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Siddharthnagar News: विवादित जमीन में कूद जाते भू-माफिया...रजिस्ट्री के दौरान चौहद्दी बदलकर लाखों का करते हैं खेल

Wed, 04 Oct 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 04 Oct 2023 01:02 AM IST
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Land mafia jumps into disputed land...change boundaries during registration and make a game of lakhs

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-जिले में जमीनी विवाद में कई बार हो चुकी है हत्याएं



संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर से गांव तक के भू माफिया रजिस्ट्री के दौरान चौहद्दी बदलकर लाखों का खेल करते हैं। विवादित जमीन के मामले में वे कूद जाते हैं और रजिस्ट्री कराने के दौरान चौहद्दी में अपनी जमीन सड़क या बाजार के किनारे दिखाते हैं। इस कारण दूसरे पक्ष का बड़ा नुकसान होता है और खून खराबा हुआ तो जान चली जाती है।
भू माफियाओं की जाल में जो एक बार उलझ जाता है, उसे विवाद की जटिलताओं से बाहर आना मुश्किल हो जाता है। रजिस्ट्री के दौरान जमीन के चानों तरफ दर्शाया जाता है कि कहां सड़क है, कहां मकान है और कहां भूमि है। इसमें बैनामा करने वाला पक्ष यह करता है कि संयुक्त खाते में चौहद्दी में रास्ता, मुख्य सड़क या फिर आबादी दर्शा देता है। इससे जमीन आगे हो जाती है। यह जानकारी जब उस खाते के दूसरे हिस्सेदार को होती है।
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अगर दूसरा पक्ष एक माह के भीतर जानकारी हुई तो आपत्ति लगा देता है, जिससे खरीदार के नाम से जमीन खतौनी में नहीं चढ़ पाती है और एसडीएम कोर्ट में मामला चलता है। अगर खारिज दाखिल हो गया तो निरस्त करते हुए दोबारा सही हिस्सा बंटवाने के लिए अलग से वाद दाखिल करना होता है।
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विधि के जानकारों के मुताबिक जमीन के बैनामा में चौहद्दी का खेल अकसर भू- माफिया ही करते हैं। उनकी अगुवाई में होने वाले किसी भी बैनामा में संयुक्त खाते में चौहद्दी में जरूर खेल होता है। वह इसलिए ऐसा करते हैं कि उनकी जमीन आगे हो जाती है। जिसकी उन्हें मुहंगामी कीमत मिलती है। उस भूमि पर कब्जे के लिए शाम, दाम दंड भेद सब का प्रयोग वह करते हैं।


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हर माह औसतन 500 बैनामे पर लग जाता है आपत्ति



आकड़ों के मुताबिक हर माह जिले के पांच तहसीलों में औसतन 2500 बैनामा होता है। राजस्व विभाग से जुड़े जानकारों के मुताबिक 15-20 प्रतिशत बैनामा में आपत्ति दर्ज कराया जाता है। इस आपत्ति में चौहद्दी गलत दिखाकर बैनामा कराने, दूसरे का हिस्सा बेच देने। आगे पीछे करके जमीन बेचने और स्टांप की चोरी करने की शिकायत होती है। जिसका तहसील स्तर पर मस्टिे्रट के यहां मामला चलता है और उनके द्वारा कागजात का अवलोकन करने के बाद मामले का निस्तारण किया जाता है। इसी बीच कई मामलों में विवाद भी हो जाता है।


जमीन की भूख में जिदंगी जा रही है, मुकदमें में परिवार



तबाह हो रहे हैं। जमीन के लिए देवरिया जनपद में हुए हत्याकांड ने जिले में पूर्व में हुई घटनाओं को ताजा कर दिया है। यहां भी विवाद में लोग अपनों का खून बहा चुके हैं। अब लोग उन घटनाओं की चर्चा कर रहे हैं। देवरिया जैसी घटना होने से यहां भी इनकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि थाना और तहसीलों में भूमि विवाद के मामले बड़ी संख्या मेंं पहुंच रहे हैं। कहीं जबरिया कब्जा तो कहीं गलत चौहद्दी दिखाकर जमीन बेच लेने की बात सामने आ रही है। मुकदमें में कोर्ट और थानों की चक्कर केे बीच उपजने वाले विवाद में लोग खून बहा देने और जान लेने से नहीं चुकते हैं। जैसा की देवरिया जनपद में हुए हत्याकांड में सामने आ रहा है। यहां हर माह पांच सौ जमीन के बैनामे पर आपत्ति दर्ज हो रही है। जो कहीं न कहीं बड़े विवाद को जन्म दे रहे हैं। इसमें थाना और तहसील प्रशासन की लापरवाही से इस प्रकार की घटनाएं होती हैं। ऐसा विधि के जानकार और अन्य लोगों का कहना है। उनका कहना है कि अगर थाना और तहसील प्रशासन पहले से अलर्ट हो जाए और मामलों को लटकाने के बजाए उसकी जांच करके सुलझाए तो घटनाएं ही नहीं होंगी।
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एक मंडी भूमि के लिए पीटकर कर दी थी युवक की हत्या



