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Siddharthnagar News: इस्लाम और इंसानियत की हिफाजत के लिए इमाम हुसैन ने दी शहादत
Wed, 22 Jul 2026 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:19 AM IST
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सिद्धार्थनगर। क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम के तत्वावधान में सोमवार रात अशरे की पांचवीं मजलिस आयोजित हुई। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। मुख्य वक्ता मौलाना तस्दीक हुसैन (जैदपुर) ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत दीने-इस्लाम, इंसानियत और सच्चाई की हिफाजत के लिए दी गई थी। उनका पैगाम आज भी पूरी दुनिया को हक और इंसाफ के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
मौलाना तस्दीक हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत जुल्म के खिलाफ खड़े होने और सच्चाई का साथ देने का हौसला देती है। इमाम हुसैन को मानने वाला कभी भी जालिम के सामने सिर नहीं झुका सकता बल्कि हर दौर में अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करता है। उन्होंने कहा कि शहादत-ए-इमाम हुसैन और अजादारी का वास्तविक उद्देश्य कर्बला के संदेश को समाज तक पहुंचाना और हक का साथ देना है।
उन्होंने कहा कि कर्बला का वाकया हमें मजलूमों और बेगुनाहों के समर्थन में खड़े होने की सीख देता है। इमाम हुसैन ने इंसानियत की रक्षा और सच्चाई की खातिर अपनी और अपने साथियों की कुर्बानी दी। इसलिए हर इंसान का दायित्व है कि वह अपने जीवन में सच्चाई और इंसाफ का रास्ता अपनाए।
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मजलिस के अंतिम चरण में मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक मंजर का बयान किया। इसे सुनकर इमामबारगाह में मौजूद अकीदतमंद भावुक हो उठे और गम में अश्क बहाने लगे। मजलिस से पहले शाहिद आलम और उनके सहयोगियों ने मरसियाख्वानी पेश की।
इस अवसर पर अंजुमन फरोग मातम के सेक्रेटरी इकबाल मेहंदी, तसकीन हैदर, इंजीनियर मोहम्मद मेंहदी, तसबीब हसन, कसिम रिजवी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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मौलाना तस्दीक हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत जुल्म के खिलाफ खड़े होने और सच्चाई का साथ देने का हौसला देती है। इमाम हुसैन को मानने वाला कभी भी जालिम के सामने सिर नहीं झुका सकता बल्कि हर दौर में अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करता है। उन्होंने कहा कि शहादत-ए-इमाम हुसैन और अजादारी का वास्तविक उद्देश्य कर्बला के संदेश को समाज तक पहुंचाना और हक का साथ देना है।
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उन्होंने कहा कि कर्बला का वाकया हमें मजलूमों और बेगुनाहों के समर्थन में खड़े होने की सीख देता है। इमाम हुसैन ने इंसानियत की रक्षा और सच्चाई की खातिर अपनी और अपने साथियों की कुर्बानी दी। इसलिए हर इंसान का दायित्व है कि वह अपने जीवन में सच्चाई और इंसाफ का रास्ता अपनाए।
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मजलिस के अंतिम चरण में मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक मंजर का बयान किया। इसे सुनकर इमामबारगाह में मौजूद अकीदतमंद भावुक हो उठे और गम में अश्क बहाने लगे। मजलिस से पहले शाहिद आलम और उनके सहयोगियों ने मरसियाख्वानी पेश की।
इस अवसर पर अंजुमन फरोग मातम के सेक्रेटरी इकबाल मेहंदी, तसकीन हैदर, इंजीनियर मोहम्मद मेंहदी, तसबीब हसन, कसिम रिजवी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।