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Siddharthnagar News: लिवर संक्रमण सहित कई बीमारियों की दवा नहीं, बाहर जाना मजबूरी
Fri, 17 Jul 2026 02:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:47 AM IST
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी दवाओं की कमी बढ़ी मरीजों की मुश्किल
भारत के अलावा नेपाल से भी आते हैं बड़ी संख्या में मरीज
ढेबरूआ। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बढ़नी में दवाओं की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। लिवर संक्रमण समेत कई गंभीर बीमारियों की दवा न होने से मरीजों को बाहर का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, गंभीर स्थिति में रोगियों को मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। ऐसे में कई बार मरीज निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाने को मजबूर हो रहे हैं। डॉक्टर की बात करें तो बाल रोग, त्वचा रोग सहित कई डॉक्टर नहीं है, जिनकी तैनाती बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार, पीएचसी के लिए आवश्यक दवाओं की सूची के बावजूद धरातल पर यूरिक एसिड, पथरी और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं नहीं हैं, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सीमा पर स्थित एकमात्र मुख्य सरकारी अस्पताल होने के कारण यहां प्रतिदिन 200-250 की ओपीडी होती है, जिनमें बड़ी संख्या पड़ोसी देश नेपाल के नागरिकों की होती है। इन दिनों अस्पताल में वायरल फीवर, सर्दी, खांसी, टाइफाइड के साथ-साथ बच्चों में निमोनिया और विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन सैकड़ों से ज्यादा मरीजों की आमद को देखते हुए यहां तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती बेहद जरूरी है। इसके अलावा, प्रसव के दौरान क्रिटिकल कंडीशन होने पर मरीजों को तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिससे जच्चा-बच्चा की जान को खतरा बना रहता है। क्षेत्र के अनुज चौधरी, गोविंद, गोलू चौधरी, आशाराम, मोतीराम, राजेंद्र सहित दर्जनों लोगों ने कहा कि बच्चों को दिक्कत होने के बाद निजी अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। किसी गंभीर समस्या होने पर तत्काल निजी अस्पताल जाना मजबूरी है। इसे सीएचसी का दर्जा और सुविधा दिया जाना बहुत ही आवश्यक है। इन्होंने अस्पताल को जल्द से जल्द सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की मांग की है।
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बोले जिम्मेदार
पीएचसी के तय मानक के अनुसार अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टर भी पीएचसी के निर्धारित मानक के अनुसार तैनात हैं।
- डॉ. अविनाश चौधरी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, पीएचसी बढ़नी
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भारत के अलावा नेपाल से भी आते हैं बड़ी संख्या में मरीज
ढेबरूआ। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बढ़नी में दवाओं की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। लिवर संक्रमण समेत कई गंभीर बीमारियों की दवा न होने से मरीजों को बाहर का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, गंभीर स्थिति में रोगियों को मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। ऐसे में कई बार मरीज निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाने को मजबूर हो रहे हैं। डॉक्टर की बात करें तो बाल रोग, त्वचा रोग सहित कई डॉक्टर नहीं है, जिनकी तैनाती बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार, पीएचसी के लिए आवश्यक दवाओं की सूची के बावजूद धरातल पर यूरिक एसिड, पथरी और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं नहीं हैं, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सीमा पर स्थित एकमात्र मुख्य सरकारी अस्पताल होने के कारण यहां प्रतिदिन 200-250 की ओपीडी होती है, जिनमें बड़ी संख्या पड़ोसी देश नेपाल के नागरिकों की होती है। इन दिनों अस्पताल में वायरल फीवर, सर्दी, खांसी, टाइफाइड के साथ-साथ बच्चों में निमोनिया और विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन सैकड़ों से ज्यादा मरीजों की आमद को देखते हुए यहां तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती बेहद जरूरी है। इसके अलावा, प्रसव के दौरान क्रिटिकल कंडीशन होने पर मरीजों को तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिससे जच्चा-बच्चा की जान को खतरा बना रहता है। क्षेत्र के अनुज चौधरी, गोविंद, गोलू चौधरी, आशाराम, मोतीराम, राजेंद्र सहित दर्जनों लोगों ने कहा कि बच्चों को दिक्कत होने के बाद निजी अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। किसी गंभीर समस्या होने पर तत्काल निजी अस्पताल जाना मजबूरी है। इसे सीएचसी का दर्जा और सुविधा दिया जाना बहुत ही आवश्यक है। इन्होंने अस्पताल को जल्द से जल्द सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की मांग की है।
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बोले जिम्मेदार
पीएचसी के तय मानक के अनुसार अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टर भी पीएचसी के निर्धारित मानक के अनुसार तैनात हैं।
- डॉ. अविनाश चौधरी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, पीएचसी बढ़नी