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Siddharthnagar News: कर्बला दुनिया को देता है हक सच्चाई व इंसाफ का पैगाम
Wed, 24 Jun 2026 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 24 Jun 2026 01:01 AM IST
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भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम वासा दरगाह में सोमवार रात 10 बजे मुहर्रम पर आयोजित दस दिवसीय मजलिस के छठे दिन मर्सिया मजलिस का आयोजन किया गया। उत्तराखंड से आए मौलाना आजम हुसैन ने कहा कि कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है।
इमरान लतीफ के आवास पर हुई मजलिस की शुरुआत में शायरों ने अपने कलाम पेश किए। इसमें गुलरेज रिजवी भोपाली, खुलूस हल्लौरी, आलम हल्लौरी और इमरान लतीफ जैसे शायरों ने इमाम हुसैन की शान में अपने कलाम प्रस्तुत किए।
मौलाना आजम हुसैन ने कहा कि अली नमाज हैं और हम सब नमाजी हैं। उन्होंने बताया कि मजलिस में आने से शिक्षा का ज्ञान प्राप्त होता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दी है। उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए।
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मौलाना आजम ने आगे कहा कि इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों ने कर्बला में भूखे-प्यासे रहकर शहादत देकर यह साबित कर दिया की जीत हमेशा सच्चाई की होती है। इमाम हुसैन ने कर्बला में हिंदुस्तान को याद किया था और यहां आने की इच्छा व्यक्त की थी।
मौलाना ने इमाम हुसैन के छोटे बेटे अली असगर का मसायब बयान किया और अली असगर की शहादत पढ़ी, जिसे सुनकर मौजूद अकीदतमंद भावुक हुए और आंखों में आंसू छलक उठे और या हुसैन या अली असगर की सदा पूरे पंडाल में गूंज उठी। मजलिस का संचालन अजीम हल्लौरी ने किया।
इमरान लतीफ के आवास पर हुई मजलिस की शुरुआत में शायरों ने अपने कलाम पेश किए। इसमें गुलरेज रिजवी भोपाली, खुलूस हल्लौरी, आलम हल्लौरी और इमरान लतीफ जैसे शायरों ने इमाम हुसैन की शान में अपने कलाम प्रस्तुत किए।
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मौलाना आजम हुसैन ने कहा कि अली नमाज हैं और हम सब नमाजी हैं। उन्होंने बताया कि मजलिस में आने से शिक्षा का ज्ञान प्राप्त होता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दी है। उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए।
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मौलाना आजम ने आगे कहा कि इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों ने कर्बला में भूखे-प्यासे रहकर शहादत देकर यह साबित कर दिया की जीत हमेशा सच्चाई की होती है। इमाम हुसैन ने कर्बला में हिंदुस्तान को याद किया था और यहां आने की इच्छा व्यक्त की थी।
मौलाना ने इमाम हुसैन के छोटे बेटे अली असगर का मसायब बयान किया और अली असगर की शहादत पढ़ी, जिसे सुनकर मौजूद अकीदतमंद भावुक हुए और आंखों में आंसू छलक उठे और या हुसैन या अली असगर की सदा पूरे पंडाल में गूंज उठी। मजलिस का संचालन अजीम हल्लौरी ने किया।