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Siddharthnagar News: हादसे पर नहीं पसीज रहा दिल, जिदंगी से बड़ी हो गई रील

Sun, 15 Jun 2025 11:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jun 2025 11:33 PM IST
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My heart is not aching due to the accident, the reel has become bigger than life.
- सोशल मीडिया का चस्का, रीयल की बजाय रील लाइफ बनी जिदंगी
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- हादसे के शिकार को अस्पताल पहुंचाने के बजाय वीडियाे को दे रहे प्राथमिकता
- जिले में दिल दहला देने वाले दो हादसों में दिखी संवेदनहीनता
- बोले समाजशास्त्री- नैतिकता का पतन, पश्चिमी सभ्यता भारतीय संस्कृति पर हो रही हावी, बदल रहा व्यवहार
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। सोशल मीडिया के युग में इंसान रीयल लाइफ के बजाय रील लाइफ की तरफ बढ़ रहा है, जिससे न सिर्फ अपनों से दूर हो रहा है, बल्कि उनकी नैतिकता, पीड़ित की मदद की भावना खत्म हो रही है। कारण व्यक्ति के व्यवहार में व्यापक बदलाव हो रहा है। जो न सिर्फ समाज के लिए, बल्कि परिवार के लिए भी घातक है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि शनिवार और रविवार को जिले में दो दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आईं। इसमें न तो संवेदना दिखी और न ही मदद की भावना। दिखा तो रील बनाने का जुनून। एक तरफ व्यक्ति तड़प रहा है, और जान कब चली जाए, इसका कोई पता नहीं है। दूसरी तरफ व्यक्ति दम तोड़ रहा है, लेकिन उनके करीब जाने, उन्हें देखने और शरीर से बूंद-बूंद निकल रहे रक्त को रोकने के लिए कपड़ा बांंधने के बजाय लोगों में वीडियो बनाने की होड़ दिखी।
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अगर कदम बढ़ रहा था तो मदद के लिए नहीं, बल्कि उसकी टूटती सांस और दर्द से कराहती आवाज की। क्योंकि, आज लोगों में क्रेज है सोशल मीडिया पर फालोवर की। जितना गंभीर वीडियो उतनी अच्छी लाइक और कमेंट मिलने की। वहीं, समाजशास्त्री इसे नैतिकता का पतन, पश्चिमी सभ्यता भारतीय संस्कृति पर हो रही हावी होना और व्यवहार में बदलाव कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह नैतिकता का पतन है। आने वाले दिन और बुरा होगा, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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सड़क पर तड़प रहे थे बाइक सवार लोग बनाते रहे वीडियो
इटवा कस्बे की रविवार सुबह दिल हिला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक ही बाइक पर तीन दोस्त आ रहे थे। थाने के सामने ट्राले की चपेट में बाइक आ गई। इस हादसे में एक की मौत हो गई। जबकि, एक गंभीर रूप से घायल होकर तड़प रहा था, एक हाथ उठ नहीं रहा था। खून का कतरा गिर रहा था। वहीं, दूसरा जमीन पर पड़ा था। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से रक्त निकल रहा था। इस हादसे में लोग मदद के लिए आगे आने की बजाय वीडियो बनाने में लगे थे। जबकि, कुछ लोग देखकर अनदेखा करते हुए निकल जा रहे थे। इस संवेदनहीनता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चला, जिसे देखने के बाद आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। लेकिन, वीडियो बनाने वालों का दिल पसीजा न उनकी आत्म मदद के लिए जागी। जब पुलिस पहुंची, तभी उन्हें मदद मिल पाई।
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बिजली गिरने के बाद उठाने के बजाय वीडियो को दी तरजीह
जिले में बिजली गिरने से शनिवार को चार लोगों की जान चली गई। सभी घटनाएं बांसी कोतवाली क्षेत्र में घटित हुईं। क्षेत्र के समोगरा गांव के पश्चिम आकाशीय बिजली गिरने से कल्लू उर्फ रिजवान (33) पुत्र अनवर अली निवासी ग्राम सरेनिया और सतीश यादव उर्फ लल्ला (27) पुत्र रामप्रकाश निवासी बाजारडीह की मौके पर मौत हो गई है। हादसे के वक्त दोनों बाइक से समोगरा गए थे। मौसम बिगड़ने पर घर आ रहे थे। अचानक इनके ऊपर बिजली गिर गई, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा गया जो मानवता को शर्मसार कर देने वाला था। बिजली गिरने के बाद एक युवक बाइक पर पड़ा है, जबकि दूसरा लगभग 10 मीटर दूरी पर औंधे मुंह पड़ा है। उन्हें बचाने के बजाए लोग यह कह रहे हैं कि करीब मत जाओ पहले वीडियो बनाओ। वहीं, कुछ आवाजें आ रही हैं कि यह फला का लड़का है, उनकी दुकान है। पहचान रहे हैं, जान रहे हैं, लेकिन करीब जाने और मदद करने के बजाय लोग वीडियो बनाने में जुटे थे। खुद आगे नहीं बढ़े तो पुलिस और एंबुलेंस को भी बुलाना मुनासिब नहीं समझा। यह घटनाएं और अनदेखी आने वाले समय का घातक संदेश दे रही हैं। ऐसे समाज के जागरूक लोगों का कहना है।

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बोले जानकार
पश्चिमी सभ्यता भारतीय संस्कृति पर हावी हो रही है। लोग भौतिक सुख के पीछे भाग रहे हैं। इसमें दूसरों के बजाय खुद के बारे में सोंच रहे हैं। जब व्यक्ति केवल खुद के बारे में सोचता है तो वह समाज और परिवार से कट जाता है। उनके दुख दर्द को भूल जाता है। अपनत्व की भावना समाप्त हो जाती है। जिसका परिणाम यह होता है कि सामने वाले को कुछ हो जाए, उसके कोई फर्क नहीं पड़ता है। जैसा की आज हो रहा है। एक व्यक्ति तड़प रहा है हम उसकी जान बचाने के बजाय वीडियो बना रहे हैं। उसे अनदेखा कर रहे हैं। यह नैतिकता का पतन है। जिसका परिणाम दिख रहा है। पहले के समय में लोग शाम और सुबह में घर पर आने वालों को भोजन तक दे देते थे। आज मां बाप को अनाथ आश्रम पहुंचा रहे हैं। साेशल मीडिया कहीं न कहीं बड़ा रोल है। इसलिए संस्कार देने की जरूरत है। नहीं तो आने वाले दिन और भयावह होने वाला है।
-डॉ. रघुवर प्रसाद पांडेय, समाजशास्त्री महिला पीजी कॉलेज बस्ती
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