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Siddharthnagar News: कृत्रिम गर्भाधान से पैदा होंगी जमुना पारी और सिरोही नस्ल की बकरी
Sun, 18 Feb 2024 01:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 18 Feb 2024 01:34 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले में जल्द ही बकरियों की नस्ल बदलने के लिए कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। इसके लिए जिले के दो पशु डॉक्टरों को टीकाकरण करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। जिले में अब जमुना पारी और सिरोही नस्ल की बकरियां पैदा होंगी।
जिले में बरबरी नस्ल की बकरियों का पैदावार अधिक होती है। जबकि बरबरी नस्ल की बकरियों का अधिक वजन 15 से 20 किलो का होता है। बकरी पालकों को इसके लिए कम दाम मिलते है। लेकिन जमुना पारी व सिरोही नस्ल की बकरियों का टीकाकरण से लोगों को अधिक वजन की बकरियां मिलने लगेंगी। बताते चले की जिले में लगभग 10 हजार से अधिक किसान बकरी पालते हैं। जिसे बेचकर वह अपने घर का खर्च चलाते हैं। लेकिन ज्यादा समय तक पालने के बाद भी लोगों को बकरी बेचने पर कम पैसा मिलता था।
अब जमुना पारी व सिरोही नस्ल के टीकाकरण के बाद किसानों को कम समय में ही अधिक वजन की बकरी तैयार हो जाएंगी। इससे उन्हें अधिक लाभ मिलेगा। गर्भाधान फ्री में किया जाएगा। जिससे लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। जमुना पारी व सिरोही नस्ल की बकरियां कम समय में ही अधिक वजन की हो जाती हैं। यह बकरियां 30 से 35 किलों तक के वजन तक भी खाने योग्य होती हैं।
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वर्जन
जमुना पारी व सिरोही नस्ल की बकरियों के लिए दो डॉक्टरों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। जल्द ही जिले में टीकाकरण का कार्य शुरू किया जाएगा।
-जीवन लाल, सीवीओ
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जिले में बरबरी नस्ल की बकरियों का पैदावार अधिक होती है। जबकि बरबरी नस्ल की बकरियों का अधिक वजन 15 से 20 किलो का होता है। बकरी पालकों को इसके लिए कम दाम मिलते है। लेकिन जमुना पारी व सिरोही नस्ल की बकरियों का टीकाकरण से लोगों को अधिक वजन की बकरियां मिलने लगेंगी। बताते चले की जिले में लगभग 10 हजार से अधिक किसान बकरी पालते हैं। जिसे बेचकर वह अपने घर का खर्च चलाते हैं। लेकिन ज्यादा समय तक पालने के बाद भी लोगों को बकरी बेचने पर कम पैसा मिलता था।
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अब जमुना पारी व सिरोही नस्ल के टीकाकरण के बाद किसानों को कम समय में ही अधिक वजन की बकरी तैयार हो जाएंगी। इससे उन्हें अधिक लाभ मिलेगा। गर्भाधान फ्री में किया जाएगा। जिससे लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। जमुना पारी व सिरोही नस्ल की बकरियां कम समय में ही अधिक वजन की हो जाती हैं। यह बकरियां 30 से 35 किलों तक के वजन तक भी खाने योग्य होती हैं।
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वर्जन
जमुना पारी व सिरोही नस्ल की बकरियों के लिए दो डॉक्टरों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। जल्द ही जिले में टीकाकरण का कार्य शुरू किया जाएगा।
-जीवन लाल, सीवीओ