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यात्री वाहनों को डेढ़ साल बाद नेपाल सीमा में जाने की मिली इजाजत, बढ़ी चहल-पहल
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यात्री वाहनों को डेढ़ साल बाद नेपाल सीमा में जाने की मिली इजाजत, बढ़ी चहल-पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
बढ़नी/खुनुवां (सिद्धार्थनगर)। भारत-नेपाल सीमा पर शुक्रवार को यात्री वाहनों को जांच के बाद आने-जाने की छूट मिल गई। इससे डेढ़ साल बाद व्यापार लगा कोरोना का ग्रहण हट गया और सीमाई इलाके में रौनक बढ़ गई। बेटी-रोटी के रिश्ते वाले दोनों देशों के लोगों ने एक- दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियों का इजहार किया।
कोरोना संक्रमण के बाद भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने की छूट मिली है। भारत के अलीगढ़वा, बढ़नी, खुनुवां, ककरहवां सीमा पर अचानक चहल -पहल बढ़ गई है। जांच के बाद लोगों को सीमा करने की छूट दी जा रही है। पहले पैदल लोग ही अंदर आ जा सकते थे, लेकिन अब यात्री वाहन वाहन जा रहे हैं। आरटीपीसीआर की 72 घंटे की अंदर की रिपोर्ट एवं पहचान पत्र के अन्य दस्तावेजों को दिखाने पर लोगों को जाने की छूट दी जा रही है। बढ़नी बीओपी के प्रभारी इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने बताया कि भारत नेपाल सीमा पर पैदल और यात्री वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। बिना जांच के किसी भी व्यक्ति को सीमा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
आने-जाने की छूट से रोजी-रोटी की जगी उम्मीद
सुनील मिश्रा का कहना है कि सीमा सील होने से किराना व्यवसाय पर काफी मंदी का असर है। कोरोना की तबाही के बाद अब रोजी-रोटी की उम्मीद जगी है। साइकिल के व्यापारी विंघ्याचल गिरि ने बताया कि व्यवसाय खत्म हो गया है। सीमा पर वाहनों के आने-जाने की छूट मिल गई है। दोनों देशों के लोग कुछ खास सामानों को खरीदने के लिए दूसरे की सीमा की दुकानों में जाते हैं। कास्टमेटिक्स व्यापारी दिनेश गुप्ता ने कहा कि सीमा बंद होने से रोजी - रोटी पर काफी संकट उत्पन्न हो गया था। बार्डर जल्दी खुला है, व्यवसाय पटरी पर लौटेगा। मेडिकल व्यवसायी शमीम अहमद ने कहा कि दवा के व्यवसाय पर लगभग 80 प्रतिशत असर पड़ा है। नेपाल-भारत सीमा के मुख्य मार्ग से पैदल आवागमन बाधित होने से व्यवसाय बहुत कम हो गया है। अब नई उम्मीद जगी है।
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भारत नेपाल सीमा को शर्तों के अनुसार खोला गया है। पूरी जांच के बाद ही वाहनों को सीमा पर प्रवेश दिया जा रहा है। इसमें कोरोना एनटीपीसीआर रिपोर्ट आवश्यक है।
-जिला प्रमुख, कपिलवस्तु चक्रपाणि पांडेय
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संवाद न्यूज एजेंसी
बढ़नी/खुनुवां (सिद्धार्थनगर)। भारत-नेपाल सीमा पर शुक्रवार को यात्री वाहनों को जांच के बाद आने-जाने की छूट मिल गई। इससे डेढ़ साल बाद व्यापार लगा कोरोना का ग्रहण हट गया और सीमाई इलाके में रौनक बढ़ गई। बेटी-रोटी के रिश्ते वाले दोनों देशों के लोगों ने एक- दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियों का इजहार किया।
कोरोना संक्रमण के बाद भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने की छूट मिली है। भारत के अलीगढ़वा, बढ़नी, खुनुवां, ककरहवां सीमा पर अचानक चहल -पहल बढ़ गई है। जांच के बाद लोगों को सीमा करने की छूट दी जा रही है। पहले पैदल लोग ही अंदर आ जा सकते थे, लेकिन अब यात्री वाहन वाहन जा रहे हैं। आरटीपीसीआर की 72 घंटे की अंदर की रिपोर्ट एवं पहचान पत्र के अन्य दस्तावेजों को दिखाने पर लोगों को जाने की छूट दी जा रही है। बढ़नी बीओपी के प्रभारी इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने बताया कि भारत नेपाल सीमा पर पैदल और यात्री वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। बिना जांच के किसी भी व्यक्ति को सीमा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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आने-जाने की छूट से रोजी-रोटी की जगी उम्मीद
सुनील मिश्रा का कहना है कि सीमा सील होने से किराना व्यवसाय पर काफी मंदी का असर है। कोरोना की तबाही के बाद अब रोजी-रोटी की उम्मीद जगी है। साइकिल के व्यापारी विंघ्याचल गिरि ने बताया कि व्यवसाय खत्म हो गया है। सीमा पर वाहनों के आने-जाने की छूट मिल गई है। दोनों देशों के लोग कुछ खास सामानों को खरीदने के लिए दूसरे की सीमा की दुकानों में जाते हैं। कास्टमेटिक्स व्यापारी दिनेश गुप्ता ने कहा कि सीमा बंद होने से रोजी - रोटी पर काफी संकट उत्पन्न हो गया था। बार्डर जल्दी खुला है, व्यवसाय पटरी पर लौटेगा। मेडिकल व्यवसायी शमीम अहमद ने कहा कि दवा के व्यवसाय पर लगभग 80 प्रतिशत असर पड़ा है। नेपाल-भारत सीमा के मुख्य मार्ग से पैदल आवागमन बाधित होने से व्यवसाय बहुत कम हो गया है। अब नई उम्मीद जगी है।
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भारत नेपाल सीमा को शर्तों के अनुसार खोला गया है। पूरी जांच के बाद ही वाहनों को सीमा पर प्रवेश दिया जा रहा है। इसमें कोरोना एनटीपीसीआर रिपोर्ट आवश्यक है।
-जिला प्रमुख, कपिलवस्तु चक्रपाणि पांडेय