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Siddharthnagar News: जांच के बाद ही मिलरों की मिलेगा टेंडर, कमेटी करेगी सत्यापन

Tue, 18 Aug 2026 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 18 Aug 2026 11:14 PM IST
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Millers will be awarded the tender only after inspection; a committee will conduct the verification.
- मशीन से लेकर बिजली और भंडारण क्षमता तक की होगी पड़ताल
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- पांच सदस्यीय कमेटी करेगी सत्यापन
सिद्धार्थनगर। धान खरीद शुरू होने से पहले प्रशासन ने राइस मिलों की जांच का शिकंजा कस दिया है। अब मिल की मशीन, कुटाई क्षमता, बिजली व्यवस्था, भंडारण और गुणवत्ता मानकों की जांच के बाद ही कुटाई और चावल की डिलीवरी का काम दिया जाएगा। इसके लिए तहसील स्तर पर पांच सदस्यीय कमेटियां गठित की गई हैं।
टीम में विपणन, राजस्व, विद्युत और आईटीआई समेत संबंधित विभागों के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। जांच के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर ही मिल को काम देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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शासन के निर्देश पर जिले की सभी तहसीलों में मिलों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टीम मिल से जुड़े दस्तावेजों के साथ मौके पर उपलब्ध सुविधाओं की भी जांच करेगी। इसमें मिल की वास्तविक क्षमता और कागजों में दर्ज क्षमता का मिलान किया जाएगा। मशीनों की स्थिति, बिजली की उपलब्धता और प्रति घंटे कुटाई की क्षमता भी जांच के दायरे में रहेगी।
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सत्यापन टीम मिल का नाम, संचालक से जुड़े दस्तावेज, मंडी लाइसेंस, एफएसएसएआई प्रमाणपत्र और गूगल लोकेशन की जांच करेगी। मिल की जमीन स्वयं संचालक की है या किसी अन्य की इसकी भी पड़ताल होगी। मिल की चौहद्दी और आने-जाने के रास्ते की स्थिति भी देखी जाएगी।
मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता का मौके पर सत्यापन होगा। पॉलिशर, राइस ग्रेडर, फोर्टिफाइड राइस तैयार करने के लिए ब्लेंडर और उसकी क्षमता समेत अन्य मशीनों की जानकारी दर्ज की जाएगी। बिजली कनेक्शन, स्वीकृत लोड और मशीनों को चलाने के लिए पर्याप्त विद्युत व्यवस्था है या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
इसके अलावा मिल में उपलब्ध भंडारण क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। कवर्ड गोदाम है या नहीं, अलग से भंडारण की व्यवस्था है या नहीं और उसमें कितनी मात्रा में धान या चावल सुरक्षित रखा जा सकता है। इसकी जानकारी रिपोर्ट में दर्ज की जाएगी। प्रति घंटे मिल कितनी मात्रा में धान की कुटाई कर सकती है इसका भी सत्यापन किया जाएगा।

क्षमता के हिसाब से ही मिलेगा काम
धान खरीद के बाद कुटाई, भंडारण और चावल की डिलीवरी की प्रक्रिया में राइस मिलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में प्रशासन इस बार मिलों की वास्तविक क्षमता की जानकारी पहले से जुटा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित मिल निर्धारित काम करने की स्थिति में है या नहीं।

घोटाले के बाद कागजों से आगे बढ़ी जांच
जिले में पूर्व में सामने आए धान खरीद घोटाले के बाद मिलों की क्षमता और गतिविधियों के सत्यापन को अहम माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक के धान खरीद घोटाले की जांच में खरीद, कुटाई और ढुलाई से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल उठे थे। आरोपों में बिना वास्तविक खरीद के कागजों में कुटाई और ढुलाई दिखाने जैसी अनियमितताओं का भी उल्लेख रहा।


इन बिंदुओं की होगी जांच

- संचालक और मिल से जुड़े कागजात।
- मंडी लाइसेंस और एफएसएसएआई प्रमाणपत्र।
- मिल की जमीन, चौहद्दी और पहुंच मार्ग।
- मशीनों की संख्या और वास्तविक क्षमता।
- पॉलिशर और राइस ग्रेडर की उपलब्धता।
- फोर्टिफाइड राइस ब्लेंडर और उसकी क्षमता।
- बिजली कनेक्शन और विद्युत व्यवस्था।
- प्रति घंटे धान कुटाई की क्षमता।
- कवर्ड गोदाम और भंडारण क्षमता।
- चावल की आपूर्ति और डिलीवरी की व्यवस्था।

धान खरीद से पहले राइस मिलों का सत्यापन और कागजी प्रक्रिया की जाती है। इस बार भी शासन के निर्देश के अनुसार प्रत्येक तहसील में पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। इसमें तकनीकी और विद्युत विभाग के लोग भी शामिल हैं। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - रमेश कुमार, जिला विपणन अधिकारी
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