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गुर्दा रोगियों की संख्या बढ़ी, डायलिसिस के लिए लगाना पड़ रहा नंबर
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गुर्दा रोगियों की संख्या बढ़ी, डायलिसिस के लिए लगाना पड़ रहा नंबर
जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में अब तक 178 मरीजों का हो चुका है पंजीकरण
चिकित्सकों के अनुसार गुणवत्ताविहीन शराब के सेवन से खराब हो रहे गुर्दे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खानपान में खराब वस्तुओं और शराब का सेवन आम जीवन पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। हाल यह है कि जिले में गुर्दा खराब होने वाले रोगियों के तादाद बढ़ रही है। जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में 178 ऐसे मरीज मिले हैं, जिनका गुर्दा खराब हो चुका है। दवा और नियमित डायलिसिस के सहारे चल रहे हैं। चिकित्सक इसका प्रमुख कारण खानपान ही बता रहे हैं। रोगियों का बढ़ना चिंता का विषय है। गुर्दा शरीर का अहम अंग माना जाता है। खून के संचार का यह एक अहम माध्यम है। खराब वस्तुओं और बिना चिकित्सक की सलाह के हाई पॉवर की दवाओं का सेवन करने से गुर्दा पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसा चिकित्सकों का कहना है। जिले में इन दिनों गुर्दा खराब होने वाले रोगियों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषित पानी और खराब क्वालिटी की शराब का सेवन करना मुख्य कारण है। उसके नियमित सेवन से गुर्दे पर बुरा असर पड़ रहा है और धीरे-धीरे खराब हो जा रहा है। जब व्यक्ति की हालत बिगड़ जा रही है तो इसकी जानकारी हो पा रही है। सावधानी ही इसके बचाव का मुख्य उपाय है।
इतने दिन में पहुंचे इतने मरीज
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट 15 दिसंबर 2018 को शुरू हुई थी। 31 दिसंबर यानी 16 दिन में गुर्दा खराब वाले कुल 18 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। उनका डायलिसिस शुरू हुआ। वर्ष 2019 में संख्या बढ़कर 119 हो गई। 103 मरीज बढ़ गए। वर्ष 2020 में अब तक मरीजों संख्या बढ़कर 178 पहुंच गई। इस वर्ष अब तक 59 मरीज बढ़ गए।
शराब के सेवन वाले मरीज
चिकित्सक के मुताबिक जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए आने वाले जो मरीज हैं उनमें अधिकांश खराब क्वालिटीे की देसी शराब का सेवन करने वाले शामिल हैं। नियमित शराब के सेवन करने से गुर्दा खराब हो रहा है। अगर दिक्कत होने के बाद सही समय पर चिकित्सक के पास पहुंचे तो इलाज संभव है। मगर खराब हाल में ये अस्पताल पहुंच रहे हैं। बड़े अस्पताल में जांच में पता चल पाता है कि गुर्दा खराब है और डायलिसिस की जरूरत है।
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एक दिन में इतने मरीजों का होता है डायलिसिस
जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के जिम्मेदारों के मुताबिक वार्ड में नौ बेड हैं। इसमें एक दिन में तीन शिफ्ट चलाई जाती है। एक दिन में 25 से 27 लोगों का डायलिसिस होता है। एक मरीज का डायलिसिस करने में चार घंटे का वक्त लगता है।
पांच से छह दिन का मिल रहा नंबर
पहली बार डायलिसिस कराने के लिए मरीज का नंबर लगाना पड़ रहा है। पांच से छह दिन में नंबर आता है। रजिस्ट्रेशन में मरीज का नाम, निवास, किस अस्पताल में और किस चिकित्सक से इलाज करा रहा है। इसके पहले डायलिसिस हुआ है कि नहीं हुआ है, मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारी ली जाती है। इसके बाद दिए गए मोबाइल नंबर के माध्यम से रोगी को डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है।
प्राइवेट में एक बार में लगता है तीन हजार रुपये
जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा निशुल्क है। जबकि प्राइवेट में इसके लिए पहली बार तीन हजार से 35 सौ रुपये लगते हैं। नए आर्टीफीसियलगुर्दा से डायलिसिस करने पर तीन हजार ही लगता है। जबकि सफाई करके उसी का दोबारा प्रयोग करने पर 1500 से 2000 हजार रुपये शुल्क लगता है।
सप्ताह में इतनी बार होता है डायलिसिस
यूनिट के कर्मियों के मुताबिक 178 में 15 ऐसे में मरीज हैं जिनका सप्ताह में तीन बार डायलिसिस होता है। जबकि अन्य मरीजों का सप्ताह में दोबारा डायलिसिस किया जा रहा है। यूनिट का कर्मचारी नंबर आने के बाद इन्हें बुलाता है।
कोरोनाकाल में बाहर से आ गए मरीज
कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद मुंबई, गुजरात से 15 गुर्दा रोगी आ गए थे। उनका डायलिसिस नियमित चल रहा है। इसमें गुजरात का एक और मुंबई के चार मरीज लौट गए हैं। अब इनकी जगह खाली होने पर नए मरीज का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
गुर्दा खराब होने के लक्षण
चिकित्सक के मुताबिक गुर्दा खराब होने पर थकान महसूस करना, जी मिचलाना, मतली आना, घबराहट होना, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, पैरों में सूजन, कोमा में चले जाना, पेशाब करने में दिक्कत होना प्रमुख वजह है।
बोले चिकित्सक
डायलिसिसि यूनिट के प्रभारी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि गुर्दा खराब होने के संबंधी जो रोगी जिले में मिल रहे हैं, उनमें अधिकांश खराब क्वालिटी की देसी शराब का सेवन करने वाले हैं। यह शराब गुर्दा तो खराब कर ही रही है। साथ ही लीवर को भी नुकसान पहुंचा रही है। कुछ ऐसे मरीज हैं जो बिना सलाह के हाईपॉवर की दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे गुर्दे पर बुरा असर पड़ रहा है। शराब बहुत ही घातक है।
ऐसे करें बचाव
चिकित्सक की सलाह है कि गुर्दा संबंधी रोग से बचने के लिए संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। स्वच्छ पानी का सेवन करना चाहिए। शराब सहित अन्य मादक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। इन उपायों से इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
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जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में अब तक 178 मरीजों का हो चुका है पंजीकरण
चिकित्सकों के अनुसार गुणवत्ताविहीन शराब के सेवन से खराब हो रहे गुर्दे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खानपान में खराब वस्तुओं और शराब का सेवन आम जीवन पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। हाल यह है कि जिले में गुर्दा खराब होने वाले रोगियों के तादाद बढ़ रही है। जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में 178 ऐसे मरीज मिले हैं, जिनका गुर्दा खराब हो चुका है। दवा और नियमित डायलिसिस के सहारे चल रहे हैं। चिकित्सक इसका प्रमुख कारण खानपान ही बता रहे हैं। रोगियों का बढ़ना चिंता का विषय है। गुर्दा शरीर का अहम अंग माना जाता है। खून के संचार का यह एक अहम माध्यम है। खराब वस्तुओं और बिना चिकित्सक की सलाह के हाई पॉवर की दवाओं का सेवन करने से गुर्दा पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसा चिकित्सकों का कहना है। जिले में इन दिनों गुर्दा खराब होने वाले रोगियों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषित पानी और खराब क्वालिटी की शराब का सेवन करना मुख्य कारण है। उसके नियमित सेवन से गुर्दे पर बुरा असर पड़ रहा है और धीरे-धीरे खराब हो जा रहा है। जब व्यक्ति की हालत बिगड़ जा रही है तो इसकी जानकारी हो पा रही है। सावधानी ही इसके बचाव का मुख्य उपाय है।
इतने दिन में पहुंचे इतने मरीज
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट 15 दिसंबर 2018 को शुरू हुई थी। 31 दिसंबर यानी 16 दिन में गुर्दा खराब वाले कुल 18 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। उनका डायलिसिस शुरू हुआ। वर्ष 2019 में संख्या बढ़कर 119 हो गई। 103 मरीज बढ़ गए। वर्ष 2020 में अब तक मरीजों संख्या बढ़कर 178 पहुंच गई। इस वर्ष अब तक 59 मरीज बढ़ गए।
