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नेपाल ने लुंबिनी के लिए भी लगाया भंसार, बढ़ी समस्या
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नेपाल ने लुंबिनी के लिए भी लगाया भंसार, बढ़ी समस्या
लॉकडाउन समाप्त हुआ तो शुरू हुआ लुंबिनी का भंसार, भारत ने नहीं बदला नियम, सीमा से 10 किमी दूर है लुंबिनी
सिद्धार्थनगर/ककरहवा। नेपाल सरकार ने ककरहवा बार्डर पर लुंबिनी तक जाने के लिए भी भंसार का नियम लगा दिया है। इस कारण स्थानीय लोगों को तथागत बौद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी तक जाने में जेब ढीली करनी पड़ रही है, जबकि नेपाली वाहनों को भारतीय सीमा में प्रवेश करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान सील रही भारत-नेपाल सीमा पर फरवरी 2022 में वाहनों का आवागमन शुरू हुआ तो नेपाल ने भंसार का नियम बदल दिया।
ककरहवा बार्डर से लुंबिनी की दूरी महज 10 किमी है। नेपाल में प्रवेश के लिए चार पहिया वाहन को नेपाल मुद्रा में 500 रुपये एवं दो पहिया वाहनों के लिए 150 रुपये भंसार के रूप में शुल्क जमा करना पड़ता है, जबकि पहले के नियम के अंतर्गत नि:शुल्क सुविधा पर्ची बनवाकर लोग लुंबिनी में शांति भवन का दर्शन करते थे। इस नियम के कारण स्थानीय लोगों ने लुंबिनी जाना कम कर दिया है। भारत नेपाल से हुए समझौते के अनुसार भारत पुराने नियम का पालन कर रहा है, लेकिन नेपाल सरकार ने समझौते से हटकर ककरहवा बॉर्डर पर भंसार बनवाने का नियम लागू कर दिया है। इस कारण भारतीय पर्यटकों में आक्रोश है।
लुंबिनी में बढ़ गए हैं पर्यटक
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा लुंबिनी आए थे। लुंबिनी में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां ककरहवा के रास्ते प्रतिदिन औसतन 30 से 40 चार पहिया वाहन भारत से नेपाल में प्रवेश करते थे तो अब यह संख्या 65 से 75 तक पहुंच गई है।
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क्या कहते हैं लोग
भारत और नेपाल के लोगों के बीच रोटी बेटी का रिश्ता है। वर्षों से भारत के लोग लुंबिनी में भगवान बुद्ध का दर्शन करने नि:शुल्क सुविधा पर्ची से जाते थे तथा नेपाल के लोग भी भारत के निकटतम रेलवे स्टेशन तक नि:शुल्क सुविधा पर्ची से बेरोकटोक जाते हैं। इस मामले में भारत सरकार को पत्र भेजूंगा।
दिलीप पांडेय, ग्राम प्रधान दुल्ला शुमाली
नेपाल सरकार ने आपसी समझौते को एकतरफा रोककर दोनों देशों के सीमावर्ती लोगों के लिए अच्छा नहीं किया है। उम्मीद करता हूं कि नेपाल सरकार अपने आदेश को वापस लेगी। भगवान बुद्ध के तीर्थ स्थल कपिलवस्तु जाने में कोई शुल्क नहीं लगता है, लुंबिनी तक जाने की भी छूट दी जानी चाहिए।
भवानी शंकर शुक्ला, प्रधान बूड़ा
हम लोग वर्षों से लुंबिनी तक सुविधा पर्ची के सहारे रोज आते जाते रहे हैं। इस कारण कभी-कभी दिन में दो चार बार भी नेपाल आना-जाना पड़ जाता है। नेपाल सरकार का यह एक तरफा फैसला ठीक नही हैं। इस कारण स्थानीय लोगों की समस्या बढ़ गई है।
बुद्धेश जायसवाल, व्यापारी
नेपाल सरकार के एकतरफा समझौता उल्लंघन करने का मैं विरोध करता हूं। यदि नेपाल सरकार अपने आदेश को वापस नही लेती है तो भारत सरकार को भी ककरहवा बॉर्डर से नेपाली लोगों को मिल रही सुविधाओं पर रोक लगा देनी चाहिए। इस मामले में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगा।
अरविंद तिवारी, प्रधान झंगटी
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लॉकडाउन समाप्त होने के बाद फरवरी में नेपाल ने भंसार का नियम बदला है। अब लुंबिनी के लिए सुविधा पर्ची नहीं बनाई जा रही है। भारत सरकार के नियम के अनुसार ककरहवा बार्डर से नौगढ़ तक के लिए नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा दी जाती है।
अंगद कुमार, कस्टम अधीक्षक, ककरहवा बॉर्डर
लुंबिनी में भंसार
भारत नेपाल सीमा के ककरहवा बॉर्डर से लुम्बिनी जाने की नि:शुल्क सुविधा पर्ची क्यों बंद हुई, इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। हालांकि, इस सुविधा को फिर बहाल करने के लिए उच्च स्तर पर कार्य हो रहा है। संभावना है कि लुंबिनी की सुविधा पर्ची फिर शुरू हो जाएगी।
