत्तर यादव डीह निवासिनी जुगरा यादव का कहना है कि मेरे परिवार में पति व तीन नाबालिग बच्चे हैं, जबसे शादी करके आई हूं। तब से टीन का छाजन करके बच्चों के साथ घर में रहती हूं, दूसरे लोगों को आवास पाने की जानकारी मिलती है तो पहले ग्राम पंचायत का और अब नगर पंचायत का दरवाजा खटखटाया। कई बार आधार कार्ड, बैंक पासबुक और फोटो जमा किया। लेकिन, अभी तक आवास की सुविधा नहीं मिल सकी है। बिस्कोहर पश्चिम टोला निवासिनी 80 वर्षीय मीना, 60 वर्षीय रमजानी व 45 वर्षीय नगीना, मंगल बाजार निवासी विद्या सागर गुप्ता व विद्या प्रकाश गुप्ता, चर्खागंज निवासी मुकेश गुप्ता, बेलवा बाबू गांव निवासी बालेश्वरी सिंह आदि का कहना है कि सरकार के द्वारा प्रत्येक गरीबों को पक्के मकान दिए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हम लोग अभी भी छप्पर, खपरैल व टीन पतरा में ही रात गुजार रहे हैं। गांव ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बन गया। लेकिन अभी तक हम लोगों को आवास नसीब नहीं हो पाया है। यहां सरकार का दावा जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से जमीन पर नहीं उतर पा सका है। इस संबंध में प्रभारी ईओ बिस्कोहर विंध्याचल ने कहा कि जांच चल रही है, अगली सूची में नाम आ जाएगा।
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