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शराब के सेवन वाले मरीज
चिकित्सक के मुताबिक जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए आने वाले जो मरीज हैं उनमें अधिकांश खराब क्वालिटीे की देसी शराब का सेवन करने वाले शामिल हैं। नियमित शराब के सेवन करने से गुर्दा खराब हो रहा है। अगर दिक्कत होने के बाद सही समय पर चिकित्सक के पास पहुंचे तो इलाज संभव है। मगर खराब हाल में ये अस्पताल पहुंच रहे हैं। बड़े अस्पताल में जांच में पता चल पाता है कि गुर्दा खराब है और डायलिसिस की जरूरत है।
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एक दिन में इतने मरीजों का होता है डायलिसिस
जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के जिम्मेदारों के मुताबिक वार्ड में नौ बेड हैं। इसमें एक दिन में तीन शिफ्ट चलाई जाती है। एक दिन में 25 से 27 लोगों का डायलिसिस होता है। एक मरीज का डायलिसिस करने में चार घंटे का वक्त लगता है।
पांच से छह दिन का मिल रहा नंबर
पहली बार डायलिसिस कराने के लिए मरीज का नंबर लगाना पड़ रहा है। पांच से छह दिन में नंबर आता है। रजिस्ट्रेशन में मरीज का नाम, निवास, किस अस्पताल में और किस चिकित्सक से इलाज करा रहा है। इसके पहले डायलिसिस हुआ है कि नहीं हुआ है, मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारी ली जाती है। इसके बाद दिए गए मोबाइल नंबर के माध्यम से रोगी को डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है।
प्राइवेट में एक बार में लगता है तीन हजार रुपये
जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा निशुल्क है। जबकि प्राइवेट में इसके लिए पहली बार तीन हजार से 35 सौ रुपये लगते हैं। नए आर्टीफीसियलगुर्दा से डायलिसिस करने पर तीन हजार ही लगता है। जबकि सफाई करके उसी का दोबारा प्रयोग करने पर 1500 से 2000 हजार रुपये शुल्क लगता है।
सप्ताह में इतनी बार होता है डायलिसिस
यूनिट के कर्मियों के मुताबिक 178 में 15 ऐसे में मरीज हैं जिनका सप्ताह में तीन बार डायलिसिस होता है। जबकि अन्य मरीजों का सप्ताह में दोबारा डायलिसिस किया जा रहा है। यूनिट का कर्मचारी नंबर आने के बाद इन्हें बुलाता है।
कोरोनाकाल में बाहर से आ गए मरीज
कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद मुंबई, गुजरात से 15 गुर्दा रोगी आ गए थे। उनका डायलिसिस नियमित चल रहा है। इसमें गुजरात का एक और मुंबई के चार मरीज लौट गए हैं। अब इनकी जगह खाली होने पर नए मरीज का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
गुर्दा खराब होने के लक्षण
चिकित्सक के मुताबिक गुर्दा खराब होने पर थकान महसूस करना, जी मिचलाना, मतली आना, घबराहट होना, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, पैरों में सूजन, कोमा में चले जाना, पेशाब करने में दिक्कत होना प्रमुख वजह है।
बोले चिकित्सक
डायलिसिसि यूनिट के प्रभारी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि गुर्दा खराब होने के संबंधी जो रोगी जिले में मिल रहे हैं, उनमें अधिकांश खराब क्वालिटी की देसी शराब का सेवन करने वाले हैं। यह शराब गुर्दा तो खराब कर ही रही है। साथ ही लीवर को भी नुकसान पहुंचा रही है। कुछ ऐसे मरीज हैं जो बिना सलाह के हाईपॉवर की दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे गुर्दे पर बुरा असर पड़ रहा है। शराब बहुत ही घातक है।
ऐसे करें बचाव
चिकित्सक की सलाह है कि गुर्दा संबंधी रोग से बचने के लिए संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। स्वच्छ पानी का सेवन करना चाहिए। शराब सहित अन्य मादक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। इन उपायों से इन बीमारियों से बचा जा सकता है।