{"_id":"6887c25c63e6c8c1cd037753","slug":"majlis-e-hussain-teaches-truth-goodness-and-virtue-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1034-141883-2025-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: मजलिसे हुसैन सच्चाई, नेकी, भलाई की देती है सीखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: मजलिसे हुसैन सच्चाई, नेकी, भलाई की देती है सीखा
विज्ञापन
डुमरियागंज क्षेंत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबारगाह वफफ शाह आलमगीर सानी में अशरे की पहली मजलिस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। हल्लौर स्थित इमामबारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम के तत्वाधान में सालाना अशरे की मजलिस हुई।
मौलाना सैय्यद जहीर अब्बास ने कहा कि जिस तरह कुरआन का मुतावला (अध्ययन) करने से नई-नई जानकारी और दीनी और दुनियावी शिक्षा, ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। उसी तरह से हजरत अली की जीवनी और उनकी फजीलत (शख्सियत ) को बयान करने वाली पवित्र किताब नहजुल बलागा का अध्ययन करने वाले इंसान के नॉलेज- ज्ञान में वृद्धि होती है।
लिहाजा कुरआन और नहजुल बलागा को समझ कर रोज पढ़ना चाहिए। मौलाना ने कहा कि मजलिसे हुसैन इंसान की जिंदगी और किरदार को संवारने का काम करती है। मजलिस में इंसानियत, नेकी और भलाई के रास्तों पर चलने का पैगाम दिया जाता है। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का मंजर बयान किया, जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद हाय हुसैन की सदा बुलंद कर रो पडे़।
मजलिस से पहले मर्सियाखवानी हैदरे कर्रार और उनके सहयोगी ने की। इस दौरान मौलाना कुमेल, निहाल, इकबाल मेहदी, इं. मोहम्मद मेंहदी, तसकीन हैदर, तसबीब हसन, कसीम रिजवी, अफसर हल्लौरी, काजिम कर्बलाई, बेताब मौजूद रहे।र
विज्ञापन
विज्ञापन
डुमरियागंज। हल्लौर स्थित इमामबारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम के तत्वाधान में सालाना अशरे की मजलिस हुई।
मौलाना सैय्यद जहीर अब्बास ने कहा कि जिस तरह कुरआन का मुतावला (अध्ययन) करने से नई-नई जानकारी और दीनी और दुनियावी शिक्षा, ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। उसी तरह से हजरत अली की जीवनी और उनकी फजीलत (शख्सियत ) को बयान करने वाली पवित्र किताब नहजुल बलागा का अध्ययन करने वाले इंसान के नॉलेज- ज्ञान में वृद्धि होती है।
लिहाजा कुरआन और नहजुल बलागा को समझ कर रोज पढ़ना चाहिए। मौलाना ने कहा कि मजलिसे हुसैन इंसान की जिंदगी और किरदार को संवारने का काम करती है। मजलिस में इंसानियत, नेकी और भलाई के रास्तों पर चलने का पैगाम दिया जाता है। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का मंजर बयान किया, जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद हाय हुसैन की सदा बुलंद कर रो पडे़।
विज्ञापन
मजलिस से पहले मर्सियाखवानी हैदरे कर्रार और उनके सहयोगी ने की। इस दौरान मौलाना कुमेल, निहाल, इकबाल मेहदी, इं. मोहम्मद मेंहदी, तसकीन हैदर, तसबीब हसन, कसीम रिजवी, अफसर हल्लौरी, काजिम कर्बलाई, बेताब मौजूद रहे।र
विज्ञापन