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पुण्य तिथि पर याद किए गए मधु लिमये
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पुण्यतिथि पर याद किए गए मधु लिमये
समाजवादी अध्ययन केंद्र में आयोजित हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में भी लोहिया की समाजवादी धारा के प्रखर विचारक पूर्व सांसद मधु लिमये की पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर उनके विचारों को समाजवादियों के बीच में साझा किया गया। जिला मुख्यालय स्थित समाजवादी अध्ययन केंद्र में मनाई गई। बृजभूषण तिवारी सभागार में मधु लिमये के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित किया गया। इसके उपरांत उनके जीवन यात्रा को याद किया गया। यश भारती विभूषित और केंद्र के संस्थापक मणेंद्र मिश्रा मशाल ने कहा कि मौजूदा राजनीति में विचारधारा का प्रभाव कमतर किए जाने की साजिश हो रही है, जिस कारण सरकारों की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। वंचित तबके के स्वर और अधिकार को सम्मान समाजवादी विचार परंपरा में ही संभव है। मधु लिमये इन्हीं विमर्शों को सत्ता प्रतिष्ठानों के केंद्र में बनाए रखते थे। आपातकाल के दौरान मीसा बंदी के रूप में उन्होंने संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में पुरजोर आवाज उठाई। उनके द्वारा लिखी गयी 60 से अधिक पुस्तकें और असरकारी संसदीय बहसों से भारतीय लोकतंत्र समृद्ध हुआ है। इस दौरान प्रमुख रूप से अमित यादव, धीरज, सुरेंद्र यादव, राजेश गुप्ता और राजेंद्र साहनी उपस्थित थे।
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समाजवादी अध्ययन केंद्र में आयोजित हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में भी लोहिया की समाजवादी धारा के प्रखर विचारक पूर्व सांसद मधु लिमये की पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर उनके विचारों को समाजवादियों के बीच में साझा किया गया। जिला मुख्यालय स्थित समाजवादी अध्ययन केंद्र में मनाई गई। बृजभूषण तिवारी सभागार में मधु लिमये के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित किया गया। इसके उपरांत उनके जीवन यात्रा को याद किया गया। यश भारती विभूषित और केंद्र के संस्थापक मणेंद्र मिश्रा मशाल ने कहा कि मौजूदा राजनीति में विचारधारा का प्रभाव कमतर किए जाने की साजिश हो रही है, जिस कारण सरकारों की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। वंचित तबके के स्वर और अधिकार को सम्मान समाजवादी विचार परंपरा में ही संभव है। मधु लिमये इन्हीं विमर्शों को सत्ता प्रतिष्ठानों के केंद्र में बनाए रखते थे। आपातकाल के दौरान मीसा बंदी के रूप में उन्होंने संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में पुरजोर आवाज उठाई। उनके द्वारा लिखी गयी 60 से अधिक पुस्तकें और असरकारी संसदीय बहसों से भारतीय लोकतंत्र समृद्ध हुआ है। इस दौरान प्रमुख रूप से अमित यादव, धीरज, सुरेंद्र यादव, राजेश गुप्ता और राजेंद्र साहनी उपस्थित थे।