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महिलाओं के हाथ में होगी सामुदायिक शौचालय की देखरेख
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महिलाएं करेंगी सामुदायिक शौचालय की देखरेख
सामुदायिक शौचालय के संचालन में प्राथमिकता के निर्देश
हर ग्राम पंचायत में बन रहे एक-एक सामुदायिक शौचालय
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। जनपद की ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है। इनका रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी। अब तक जिले में 1139 के सापेक्ष 222 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो चुका हैं, इनमें 11 की कमान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी जा चुकी है। शेष पर महिलाओं से आवेदन मांगा गया है।
जनपद में 1139 ग्राम पंचायत हैं। इनमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय का निर्माण चल रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक सामुदायिक शौचालय बनाए जाएंगे। अब तक 222 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। उपायुक्त स्वत: रोजगार शेषमणि सिंह ने बताया कि संचालन पर पड़ने वाला खर्च महिला समूहों को दो किस्तों में उपलब्ध कराया जाएगा। महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन कर शौचालय के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी जाएगी। इस बाबत सीडीओ पुलकित गर्ग ने कहा कि शौचालयों की देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करेंगी। सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक शौचालय बनवाने वाले ग्राम सचिव को सम्मानित किया जाएगा।
सबसे अच्छा शौचालय बनाने पर सम्मान
एक अच्छी खबर यह भी है कि शासन ने आदेश जारी किया है कि सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक शौचालय का निर्माण करवाने वाले पंचायत सचिव को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित पंचायत के सचिव को जिला स्तर पर जानकारी दी जाएगी। उसके बाद इसकी सूचना मंडल स्तरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी। उसके बाद सचिव का चयन कर उसे सम्मानित किया जाएगा।
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अलग-अलग तय हुईं भूमिकाएं
स्वयं सहायता समूह की भूमिका संचालन एवं रखरखाव और सुविधाओं का देखभाल, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर नियम का प्रयोग करने, सफाई सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराना, शिकायत रजिस्टर को बनाने, सफाई कर्मियों की भूमिका दिन-प्रतिदिन की सफाई गतिविधियों को संचालित तथा साफ रखने, स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सफाई के दौरान ग्लव्स और मास्क का प्रयोग करने, सामुदायिक शौचालय में चोरी को रोकने एवं परिसर में व्यवस्थित रखने, सफाई शेड्यूल में दिन में दो बार तय किया गया है।
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सामुदायिक शौचालय के संचालन में प्राथमिकता के निर्देश
हर ग्राम पंचायत में बन रहे एक-एक सामुदायिक शौचालय
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। जनपद की ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है। इनका रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी। अब तक जिले में 1139 के सापेक्ष 222 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो चुका हैं, इनमें 11 की कमान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी जा चुकी है। शेष पर महिलाओं से आवेदन मांगा गया है।
जनपद में 1139 ग्राम पंचायत हैं। इनमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय का निर्माण चल रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक सामुदायिक शौचालय बनाए जाएंगे। अब तक 222 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। उपायुक्त स्वत: रोजगार शेषमणि सिंह ने बताया कि संचालन पर पड़ने वाला खर्च महिला समूहों को दो किस्तों में उपलब्ध कराया जाएगा। महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन कर शौचालय के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी जाएगी। इस बाबत सीडीओ पुलकित गर्ग ने कहा कि शौचालयों की देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करेंगी। सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक शौचालय बनवाने वाले ग्राम सचिव को सम्मानित किया जाएगा।
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सबसे अच्छा शौचालय बनाने पर सम्मान
एक अच्छी खबर यह भी है कि शासन ने आदेश जारी किया है कि सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक शौचालय का निर्माण करवाने वाले पंचायत सचिव को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित पंचायत के सचिव को जिला स्तर पर जानकारी दी जाएगी। उसके बाद इसकी सूचना मंडल स्तरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी। उसके बाद सचिव का चयन कर उसे सम्मानित किया जाएगा।
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अलग-अलग तय हुईं भूमिकाएं
स्वयं सहायता समूह की भूमिका संचालन एवं रखरखाव और सुविधाओं का देखभाल, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर नियम का प्रयोग करने, सफाई सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराना, शिकायत रजिस्टर को बनाने, सफाई कर्मियों की भूमिका दिन-प्रतिदिन की सफाई गतिविधियों को संचालित तथा साफ रखने, स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सफाई के दौरान ग्लव्स और मास्क का प्रयोग करने, सामुदायिक शौचालय में चोरी को रोकने एवं परिसर में व्यवस्थित रखने, सफाई शेड्यूल में दिन में दो बार तय किया गया है।