एक साल पहले उसका थाना क्षेत्र के छितरापार गांव निवासी धीरज की दूसरेपक्ष के लोगों ने ईंट पत्थर से हमला करके हत्या कर दिया था। आक्रोशित भीड़ गांव से १२ किलोमीटर चलकर मुख्यालय पर पहुंची गई। एसपी और डीएम आवास के सामने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया था। इस हत्याकांड में १२ लोगों पर केस दर्ज किया गया था। वहीं, पुलिस के सामने हुई हत्या के मामले मे
तत्कालीन कोतवाल की भूमिका संदिग्ध पाई थी। इस पर उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया था।


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जमीन के विवाद मेें वृद्ध की हत्या के बाद जल उठा था गांव



20 अगस्त 2020 को त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के हथपरा गांव जमीन के विवाद में दो समुदाय में खूनी संघर्ष हो गया था। इस घटना में धुवराज की मौत हो गई थी। जबकि परिवार के अन्य सदस्य जख्मी हो गए थे। मामला दो समुदाय का होने के कारण तनाव बढ़ा और आरोपियों के घर पर धाबा बोलने के लिए भीड़ आगे बढ़ी। पुलिस ने भीड़ को किसी तरह से नियंत्रित किया था, लेकिन भीड़ नेभुसैल और मड़ई को आगे के हवाले का कर दिया था। जमीन को लेकर विवाद लंबे से चल रहा था। लेकिन तहसील प्रशासन इसमें टालमोटल कर रहा था। जांच में तहसीलदार की भमिका संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद एसडीएम ने तत्कालीन तहसीलदार राजेश प्रताप सिंह को हटाकर जिला मुख्यालय संबद्ध कर दिया था। जबकि कानून गो अब्दुल अजीज और लेखपाल अशोक तिवारी को दूसरे तहसील में भेज दिया था।


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जमीन के लिए अपनों ने ही मार डाला



खेसरहा थाना क्षेत्र के दनियापार गांव में सात मई 2023 को पंचायत के फैसले से नाखुस भाई ने अपने बड़े भाई ब्रह्मनंद यादव (55) की अपने दो बेटों और एक पट्टीदार के साथ मिलकर लोहे के सरिया से पीटकर हत्या कर दी थी। घर की जमीन आगे पीछे होने की बात पर यह विवाद हुआ था। भाई की मौत हो गई और हत्या के मामले में बेटे के साथ मुख्य आरोपी और सहयोगी जेल चले गए। जमीन वहीं की वहीं रह गई। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।


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इटवा कस्बे में कीमती भूमि पर कब्जे से लेकर चल रहा है संघर्ष



इटवा कस्बे में जमीन के एक टुकड़े पर कब्जा करने को लेकर अबतक कई बार दो पक्ष आमने- सामने आ चुके हैं। मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कई बार तहसील और थाना में मामला पहुंच भी चुका है। ऐसे में यहां भी बड़ी घटना के होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।


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बोले अधिवक्ता



जमीन के विवाद के बड़ा रूप लेने में कहीं न कहीं थाना और तहसील प्रशासन दोषी है। मामले को लेकर पीडि़त व्यक्ति चक्कर लगाता रहता है, लेकिन उसकी सुनता कोई नहीं है। मामले को टाला जाता है। इसके बाद कब्जा को लेकर एक दिन विवाद होता है। जिसमें किसी न किसी की जान चली जाती है। इसमें थाना और तहसील प्रशासन सुधार जाए तो विवाद होगा ही नहीं।

कृपाशंकर त्रिपाठी, अधिवक्ता जनपद न्यायालय



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जमीन के विवाद होने के पीछे थाना और तहसील प्रशासन बड़ा दोषी है। क्योंकि चक्कर लगाते लगाते अगर जमीन की नपाई भी करते हैं तो कभी इधर बढ़ा देते हैं तो कभी उधर इसलिए विवाद खत्म होने के बजाए बढ़ जाता है और बवाल व हत्या जैसी घटनाएं होती हैं। अगर यह जगहों पर जनता की सुनी जाए तो देवरिया जनपद जैसी घटनाएं होंगी ही नहीं।
संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता जनपद न्यायालय
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