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Siddharthnagar News: विश्वामित्र के यज्ञ में मारीच, सुबाहु ने डाला विघ्न, प्रभु श्रीराम ने किया वध
Tue, 12 Mar 2024 12:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 12 Mar 2024 12:12 PM IST
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इटवा। खुनियांव के ग्राम ऊंचडीह चौराहे आयोजित नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ के चौथे दिन रविवार की रात आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने रविवार की रात मारीच और सुबाहू के वध की लीला का मंचन किया।
प्रभु श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के बड़े होने पर अयोध्या में मुनि विश्वामित्र का आगमन होता है। राजा दशरथ उनका खूब स्वागत सत्कार करते हैं। मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ को बताते हैं कि वन में जब वे यज्ञ करते हैं तो राक्षस उन्हें तहस-नहस कर देते हैं। इसलिए वे यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से श्री राम और लक्ष्मण को साथ भेजने की बात कहते हैं। यह सुन राजा दशरथ उन्हें श्री राम-लक्ष्मण को भेजने से इंकार कर देते हैं। कहते हैं कि वे यज्ञ की रक्षा के लिए पूरी सेना ले जाएं लेकिन श्री राम और लक्ष्मण को नहीं। इस पर गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझाया।
गुुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ श्री राम और लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। मुनि विश्वामित्र आश्रम में शिष्यों के साथ यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ की रक्षा के श्री राम और लक्ष्मण तैनात रहते हैं। इसी दौरान मारीच और सुबाहु नाम के राक्षस यज्ञ को नष्ट करने के लिए पहुंच जाते हैं। श्री राम लक्ष्मण से उनका भीषण युद्ध होता है। अंत में श्री राम लक्ष्मण दोनों राक्षसों का वध कर देते हैं।
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इस अवसर पर आयोजक सर्वदेव त्रिपाठी, प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश त्रिपाठी, प्रिंस मिश्रा, नीरज त्रिपाठी, दिलीप अग्रहरी, संदीप अग्रहरी, हिमांशु त्रिपाठी, आकाश मिश्रा, बृजेंद्र श्याम त्रिपाठी, कन्हैया चौधरी, दिनेश चौधरी मौजूद रहे।
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प्रभु श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के बड़े होने पर अयोध्या में मुनि विश्वामित्र का आगमन होता है। राजा दशरथ उनका खूब स्वागत सत्कार करते हैं। मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ को बताते हैं कि वन में जब वे यज्ञ करते हैं तो राक्षस उन्हें तहस-नहस कर देते हैं। इसलिए वे यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से श्री राम और लक्ष्मण को साथ भेजने की बात कहते हैं। यह सुन राजा दशरथ उन्हें श्री राम-लक्ष्मण को भेजने से इंकार कर देते हैं। कहते हैं कि वे यज्ञ की रक्षा के लिए पूरी सेना ले जाएं लेकिन श्री राम और लक्ष्मण को नहीं। इस पर गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझाया।
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गुुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ श्री राम और लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। मुनि विश्वामित्र आश्रम में शिष्यों के साथ यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ की रक्षा के श्री राम और लक्ष्मण तैनात रहते हैं। इसी दौरान मारीच और सुबाहु नाम के राक्षस यज्ञ को नष्ट करने के लिए पहुंच जाते हैं। श्री राम लक्ष्मण से उनका भीषण युद्ध होता है। अंत में श्री राम लक्ष्मण दोनों राक्षसों का वध कर देते हैं।
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इस अवसर पर आयोजक सर्वदेव त्रिपाठी, प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश त्रिपाठी, प्रिंस मिश्रा, नीरज त्रिपाठी, दिलीप अग्रहरी, संदीप अग्रहरी, हिमांशु त्रिपाठी, आकाश मिश्रा, बृजेंद्र श्याम त्रिपाठी, कन्हैया चौधरी, दिनेश चौधरी मौजूद रहे।