फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   kalanamak dhan

तीन गुना अधिक मिलती है कालानमक धान की कीमत

Fri, 09 Oct 2020 10:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 10:48 PM IST
विज्ञापन
kalanamak dhan
तीन गुना अधिक मिलती है कालानमक धान की कीमत
विज्ञापन

12 हजार रुपये प्रति क्विंटल है कालानमक चावल की कीमत
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। महात्मा बुद्ध् का प्रसाद, खास खुशबू वाला कालानमक चावल अब ऑनलाइन बाजार के जरिए देश-विदेश में सिद्धार्थनगर के उत्पाद के रूप में पहचाना जा रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल को चुना गया है। इससे कालानमक की महक तो देश-विदेश के उन उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी ही जो अभी तक इससे अनभिज्ञ थे, महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली सिद्धार्थनगर को लोग कालानमक के कारण भी जानेंगे।
स्वाद और सेहत के लिए मुफीद कालानमक चावल अन्य चावलों की अपेक्षा किसानों को ढाई से तीन गुना अधिक दाम दिलाते हैं। एक जिला-एक उत्पाद में चयनित होने के बाद जिले में पैदावार करने वाले किसानों और कारोबारियों को अब ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है। इसकी खुशबू अब जापान म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड और भूटान समेत बौद्ध धर्म के मानने वाले कई देशों तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन बाजार कंपनियों से जुड़ने पर इसकी मांग और खपत बढ़ने की उम्मीद है। उप कृषि निदेशक लाल बहादुर यादव के मुताबिक चावल इस समय 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर बिक रहा है। यह बारिश के प्राकृतिक पानी से ही होता है। कालानमक की नई किस्मों के आने से पिछले साल के मुकाबले इस बार एरिया करीब 10 हेक्टेयर हो गया है।
विज्ञापन

अधिकांश उपभोक्ता कालानमक की तुलना बासमती और अन्य चावलों से करते हैं। जबकि काला नमक में अन्य सभी चावलों की अपेक्षा लौह और जस्ता की मात्रा सर्वाधिक होती है। प्रोटीन 10.4 ग्राम प्रति सौ ग्राम पाया जाता है। ग्लाइसीमिक इंडेक्स 51.2 है। ग्लाइसिमीक इंडेक्स कम होने के कारण इसको मधुमेह रोगी भी खा सकते हैं। इसमें एमाइलेज मात्र 20 प्रतिशत ही होती है। चावल ठंडा होने पर भी हमेशा मुलायम और स्वादिष्ट बना रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-झगरू प्रसाद जायसवाल, चावल कारोबारी
काला नमक को जैविक विधि से खेती करने के लिए सबसे पहले किसान अथवा फर्म को जैविक खेती के लिए पंजीकरण कराना पड़ता है। जैविक विधि के अंतर्गत गोबर की खाद, ढैंचा, अमृतपाणी, जीवामृत, नीम पत्ती का घोल, गो मूत्र आदि का प्रयोग किया जाता है। रासायनिक उर्वरक का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके लिए लगातार तीन वर्षों तक खेत में किसी भी रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है। प्रत्येक वर्ष मिट्टी के नमूने की जांच एवं खेत का निरीक्षण किया जाता है। यदि खेत और मिट्टी के नमूने में रासायनिक उर्वरक नहीं हैं तो खेत में उत्पादित वस्तु जैविक कहलाएगी तथा जैविक खेती का प्रमाणपत्र मिलेगा।
-परशुराम यादव, किसान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed