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भारी पड़ सकती है कोरोना संक्रमण के प्रति बरती जा रही लापरवाही
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जिला अस्पताल में बिना मास्क लगाए इलाज कराने पंहुचे मरीज।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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भारी पड़ सकती है कोरोना संक्रमण के प्रति बरती जा रही लापरवाही
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण का खतरा अब लोगों के दिमाग से निकल चुका है। न तो ज्यादातर लोग मास्क लगा रहे हैं और न ही सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है। सर्दी-जुकाम के आगे लोग कोरोना संक्रमण के प्रति बेपरवाह हो गए हैं। ऐसे में संक्रमण बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बुधवार को अस्पताल से बाजार तक लोग बिना मास्क के घूमते हुए नजर आए। जिला अस्पताल में चिकित्सक तो मास्क लगाकर काम करते हुए मिले, मगर इलाज के लिए आने वाले अधिकांश मरीज बिना मास्क के थे। कोरोना संक्रमण की पहली लहर और व्यवस्था पटरी पर लौटने से पहले दूसरी लहर की दस्तक ने पूरी व्यवस्था को हिला दिया। संक्रमण की जद में आकर कई लोगों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना की दोनों लहर में जिले में 100 लोगों की संक्रमण से मौत हुई थी। चिकित्सक तीसरी लहर की आशंका अगस्त और सितंबर माह में जता रहे थे। गनीमत की तीसरी लहर आई नहीं। मगर खतरा अभी टला नहीं है।
फिर भी कोरोना नाम का भय लोगों के बीच से निकल चुका है। बाजार हो या फिर अस्पताल, किसी स्थान पर न तो सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है और न ही लोग मास्क लगा रहे हैं। ऐसे में संक्रमण का फैलाव होना परेशानी में डाल सकता है। मौजूदा समय में हर परिवार में लोग सर्दी-जुकाम और बुखार से ग्रसित हो रहे हैं। अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है। जिला अस्पताल में हर दिन औसतन एक हजार मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। अस्पताल की पड़ताल की गई तो चिकित्सक मास्क लगाकर मरीजों को देखते हुए मिले और सैनिटाइजर भी मेज पर मिला। मगर सामाजिक दूरी बेअसर थी। यही हाल बाजार और अन्य स्थानों के हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि हेल्पडेस्क बनी है। साथ ही लोगों को मास्क लगाकर ही चिकित्सक के पास आने के निर्देश हैं। इसे कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
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सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण का खतरा अब लोगों के दिमाग से निकल चुका है। न तो ज्यादातर लोग मास्क लगा रहे हैं और न ही सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है। सर्दी-जुकाम के आगे लोग कोरोना संक्रमण के प्रति बेपरवाह हो गए हैं। ऐसे में संक्रमण बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बुधवार को अस्पताल से बाजार तक लोग बिना मास्क के घूमते हुए नजर आए। जिला अस्पताल में चिकित्सक तो मास्क लगाकर काम करते हुए मिले, मगर इलाज के लिए आने वाले अधिकांश मरीज बिना मास्क के थे। कोरोना संक्रमण की पहली लहर और व्यवस्था पटरी पर लौटने से पहले दूसरी लहर की दस्तक ने पूरी व्यवस्था को हिला दिया। संक्रमण की जद में आकर कई लोगों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना की दोनों लहर में जिले में 100 लोगों की संक्रमण से मौत हुई थी। चिकित्सक तीसरी लहर की आशंका अगस्त और सितंबर माह में जता रहे थे। गनीमत की तीसरी लहर आई नहीं। मगर खतरा अभी टला नहीं है।
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फिर भी कोरोना नाम का भय लोगों के बीच से निकल चुका है। बाजार हो या फिर अस्पताल, किसी स्थान पर न तो सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है और न ही लोग मास्क लगा रहे हैं। ऐसे में संक्रमण का फैलाव होना परेशानी में डाल सकता है। मौजूदा समय में हर परिवार में लोग सर्दी-जुकाम और बुखार से ग्रसित हो रहे हैं। अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है। जिला अस्पताल में हर दिन औसतन एक हजार मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। अस्पताल की पड़ताल की गई तो चिकित्सक मास्क लगाकर मरीजों को देखते हुए मिले और सैनिटाइजर भी मेज पर मिला। मगर सामाजिक दूरी बेअसर थी। यही हाल बाजार और अन्य स्थानों के हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि हेल्पडेस्क बनी है। साथ ही लोगों को मास्क लगाकर ही चिकित्सक के पास आने के निर्देश हैं। इसे कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
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