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सिद्धार्थनगर: चरस तस्कर को 10 वर्ष कारावास, एक लाख अर्थदंड
Tue, 22 Nov 2022 03:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Nov 2022 03:25 PM IST
सार
रोकने पर वह भागना चाहा तो उसे पकड़कर तलाशी ली गई तो उसके थैली से 2 किलो 20 ग्राम चरस की बरामदगी हुई। उसे गिरफ्तार कर थाने पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई और न्यायालय में आरोप पत्र भेजा गया।
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जेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अपर सत्र न्यायाधीश ब्रिजेश कुमार एचजेएस द्रुतगामी न्यायालय द्वितीय ने नेपाल निवासी चरस तस्कर को 10 वर्ष कठोर कारावास एवं एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। घटना 6 वर्ष पूर्व मोहाना थाना क्षेत्र की है। अभियुक्त वर्तमान में जेल में बंद है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 अक्टूबर 2016 को एसएसबी 43वीं वाहिनी एवं मोहाना थाना पुलिस सीमा क्षेत्र में संयुक्त रूप से गश्त कर रहे थे। उसी दौरान नेपाल के कपिलवस्तु जिले के तौलिहवा थानाक्षेत्र के शिवलवा गांव निवासी साधू कोरी भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित गांव चिरीपुर के पास संदिग्ध अवस्था में प्लास्टिक की थैली लेकर आता दिखाई दिया।
रोकने पर वह भागना चाहा तो उसे पकड़कर तलाशी ली गई तो उसके थैली से 2 किलो 20 ग्राम चरस की बरामदगी हुई। उसे गिरफ्तार कर थाने पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई और न्यायालय में आरोप पत्र भेजा गया। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर गवाहों और साक्ष्यों का परीक्षण किया और दोनों पक्षों की अंतिम बहस सुनी।
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न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई और अर्थदंड की धनराशि अदा न करनी की दशा में तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 अक्टूबर 2016 को एसएसबी 43वीं वाहिनी एवं मोहाना थाना पुलिस सीमा क्षेत्र में संयुक्त रूप से गश्त कर रहे थे। उसी दौरान नेपाल के कपिलवस्तु जिले के तौलिहवा थानाक्षेत्र के शिवलवा गांव निवासी साधू कोरी भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित गांव चिरीपुर के पास संदिग्ध अवस्था में प्लास्टिक की थैली लेकर आता दिखाई दिया।
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रोकने पर वह भागना चाहा तो उसे पकड़कर तलाशी ली गई तो उसके थैली से 2 किलो 20 ग्राम चरस की बरामदगी हुई। उसे गिरफ्तार कर थाने पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई और न्यायालय में आरोप पत्र भेजा गया। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर गवाहों और साक्ष्यों का परीक्षण किया और दोनों पक्षों की अंतिम बहस सुनी।
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न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई और अर्थदंड की धनराशि अदा न करनी की दशा में तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।