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Siddharthnagar News: प्रशिक्षक की कमी से जूझ रहा स्टेडियम
Fri, 03 May 2024 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 03 May 2024 01:02 AM IST
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जिले में अंशकालीन प्रशिक्षकों की तैनाती की हो रही मांग
1995 में बना स्टेडियम में कभी भी नहीं हुई कोच की कमी पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियम प्रबंधन भले ही कवायद कर रहा है। मगर प्रशिक्षकों की कमी ने खिलाड़ियों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। खेल गतिविधियां सिर्फ क्रीड़ाधिकारी के भरोसे संचालित हो रही हैं। जिले के खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षकों की मौजूदगी में बेहतर अभ्यास होता है, इसकी कमी खलती है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैराकी के अलावा किसी भी खेल के प्रशिक्षक मौजूद नहीं है। जबकि जिले में क्रिकेट, वालीबॉल व एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को सीनियर खिलाड़ी प्रशिक्षण देते है। स्टेडियम में हाकी, बैडमिंटन, फुटबॉल, बास्केटबॉल, ताइक्वांडो, कुश्ती, कबड्डी व खो-खो के खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए आते है। लेकिन इन सभी खिलाड़ियों को अभी तक कोच नहीं मिल पाए है। फुटबाल की अंशकालीन कोच का नियुक्ति पिछले सत्र हुई थी। जिनका जनवरी माह में कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक किसी भी कोच की नियुक्ति नहीं की गई है। कोच की कमी से जिले के खिलाड़ियों को नई पहचान नहीं मिल पा रही है, यही कारण है कि जिले के खिलाड़ियों का खेल के प्रति मोह भंग हो रहा है। प्रशिक्षक मिलते ही जिले के खिलाड़ी नई पहचान बना लेते है। लेकिन खेल विभाग के तरफ से इसके प्रति कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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खिलाड़ी को नई दिशा देने में एक प्रशिक्षक का विशेष योगदान होता है। लेकिन जिला स्पोर्ट स्टेडियम में शुरु से ही प्रशिक्षको की कमी रही। इससे खिलाड़ियों को नई दिशा नहीं मिल पा रही है।
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विजय कुमार, खिलाड़ी
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अंशकालिक प्रशिक्षक की तैनाती देर से होती है, जिससे नियमित अभ्यास करने में रुकावट पैदा होती है। समय रहते ही प्रशिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। इससे खिलाड़ी को प्रशिक्षण मिलने में आसानी होगी।
-अभिषेक कुमार, खिलाड़ी
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कोच के इंतजार में बास्केटबाल, वॉलीबाल, बैडमिंटन के टूट गए कोर्ट
स्टेडियम में बास्केटबॉल, वालीबाल व बैडमिंटन के कोर्ट बनाए गए है। लेकिन इन सभी खेलों को लिए अभी तक निदेशालय ने कोच नहीं भेजा है। इससे बने कोर्ट टूट गए है। वही बैडमिंटन का कोर्ट ईंट के सहारे टिकाया गया है। नीचे लगी लकड़ियां उखड़ गईं हैं। जंगले के लगे शीशे भी टूट गए है। बॉस्केट बॉल के कोर्ट का पोल सड़ गया है। लगी जालियां टूट गया है। खिलाड़ी आते है और देख कर मायूस होकर लौट जाते है।
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निदेशालय से पत्राचार किया गया है। नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। अंशकालिक प्रशिक्षक मिलने की पूरी संभावना है। जल्द ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षक मिल जाएंगे।
आशुतोष अग्निहोत्री, क्रीड़ा अधिकारी
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जिले में अंशकालीन प्रशिक्षकों की तैनाती की हो रही मांग
1995 में बना स्टेडियम में कभी भी नहीं हुई कोच की कमी पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियम प्रबंधन भले ही कवायद कर रहा है। मगर प्रशिक्षकों की कमी ने खिलाड़ियों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। खेल गतिविधियां सिर्फ क्रीड़ाधिकारी के भरोसे संचालित हो रही हैं। जिले के खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षकों की मौजूदगी में बेहतर अभ्यास होता है, इसकी कमी खलती है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैराकी के अलावा किसी भी खेल के प्रशिक्षक मौजूद नहीं है। जबकि जिले में क्रिकेट, वालीबॉल व एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को सीनियर खिलाड़ी प्रशिक्षण देते है। स्टेडियम में हाकी, बैडमिंटन, फुटबॉल, बास्केटबॉल, ताइक्वांडो, कुश्ती, कबड्डी व खो-खो के खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए आते है। लेकिन इन सभी खिलाड़ियों को अभी तक कोच नहीं मिल पाए है। फुटबाल की अंशकालीन कोच का नियुक्ति पिछले सत्र हुई थी। जिनका जनवरी माह में कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक किसी भी कोच की नियुक्ति नहीं की गई है। कोच की कमी से जिले के खिलाड़ियों को नई पहचान नहीं मिल पा रही है, यही कारण है कि जिले के खिलाड़ियों का खेल के प्रति मोह भंग हो रहा है। प्रशिक्षक मिलते ही जिले के खिलाड़ी नई पहचान बना लेते है। लेकिन खेल विभाग के तरफ से इसके प्रति कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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खिलाड़ी को नई दिशा देने में एक प्रशिक्षक का विशेष योगदान होता है। लेकिन जिला स्पोर्ट स्टेडियम में शुरु से ही प्रशिक्षको की कमी रही। इससे खिलाड़ियों को नई दिशा नहीं मिल पा रही है।
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विजय कुमार, खिलाड़ी
अंशकालिक प्रशिक्षक की तैनाती देर से होती है, जिससे नियमित अभ्यास करने में रुकावट पैदा होती है। समय रहते ही प्रशिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। इससे खिलाड़ी को प्रशिक्षण मिलने में आसानी होगी।
-अभिषेक कुमार, खिलाड़ी
कोच के इंतजार में बास्केटबाल, वॉलीबाल, बैडमिंटन के टूट गए कोर्ट
स्टेडियम में बास्केटबॉल, वालीबाल व बैडमिंटन के कोर्ट बनाए गए है। लेकिन इन सभी खेलों को लिए अभी तक निदेशालय ने कोच नहीं भेजा है। इससे बने कोर्ट टूट गए है। वही बैडमिंटन का कोर्ट ईंट के सहारे टिकाया गया है। नीचे लगी लकड़ियां उखड़ गईं हैं। जंगले के लगे शीशे भी टूट गए है। बॉस्केट बॉल के कोर्ट का पोल सड़ गया है। लगी जालियां टूट गया है। खिलाड़ी आते है और देख कर मायूस होकर लौट जाते है।
निदेशालय से पत्राचार किया गया है। नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। अंशकालिक प्रशिक्षक मिलने की पूरी संभावना है। जल्द ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षक मिल जाएंगे।
आशुतोष अग्निहोत्री, क्रीड़ा अधिकारी