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Siddharthnagar News: श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मिलती है मुक्ति
Mon, 09 Feb 2026 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:15 AM IST
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भवानीगंज। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है। यह बातें क्षेत्र के अंदुआ शनिचरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन शनिवार को कथा वाचक कनकेश्वरी देवी ने कही। वह श्रीमद्भागवत कथा के महात्म पर चर्चा कर रहीं थीं। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि गौकर्थ और धुंधकारी दोनों सगे भाई थे। गौकर्थ धार्मिक प्रवृति के जबकि धुंधकारी कुकर्मी प्रवृति का था।
माता पिता की मृत्यु के पश्चात गौकर्थ घर की जिम्मेदारी धुंधकारी को देकर तीर्थ यात्रा पर निकल गया। इधर धुंधकारी अपने प्रवृति के अनुसार वेश्याओं के चक्कर में पड़ गया और सारी संपत्तियां गवां बैठा। अंत में वेश्याओं ने मिलकर धुंधकारी को उसके ही घर में हत्या कर आंगन में दफना दिया। इधर तीर्थ यात्रा से लौटे गौकर्थ ने भाई धुंधकारी को खोजा पर उसका पता नहीं चला। शाम को भोजन कर के जब गौकर्थ सो गया तो रात में स्वप्न में आकर धुंधकारी ने पूरी कहानी बताई और प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया। गौकर्थ ने विद्धान पुरोहित के कहने पर की सात गांठ के हरे बांस को व्यास पीठ के सामने खड़ा कर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण धुंधकारी को कराया। कथा के सातवें दिन पूर्णाहुति के बाद धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। इस दौरान पप्पू पांडेय, गुरुदेव बाबा, जवाहिर काका, सुरेश यादव, जंग बहादुर आदि मौजूद रहे।
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माता पिता की मृत्यु के पश्चात गौकर्थ घर की जिम्मेदारी धुंधकारी को देकर तीर्थ यात्रा पर निकल गया। इधर धुंधकारी अपने प्रवृति के अनुसार वेश्याओं के चक्कर में पड़ गया और सारी संपत्तियां गवां बैठा। अंत में वेश्याओं ने मिलकर धुंधकारी को उसके ही घर में हत्या कर आंगन में दफना दिया। इधर तीर्थ यात्रा से लौटे गौकर्थ ने भाई धुंधकारी को खोजा पर उसका पता नहीं चला। शाम को भोजन कर के जब गौकर्थ सो गया तो रात में स्वप्न में आकर धुंधकारी ने पूरी कहानी बताई और प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया। गौकर्थ ने विद्धान पुरोहित के कहने पर की सात गांठ के हरे बांस को व्यास पीठ के सामने खड़ा कर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण धुंधकारी को कराया। कथा के सातवें दिन पूर्णाहुति के बाद धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। इस दौरान पप्पू पांडेय, गुरुदेव बाबा, जवाहिर काका, सुरेश यादव, जंग बहादुर आदि मौजूद रहे।
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