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फिर मिली लावारिस नवजात, न कोई केस न जांच
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फिर मिली लावारिस नवजात, न कोई केस न जांच
आठ साल में यहां-वहां फेंकी पाई जा चुकी हैं 50 से अधिक बच्चियां
कानूनन अपराध होने के बाद भी न जन्मदाता चेत रहे और न पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बेटियों को पढ़ाने, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए भले ही तमाम प्रयास किए जा रहे हों, लोगों को जागरूक किया जा रहा हो, लेकिन इसके बाद भी मानसिकता में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। जिले की बात करें तो वर्ष 2012 से अब तक 50 से अधिक नवजात बच्चियां यहां-वहां फेंकी पाई जा चुकी हैं। जिन्होंने जन्म देकर ठुकरा दिया, उन्हें खोजना तो दूर ऐसे मामलों में आज तक एक भी केस दर्ज न होना यह दर्शाता है कि पुलिस को भी कोई लेना-देना नहीं। यह स्थिति तब है जब 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना कानूनन अपराध है। बांसी के खेसरहा क्षेत्र के ग्राम कोहड़ी में रविवार की भोर में कंबल में लिपटी एक और नवजात बच्ची का मिलना यह बताता है कि लोगों में बेटियों के प्रति क्रूरता बढ़ती ही जा रही है।
जानवरों ने नोच लिया था नवजात को
वर्ष 2018 में उसका थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव के पास एक नवजात बच्ची मिली थी। लोगों ने उसे रोते हुए देखा तो पुलिस को जानकारी दी। पुलिस व चाइल्ड लाइन की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जानवरों के सिर नोच लेने से उसकी जान नहीं बच पाई।
नवजात को पशुओं की घारी में फेंक दिया
वर्ष 2018 में जोगिया कोतवाली क्षेत्र के गांव के एक टोले में जन्म के बाद ही किसी ने पशुओं के रखे जाने वाले स्थान पर छोड़ दिया था। बच्ची की रोने की आवाज सुनकर एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर पुलिस ने आगे जांच की जहमत नहीं उठाई।
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गली में पड़ी मिली थी नवजात
वर्ष 2019 में उसका क्षेत्र के सोहांस गांव के एक टोले में दो घरों के बीच गली में एक नवजात बच्ची पाई गई थी। पुलिस की मदद से उसे चाइल्ड लाइन पहुंचाया गया। वहां से जिला अस्पताल भेजकर इलाज कराया गया। बाद में बच्ची चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर दी गई।
खेत में मिली थी बच्ची
वर्ष 2019 में जोगिया कोतवाली क्षेत्र के महादेवा तिवारी गांव के पास खेत के बगल में स्थित झाड़ी में एक बच्ची मिली थी। जानकारी होने पर पुलिस ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद उसे चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर पुलिस ने पीछा छुड़ा लिया।
24 घंटे रख सकते हैं चाइल्ड लाइन के लोग
लावारिस मिले बच्चों का चाइल्ड लाइन के जरिये स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। बच्चा अगर स्वस्थ है तो उसे 24 घटे तक रखा जा सकता है। इसके बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है। वहां से आदेश मिलने के बाद राजकीय शिशु गृह को सुपुर्द कर दिया जाता है। कोर्ट के आदेश के बिना बच्चों को किसी को सुपुर्द नहीं किया जाता।
- सुनील कुमार उपाध्याय, समन्वयक, चाइल्ड लाइन, सिद्धार्थनगर
आठ साल में 50 से अधिक बच्चे मिल चुके
चाइल्ड लाइन के आकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012 से अब तक जिले में 50 से अधिक नवजात बच्चे मिल चुके हैं। इनमें ज्यादातर नवजात थे, जबकि किसी की उम्र चार वर्ष तो किसी की छह और आठ महीने थी। दूसरी ओर कई बच्चे ऐसे होते हैं जो चाइल्ड लाइन तक भी नहीं पहुंच पाते।
आजीवन कारावास की भी हो सकती है सजा
माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाला व्यक्ति अगर 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करता है तो यह बड़ा अपराध है। इसमें सात साल की सजा, जुर्माना या दोनो हो सकता है। धारा-318 आईपीसी में पैदाइश छुपाने के लिए नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है। इसमें दो साल की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसके अलावा नवजात को ऐसे फेंक देना जिससे उसकी मौत हो जाए या फिर जान को खतरा हो, ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ धारा 302 व धारा 304 के तहत केस दर्ज होता है। इसमें आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
संजय श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता
कोट
खेसरहा के कोहड़ी गांव में नवजात बच्ची की सूचना मिली थी। खेसरहा पुलिस ने बच्ची को नजदीक के अस्पताल पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। बच्ची का इलाज चल रहा है। मामले की जांच के लिए एसओ को निर्देश दिया गया है।
- विजय ढुल, एसपी
लावारिस हाल में बच्ची को छोड़ गए
बांसी। खेसरहा क्षेत्र के ग्राम कोहड़ी में रविवार की भोर एक नवजात बच्ची लावारिस हाल में कंबल में लिपटी मिली। गांव की कुछ महिलाएं उधर गईं तो उन्होंने ग्रामीणों को सूचना दी। बच्ची की नाल पर चिमटी लगी था। इससे लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि डिलीवरी किसी अस्पताल में हुई होगी। गांव के चौकीदार की सूचना पर पुलिस ने एक महिला के सहयोग से बच्ची को सीएचसी खेसरहा पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। थानाध्यक्ष खेसरहा प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि बच्ची को अस्पताल पहुंचाने के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी को सूचित कर दिया गया।
