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गुणवत्ता सुधार में कारगर साबित होगी नई शिक्षा नीति
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गुणवत्ता सुधार में नई शिक्षा नीति होगी कारगर
नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षाविदों ने दी प्रतिक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। केंद्र सरकार की ओर से लंबे समय बाद नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिली है। इस नीति की सराहना हो रही है। अब शिक्षा गुणवत्ता पर विशेष बल मिलेगा। इस नीति से जहां शिक्षकों की क्षमताओं का आकलन होगा, वहीं छात्रों को भी लाभ मिलेगा। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षाविदों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भारत भूषण द्विवेदी ने बताया कि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि वहां के जनता की योग्यता एवं कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। नई शिक्षा नीति राष्ट्र की मानव संपदा को समृद्धि करते हुए राष्ट्र के नवनिर्माण में एवं आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। कई विषयगत ज्ञान के साथ ही रोजगार को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। जयकिसान इंटर कॉलेज सकतपुर सनई के पूर्व प्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि नई शिक्षा नीति से नियुक्तियों में पारदर्शिता आएगी। फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगा तो आयोग का गठन भी होगा। अब इस नीति से शिक्षा के तीनों विभाग जैसे माध्यमिक, उच्च और प्राथमिक एक ही छतरी के नीचे रहेंगे। इनके नियोक्ता अलग-अलग रहेंगे। शिक्षक चयन के लिए लिखित परीक्षा और कठिन होगी। स्वागत योग्य है। श्री सिहेंश्वरी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य शिक्षा के सैद्धांतिक और व्यवहारिक उद्देश्यों में समन्वय स्थापित करेगा। सरकार की ओर जारी नई नीति वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। जिससे चतुर्दिक सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी। शिक्षा व्यवस्था में और पारदर्शिता आएगी। सरस्वती विद्या मंदिर बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य अंजू चौहान ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत अब देश के तीन से 18 वर्ष के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की हो गई है। जो सराहनीय पहल है। शिक्षा के साथ-साथ सरकार ने इस नई शिक्षा नीति में खेल, संगीत, कला, शिल्प, योग को शामिल किया गया है। आगामी दिनों में होने वाली परीक्षाओं में समग्रता होगी।
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नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षाविदों ने दी प्रतिक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। केंद्र सरकार की ओर से लंबे समय बाद नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिली है। इस नीति की सराहना हो रही है। अब शिक्षा गुणवत्ता पर विशेष बल मिलेगा। इस नीति से जहां शिक्षकों की क्षमताओं का आकलन होगा, वहीं छात्रों को भी लाभ मिलेगा। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षाविदों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भारत भूषण द्विवेदी ने बताया कि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि वहां के जनता की योग्यता एवं कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। नई शिक्षा नीति राष्ट्र की मानव संपदा को समृद्धि करते हुए राष्ट्र के नवनिर्माण में एवं आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। कई विषयगत ज्ञान के साथ ही रोजगार को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। जयकिसान इंटर कॉलेज सकतपुर सनई के पूर्व प्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि नई शिक्षा नीति से नियुक्तियों में पारदर्शिता आएगी। फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगा तो आयोग का गठन भी होगा। अब इस नीति से शिक्षा के तीनों विभाग जैसे माध्यमिक, उच्च और प्राथमिक एक ही छतरी के नीचे रहेंगे। इनके नियोक्ता अलग-अलग रहेंगे। शिक्षक चयन के लिए लिखित परीक्षा और कठिन होगी। स्वागत योग्य है। श्री सिहेंश्वरी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य शिक्षा के सैद्धांतिक और व्यवहारिक उद्देश्यों में समन्वय स्थापित करेगा। सरकार की ओर जारी नई नीति वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। जिससे चतुर्दिक सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी। शिक्षा व्यवस्था में और पारदर्शिता आएगी। सरस्वती विद्या मंदिर बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य अंजू चौहान ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत अब देश के तीन से 18 वर्ष के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की हो गई है। जो सराहनीय पहल है। शिक्षा के साथ-साथ सरकार ने इस नई शिक्षा नीति में खेल, संगीत, कला, शिल्प, योग को शामिल किया गया है। आगामी दिनों में होने वाली परीक्षाओं में समग्रता होगी।