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बाढ़ से बचने को घर छोड़ा, लौटे तो गिरा मिला

Fri, 17 Sep 2021 10:47 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 10:47 PM IST
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Left the house to escape the flood, when he returned, he was found fallen
भनवापुर क्षेत्र के पेंड़री मुस्तहकम गांव सुन्नवासी का गिरा मकान। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
बाढ़ से बचने को घर छोड़ा, लौटे तो गिरा मिला
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भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। राप्ती नदी की बाढ़ की तबाही के दौरान पत्नी व मासूमों के साथ पलायन करने वाले घर वापस हुए तो उनका आशियाना धराशायी हो गया था। अब कोई गांव के पड़ोसी के यहां रात गुजारने को मजबूर है तो किसी ने पत्नी और बच्चों को रिश्तेदारी में भेजकर फिर से आशियाना बनाने में लगे हैं। यह दर्द है डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पेंड़ारी मुस्ताहकम गांव निवासी सुन्नवासी व एवं सुग्रीव का।
केस एक
रिश्तेदारी में छोड़ा परिवार
बात करते पेंड़ारी मुस्ताहकम के सुन्नवासी की आंखे डबडबा गईं। उन्होंने बताया कि परिवार में पत्नी राजमती के अलावा पांच बच्चे हैं। बाढ़ में वे पत्नी तथा बच्चों को ससुराल वैरवा थाना इटवा ले गए थे। बाढ़ का पानी हटने के बाद सोमवार को अकेले घर आए तो घर देखकर आंखों में आंसू आ गए। क्योंकि आशियाना बाढ़ की भेंट चढ़ चुका था। अब पड़ोसी प्रकाश के घर में रहकर दिन काट रहे हैं। बाढ़ राहत के नाम पर मिला राशन किट भी नाकाफी है।
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मजह 32 सौ रुपये मिली सहायता
पेंड़ारी मुस्ताहकम गांव के सुग्रीव का हाल भी खराब है। बाढ़ के दौरान गिरी दीवार के ऊपर लटका छत बड़े हादसे को दावत दे रहा है। परिवार के पांच लोग किसी तरह रात गुजार रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक बीघा जमीन है, वह भी नदी में विलीन होने के कगार पर है। बाढ़ के दौरान मकान भी जमीदोज हो चुका है। बाढ़ के दौरान आर्थिक सहायता के नाम पर 32 सौ रुपये मिला था, जो बच्चों के इलाज में खर्च हो गया। तब से कोई देखने नहीं आया और न ही सहायता मिली। पत्नी-बच्चे कब तक दूसरे के घर में रहेंगे।
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पहले आग से जली थी फसल, अब डूब गई
परसा (सिद्धार्थनगर)। बूढ़ी राप्ती और घोरही नदी के बीच में बसे खैरी शीतल प्रसाद के ग्रामीण जहां हर साल बाढ़ की मार झेलने को मजबूर हैं, वहीं इस साल उन पर दोहरी मार पड़ी है। अप्रैल 2021 में आग लगने से 400 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई थी, वहीं अब बाढ़ से धान की फसल जलमग्न होने के कारण गल रही है। ग्रामीण के समक्ष धान के पैदावार को लेकर संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के कारण सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी नुकसान हुआ है।

खैरी शीतल प्रसाद के पन्नापुर, नकोलेडीह, शिवदुलारेडीह, चिरहगना, खैरी, करौता, मुरव्वनडीह और टीकर टोले की अधिकांश फसल जलमग्न होने से गल रही है। यहां के किसानों की धान की फसल भी खत्म होने की स्थिति बनी हुई है। एक सप्ताह ग्राम सभा के अधिकांश टोले पानी से घिरे थे। दस दिन उनकी फसलें डूबी थी। खैरी शीतल प्रसाद के करौंथा टोले के रहने वाले रघु साहनी ने बताया कि पिछले 10 अप्रैल को आग से उनकी तीन बीघे गेहूं का फसल जल गई थी। उसके बाद उनके पास परिवार के भरण-पोषण का भरोसा केवल दो बीघे धान की फसल और एक बीघे सब्जी की खेती पर था, लेकिन बूढ़ी राप्ती नदी के जलस्तर में दो बार हुई बढ़ोत्तरी से आई बाढ़ ने उनके भरोसे को तोड़ दिया। अब बच्चों की पढ़ाई, शादी और अन्य जरूरी कार्य के लिए धन की व्यवस्था करना मुश्किल दिखाई दे रहा है। रघु साहनी ने प्रशासन से शीघ नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
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