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कर्मचारी नहीं, भविष्य निर्माता समझें शिक्षक
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:01 PM IST
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लोहिया कला भवन में उपस्थित शिक्षक।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मिशन शिक्षण संवाद के तहत लोहिया कला भवन में आयोजित दो दिवसीय शैक्षिक गुणवत्ता का सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में जिले के 162 शिक्षकों ने नवाचार के अपने-अपने मॉडल प्रस्तुत कर प्राथमिक शिक्षा में सुधार करने का सुझाव दिया। एक-दूसरे के सुझावों को अमल कर प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता जताई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री जयप्रताप सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से शिक्षक का छोटा से छोटा प्रयास भी बड़ा योगदान देता है।
शिक्षक अपने को भविष्य निर्माता मानें, न कि सरकारी नौकरी करने वाला। एक स्कूल में कई तरह की प्रतिभा वाले छात्र होते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ शिक्षक ही कर सकता है और उसकी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ सकता है। इसके पूर्व इटवा के विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि इस आधुनिक दौर में पुरानी पद्धति से शिक्षा देना अब संभव नही है, इसलिए नवाचार (इन्नोवेशन) की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य मन को संतोष देता है, अभिव्यक्ति की आजादी के साथ-साथ आपके छात्र आपको पूरा संमान देते हैं, देश-विदेश में अपने शिक्षक का मान बढ़ाते हैं। जबकि राजनीतिक जीवन में इसके ठीक उलट है। अगर इन दोनों में से किसी एक को चुनना है तो बेशक मैं शिक्षण कार्य को प्राथमिकता दूंगा। शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह ने कहा कि पहले मैं भी शिक्षक था, लेकिन बढ़ती जिम्मेदारी के बीच मैं राजनीतिक जीवन में आया।
अपने शिक्षकों के बताए एक-एक शब्द को गुरुमंत्र मान कर आगे बढ़कर समाज की सेवा कर रहा हूं। कार्यक्रम में गोंडा की उमा सिंह, लखनऊ के कुंवर सेन, कुशीनगर की प्रज्ञा राय, मैनपुरी की प्रज्ञा श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर के नसीम अहमद, दुर्गेश मिश्रा, हापुड़ की कोमल त्यागी, चित्रकूट के राजकुमार शर्मा, भदोही के संत कुमार आदि ने अपने-अपने नवाचार के मॉडल प्रस्तुत किया। इस अवसर डीएम कुणाल सिल्कू, बीएसए मनिराम सिंह, प्राचार्य केसी भारती, प्राशिसं के राधेरमण त्रिपाठी, योगेंद्र पांडेय, सर्वेष्ट मिश्रा, नागेंद्र सिंह, सुरेंद्र श्रीवास्तव, अरुणेंद्र त्रिपाठी, बीईओ व्यासदेव, अभिमन्यु, चंद्र भूषण पांडेय, सीमा पांडेय, रीता गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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शिक्षक अपने को भविष्य निर्माता मानें, न कि सरकारी नौकरी करने वाला। एक स्कूल में कई तरह की प्रतिभा वाले छात्र होते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ शिक्षक ही कर सकता है और उसकी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ सकता है। इसके पूर्व इटवा के विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि इस आधुनिक दौर में पुरानी पद्धति से शिक्षा देना अब संभव नही है, इसलिए नवाचार (इन्नोवेशन) की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य मन को संतोष देता है, अभिव्यक्ति की आजादी के साथ-साथ आपके छात्र आपको पूरा संमान देते हैं, देश-विदेश में अपने शिक्षक का मान बढ़ाते हैं। जबकि राजनीतिक जीवन में इसके ठीक उलट है। अगर इन दोनों में से किसी एक को चुनना है तो बेशक मैं शिक्षण कार्य को प्राथमिकता दूंगा। शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह ने कहा कि पहले मैं भी शिक्षक था, लेकिन बढ़ती जिम्मेदारी के बीच मैं राजनीतिक जीवन में आया।
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अपने शिक्षकों के बताए एक-एक शब्द को गुरुमंत्र मान कर आगे बढ़कर समाज की सेवा कर रहा हूं। कार्यक्रम में गोंडा की उमा सिंह, लखनऊ के कुंवर सेन, कुशीनगर की प्रज्ञा राय, मैनपुरी की प्रज्ञा श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर के नसीम अहमद, दुर्गेश मिश्रा, हापुड़ की कोमल त्यागी, चित्रकूट के राजकुमार शर्मा, भदोही के संत कुमार आदि ने अपने-अपने नवाचार के मॉडल प्रस्तुत किया। इस अवसर डीएम कुणाल सिल्कू, बीएसए मनिराम सिंह, प्राचार्य केसी भारती, प्राशिसं के राधेरमण त्रिपाठी, योगेंद्र पांडेय, सर्वेष्ट मिश्रा, नागेंद्र सिंह, सुरेंद्र श्रीवास्तव, अरुणेंद्र त्रिपाठी, बीईओ व्यासदेव, अभिमन्यु, चंद्र भूषण पांडेय, सीमा पांडेय, रीता गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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