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आठ साल में यहां-वहां फेंकी पाई जा चुकी हैं 50 से अधिक बच्चियां
कानूनन अपराध होने के बाद भी न जन्मदाता चेत रहे और न पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बेटियों को पढ़ाने, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए भले ही तमाम प्रयास किए जा रहे हों, लोगों को जागरूक किया जा रहा हो, लेकिन इसके बाद भी मानसिकता में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। जिले की बात करें तो वर्ष 2012 से अब तक 50 से अधिक नवजात बच्चियां यहां-वहां फेंकी पाई जा चुकी हैं। जिन्होंने जन्म देकर ठुकरा दिया, उन्हें खोजना तो दूर ऐसे मामलों में आज तक एक भी केस दर्ज न होना यह दर्शाता है कि पुलिस को भी कोई लेना-देना नहीं। यह स्थिति तब है जब 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना कानूनन अपराध है। बांसी के खेसरहा क्षेत्र के ग्राम कोहड़ी में रविवार की भोर में कंबल में लिपटी एक और नवजात बच्ची का मिलना यह बताता है कि लोगों में बेटियों के प्रति क्रूरता बढ़ती ही जा रही है।
जानवरों ने नोच लिया था नवजात को
वर्ष 2018 में उसका थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव के पास एक नवजात बच्ची मिली थी। लोगों ने उसे रोते हुए देखा तो पुलिस को जानकारी दी। पुलिस व चाइल्ड लाइन की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जानवरों के सिर नोच लेने से उसकी जान नहीं बच पाई।
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नवजात को पशुओं की घारी में फेंक दिया
वर्ष 2018 में जोगिया कोतवाली क्षेत्र के गांव के एक टोले में जन्म के बाद ही किसी ने पशुओं के रखे जाने वाले स्थान पर छोड़ दिया था। बच्ची की रोने की आवाज सुनकर एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर पुलिस ने आगे जांच की जहमत नहीं उठाई।
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गली में पड़ी मिली थी नवजात
वर्ष 2019 में उसका क्षेत्र के सोहांस गांव के एक टोले में दो घरों के बीच गली में एक नवजात बच्ची पाई गई थी। पुलिस की मदद से उसे चाइल्ड लाइन पहुंचाया गया। वहां से जिला अस्पताल भेजकर इलाज कराया गया। बाद में बच्ची चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर दी गई।
खेत में मिली थी बच्ची
वर्ष 2019 में जोगिया कोतवाली क्षेत्र के महादेवा तिवारी गांव के पास खेत के बगल में स्थित झाड़ी में एक बच्ची मिली थी। जानकारी होने पर पुलिस ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद उसे चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर पुलिस ने पीछा छुड़ा लिया।
24 घंटे रख सकते हैं चाइल्ड लाइन के लोग
लावारिस मिले बच्चों का चाइल्ड लाइन के जरिये स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। बच्चा अगर स्वस्थ है तो उसे 24 घटे तक रखा जा सकता है। इसके बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है। वहां से आदेश मिलने के बाद राजकीय शिशु गृह को सुपुर्द कर दिया जाता है। कोर्ट के आदेश के बिना बच्चों को किसी को सुपुर्द नहीं किया जाता।
- सुनील कुमार उपाध्याय, समन्वयक, चाइल्ड लाइन, सिद्धार्थनगर
आठ साल में 50 से अधिक बच्चे मिल चुके
चाइल्ड लाइन के आकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012 से अब तक जिले में 50 से अधिक नवजात बच्चे मिल चुके हैं। इनमें ज्यादातर नवजात थे, जबकि किसी की उम्र चार वर्ष तो किसी की छह और आठ महीने थी। दूसरी ओर कई बच्चे ऐसे होते हैं जो चाइल्ड लाइन तक भी नहीं पहुंच पाते।
आजीवन कारावास की भी हो सकती है सजा
माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाला व्यक्ति अगर 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करता है तो यह बड़ा अपराध है। इसमें सात साल की सजा, जुर्माना या दोनो हो सकता है। धारा-318 आईपीसी में पैदाइश छुपाने के लिए नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है। इसमें दो साल की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसके अलावा नवजात को ऐसे फेंक देना जिससे उसकी मौत हो जाए या फिर जान को खतरा हो, ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ धारा 302 व धारा 304 के तहत केस दर्ज होता है। इसमें आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
संजय श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता
कोट
खेसरहा के कोहड़ी गांव में नवजात बच्ची की सूचना मिली थी। खेसरहा पुलिस ने बच्ची को नजदीक के अस्पताल पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। बच्ची का इलाज चल रहा है। मामले की जांच के लिए एसओ को निर्देश दिया गया है।
- विजय ढुल, एसपी
लावारिस हाल में बच्ची को छोड़ गए
बांसी। खेसरहा क्षेत्र के ग्राम कोहड़ी में रविवार की भोर एक नवजात बच्ची लावारिस हाल में कंबल में लिपटी मिली। गांव की कुछ महिलाएं उधर गईं तो उन्होंने ग्रामीणों को सूचना दी। बच्ची की नाल पर चिमटी लगी था। इससे लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि डिलीवरी किसी अस्पताल में हुई होगी। गांव के चौकीदार की सूचना पर पुलिस ने एक महिला के सहयोग से बच्ची को सीएचसी खेसरहा पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। थानाध्यक्ष खेसरहा प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि बच्ची को अस्पताल पहुंचाने के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी को सूचित कर दिया गया।