पुरुषोत्तम पौडेल, कस्टम निरीक्षक, कारीदह नेपाल
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लॉकडाउन समाप्त हुआ तो शुरू हुआ लुंबिनी का भंसार, भारत ने नहीं बदला नियम, सीमा से 10 किमी दूर है लुंबिनी
सिद्धार्थनगर/ककरहवा। नेपाल सरकार ने ककरहवा बार्डर पर लुंबिनी तक जाने के लिए भी भंसार का नियम लगा दिया है। इस कारण स्थानीय लोगों को तथागत बौद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी तक जाने में जेब ढीली करनी पड़ रही है, जबकि नेपाली वाहनों को भारतीय सीमा में प्रवेश करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान सील रही भारत-नेपाल सीमा पर फरवरी 2022 में वाहनों का आवागमन शुरू हुआ तो नेपाल ने भंसार का नियम बदल दिया।
ककरहवा बार्डर से लुंबिनी की दूरी महज 10 किमी है। नेपाल में प्रवेश के लिए चार पहिया वाहन को नेपाल मुद्रा में 500 रुपये एवं दो पहिया वाहनों के लिए 150 रुपये भंसार के रूप में शुल्क जमा करना पड़ता है, जबकि पहले के नियम के अंतर्गत नि:शुल्क सुविधा पर्ची बनवाकर लोग लुंबिनी में शांति भवन का दर्शन करते थे। इस नियम के कारण स्थानीय लोगों ने लुंबिनी जाना कम कर दिया है। भारत नेपाल से हुए समझौते के अनुसार भारत पुराने नियम का पालन कर रहा है, लेकिन नेपाल सरकार ने समझौते से हटकर ककरहवा बॉर्डर पर भंसार बनवाने का नियम लागू कर दिया है। इस कारण भारतीय पर्यटकों में आक्रोश है।
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लुंबिनी में बढ़ गए हैं पर्यटक
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा लुंबिनी आए थे। लुंबिनी में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां ककरहवा के रास्ते प्रतिदिन औसतन 30 से 40 चार पहिया वाहन भारत से नेपाल में प्रवेश करते थे तो अब यह संख्या 65 से 75 तक पहुंच गई है।
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क्या कहते हैं लोग
भारत और नेपाल के लोगों के बीच रोटी बेटी का रिश्ता है। वर्षों से भारत के लोग लुंबिनी में भगवान बुद्ध का दर्शन करने नि:शुल्क सुविधा पर्ची से जाते थे तथा नेपाल के लोग भी भारत के निकटतम रेलवे स्टेशन तक नि:शुल्क सुविधा पर्ची से बेरोकटोक जाते हैं। इस मामले में भारत सरकार को पत्र भेजूंगा।
दिलीप पांडेय, ग्राम प्रधान दुल्ला शुमाली
नेपाल सरकार ने आपसी समझौते को एकतरफा रोककर दोनों देशों के सीमावर्ती लोगों के लिए अच्छा नहीं किया है। उम्मीद करता हूं कि नेपाल सरकार अपने आदेश को वापस लेगी। भगवान बुद्ध के तीर्थ स्थल कपिलवस्तु जाने में कोई शुल्क नहीं लगता है, लुंबिनी तक जाने की भी छूट दी जानी चाहिए।
भवानी शंकर शुक्ला, प्रधान बूड़ा
हम लोग वर्षों से लुंबिनी तक सुविधा पर्ची के सहारे रोज आते जाते रहे हैं। इस कारण कभी-कभी दिन में दो चार बार भी नेपाल आना-जाना पड़ जाता है। नेपाल सरकार का यह एक तरफा फैसला ठीक नही हैं। इस कारण स्थानीय लोगों की समस्या बढ़ गई है।
बुद्धेश जायसवाल, व्यापारी
नेपाल सरकार के एकतरफा समझौता उल्लंघन करने का मैं विरोध करता हूं। यदि नेपाल सरकार अपने आदेश को वापस नही लेती है तो भारत सरकार को भी ककरहवा बॉर्डर से नेपाली लोगों को मिल रही सुविधाओं पर रोक लगा देनी चाहिए। इस मामले में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगा।
अरविंद तिवारी, प्रधान झंगटी
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लॉकडाउन समाप्त होने के बाद फरवरी में नेपाल ने भंसार का नियम बदला है। अब लुंबिनी के लिए सुविधा पर्ची नहीं बनाई जा रही है। भारत सरकार के नियम के अनुसार ककरहवा बार्डर से नौगढ़ तक के लिए नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा दी जाती है।
अंगद कुमार, कस्टम अधीक्षक, ककरहवा बॉर्डर
लुंबिनी में भंसार
भारत नेपाल सीमा के ककरहवा बॉर्डर से लुम्बिनी जाने की नि:शुल्क सुविधा पर्ची क्यों बंद हुई, इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। हालांकि, इस सुविधा को फिर बहाल करने के लिए उच्च स्तर पर कार्य हो रहा है। संभावना है कि लुंबिनी की सुविधा पर्ची फिर शुरू हो जाएगी।
पुरुषोत्तम पौडेल, कस्टम निरीक्षक, कारीदह नेपाल
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