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रसोइयों का उत्पीड़न नहीं सहेगा संघ
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 18 May 2016 11:46 PM IST
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जेबीटी अध्यापकों का प्रदर्शन
- फोटो : amar ujala
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मिड-डे-मील रसोइयां कर्मचारी यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया और नौ सूत्रीय मांग पत्र डीएम को सौंपा। जिला संयोजक विजय नाथ तिवारी ने कहा कि रसोइयों से अन्य कार्य भी कराया जा रहा है और उन्हें अनावश्यक रूप से 12 बजे तक स्कूल पर रोका जाता है।
रसोइयों की अकारण वेतन कटौती की जाती है और निर्धारित समय पर मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता। सरकार श्रमिकों का अधिकारों का हनन कर एमडीएम योजना का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है।
श्याम लाल शर्मा ने कहा कि निजीकरण पर सरकार द्वारा रोक नहीं लगाया गया तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। रसोइयों की अन्य समस्याओं का समाधान बीएसए द्वारा नहीं किया जा रहा है।
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जिसके विरोध में वे 12 जुलाई को जेडी कार्यालय बस्ती में धरना करेंगे। मंजर अब्बास रिजवी ने कहा कि रसोइयों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। धरने में शामिल क्षेत्र पंचायत एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा यादि निजीकरण पर रोक नहीं लगाई गई तो वह आंदोलन को बाध्य होंगे।
डीएम को सौंपे मांग पत्र में कहा कि निजीकरण पर रोक लगाई जाए, रसोइयों के मानदेय का भुगतान उनके खाते में किया जाए, रसोइयों को 12 माह के वेतन का भुगतान किया जाए, रसोइयों को स्कूल कर्मचारी के रूप में पंजीकृत किया जाए और अन्य कर्मचारियों की भांति सुविधाएं दी जाएं।
इस दौरान रामउजागिर मौर्य, रामशंकर तिवारी, गणेश सिंह, प्रमिला विद्रोही, अर्जुन चौबे, श्यामा देवी, अनीता, सुनीता, रमा, निर्मला, अंजनी, मीरा, कलावती, शीला, कमलावती, कांती, शशिकला, कृपाशंकर, रामसेवक, पंकज कुमार, दधिवल, शत्रुधन आदि मौजूद रहे।
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रसोइयों की अकारण वेतन कटौती की जाती है और निर्धारित समय पर मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता। सरकार श्रमिकों का अधिकारों का हनन कर एमडीएम योजना का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है।
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श्याम लाल शर्मा ने कहा कि निजीकरण पर सरकार द्वारा रोक नहीं लगाया गया तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। रसोइयों की अन्य समस्याओं का समाधान बीएसए द्वारा नहीं किया जा रहा है।
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जिसके विरोध में वे 12 जुलाई को जेडी कार्यालय बस्ती में धरना करेंगे। मंजर अब्बास रिजवी ने कहा कि रसोइयों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। धरने में शामिल क्षेत्र पंचायत एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा यादि निजीकरण पर रोक नहीं लगाई गई तो वह आंदोलन को बाध्य होंगे।
डीएम को सौंपे मांग पत्र में कहा कि निजीकरण पर रोक लगाई जाए, रसोइयों के मानदेय का भुगतान उनके खाते में किया जाए, रसोइयों को 12 माह के वेतन का भुगतान किया जाए, रसोइयों को स्कूल कर्मचारी के रूप में पंजीकृत किया जाए और अन्य कर्मचारियों की भांति सुविधाएं दी जाएं।
इस दौरान रामउजागिर मौर्य, रामशंकर तिवारी, गणेश सिंह, प्रमिला विद्रोही, अर्जुन चौबे, श्यामा देवी, अनीता, सुनीता, रमा, निर्मला, अंजनी, मीरा, कलावती, शीला, कमलावती, कांती, शशिकला, कृपाशंकर, रामसेवक, पंकज कुमार, दधिवल, शत्रुधन आदि मौजूद रहे।