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Siddharthnagar News: कर्बला से मिलता है जुल्म से लडऩे का हौसला...मौलाना शाहकार जैदी
Mon, 15 Jul 2024 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 15 Jul 2024 12:00 AM IST
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- डुमरियागंज क्षेत्र के हटवा में मोहर्रम की सातवीं पर आयोजित हुई मर्सिया मजलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा बुजुर्ग गांव के इमाम बारगाह जांबाज हुसैन में रविवार को मोहर्रम की सातवीं के मौके पर मरसिया मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को लखनऊ से आए मौलाना शाहकार जैदी ने संबोधित किया। उन्होंने मजलिस के दौरान कर्बला के मैदान में शहीद हुए इमाम हुसैन के साथ 72 साथियों की शहादत को बयां की, जिसे सुनकर अकीदत मंद रो पड़े।
मौलाना शाहकार जैदी ने कहा कि अली नमाज है और हम सब नमाजी है। मजलिस में आने से होता है शिक्षा का ज्ञान कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दी हैं। उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन व उनके 71 साथियों ने कर्बला में अपने को तथा अपने घर वालों की भूखे प्यासे शहादत देकर ये साबित कर दिया कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता सामने वाला चाहे जितना ताकत वर हो सच्चे लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम का मसायब पढ़ा, जिसे सुन अकीदत मंद पीट-पीटकर रोने लगे। आखिर में मजलिस आयोजक सरफाज रिजवी ने मजलिस में आए हुए अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा बुजुर्ग गांव के इमाम बारगाह जांबाज हुसैन में रविवार को मोहर्रम की सातवीं के मौके पर मरसिया मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को लखनऊ से आए मौलाना शाहकार जैदी ने संबोधित किया। उन्होंने मजलिस के दौरान कर्बला के मैदान में शहीद हुए इमाम हुसैन के साथ 72 साथियों की शहादत को बयां की, जिसे सुनकर अकीदत मंद रो पड़े।
मौलाना शाहकार जैदी ने कहा कि अली नमाज है और हम सब नमाजी है। मजलिस में आने से होता है शिक्षा का ज्ञान कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दी हैं। उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन व उनके 71 साथियों ने कर्बला में अपने को तथा अपने घर वालों की भूखे प्यासे शहादत देकर ये साबित कर दिया कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता सामने वाला चाहे जितना ताकत वर हो सच्चे लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम का मसायब पढ़ा, जिसे सुन अकीदत मंद पीट-पीटकर रोने लगे। आखिर में मजलिस आयोजक सरफाज रिजवी ने मजलिस में आए हुए अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया।
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