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Siddharthnagar News: पोर्टल पर केस निस्तारित, इंसाफ के लिए दौड़ लगा रहे फरियादी
Fri, 13 Oct 2023 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 13 Oct 2023 12:09 AM IST
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आईजीआरएस या वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करने पर भी नहीं हो रही निचले स्तर पर जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। वैसे तो आईजीआरएस के पोर्टल में बहुत कम संख्या में आवेदनों का निस्तारण नहीं हुआ है। हकीकत ये है कि जिनके आवेदनों को पोर्टल पर निस्तारित दर्शा दिया गया है वे भी भटक रहे हैं। आईजीआरएस पर शिकायत करें या वरिष्ठ अधिकारी से, जांच फिर निचले पायदान पर पहुंच जाती है। इन पर गलत रिपोर्ट लगाने के आरोप पहले से लगे हुए हैं। ऐसे में शिकायतकर्ता प्रार्थनापत्र लेकर अफसरों की चौखट पर दस्तक देने के लिए मजबूर हैं।
डीएम, एडीएम, सीडीओ, एसडीएम और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के कार्यालय को देखा जाए तो यहां पुरानी शिकायतों के साथ फरियादियों की लंबी भीड़ लग रही है। जनसुनवाई से संबंधित तहसील और थाना में आयोजित वाले प्रत्येक समाधान दिवस में जिले भर से औसतन 500 से 600 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इसमें सर्वाधिक भूमि विवाद, भूमि पैमाइश, अवैध कब्जा एवं पुलिस से संबंधित मामले शामिल हैं। किसी विशेष मामले को छोड़ दें तो अधिकतर के निस्तारण का माध्यम संबंधित विभाग के मौके के ही अधिकारी ही बन रहे हैं। ऐसे में फरियादियों की समस्याओं के समाधान में बरसों लग जाते हैं। सभी तहसीलों में सबसे अधिक भूमि पैमाइश के मामले अटके हुए हैं।
तहसीलों में भी फरियादियों की भीड़
जिले की पांचों तहसीलों में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर फरियादियों की भीड़ रोज जुट रही है। खारिज दाखिल, वरासत, पैमाइश, खतौनी में सुधार, बंटवारा आदि प्रकरणों की भरमार है। तहसील स्तरीय न्यायालयों में सुनवाई के लिए फाइलों से आल्मारियां भरी पड़ी हैं। फरियादियों को यह उम्मीद रहती है कि आला अधिकारी की मौजूदगी में प्रार्थना पत्र देने से उन्हें त्वरित न्याय मिलेगा। मगर, यहां भी उसी पुराने ढर्रे पर संबंधित विभाग को प्रार्थनापत्र स्थानांतरित कर दिया जा रहा है।
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आईजीआरएस पर शिकायतों के निस्तारण की स्थिति
विभाग कुल प्राप्त आवेदन लंबित आवेदनों की संख्या
प्रधानमंत्री संदर्भ 1414, 33,
मुख्यमंत्री संदर्भ 1631, 34
जिलाधिकारी संदर्भ 7273, 140
ऑनलाइन संदर्भ 20, 854, 581
संपूर्ण समाधान दिवस 4789, 00
सीएम हेल्पलाइन संदर्भ 21, 702, 289
(सितंबर 2023 तक की रिपोर्ट )
2017 से न्याय की दरकार
बांसी क्षेत्र के महादेव ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल, डीएम या मंत्री, मुख्यमंत्री से शिकायत की लेकिन निचले स्तर पर सुनवाई नहीं हुई है। पोर्टल से शिकायत उन्हीं के पास पहुंच रही, जिनसे न्याय की उम्मीद नहीं है। उनका आरोप है कि उनकी जमीन पर गांव के एक दबंग ने कब्जा कर लिया है। 2017 में जमीन को खाली करवाने व एक हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके बाद भी जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। बार-बार संपूर्ण समाधान दिवस, आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इन शिकायतों से कोई फायदा नहीं हुआ।
सीएम पोर्टल पर की शिकायत, फिर भी नहीं हुई पैमाइश
सिद्धार्थनगर। बांसी तहसील क्षेत्र के ग्राम बसंतपुर निवासी संतोष कुमार ने जमीन पर कब्जा न मिलने से क्षुब्ध होकर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। सीएम पोर्टल पर 24 अप्रैल 2023 शिकायत की है, लेकिन उनकी भूमि की पैमाइश नहीं हुई और पोर्टल पर मामला निस्तारित दिखा दिया गया है। शिकायती पत्र में उन्होंने कहा कि शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र स्थित गांव पकड़िहवा, पश्चिमडीह में वह एक जमीन के संक्रमणीय भूमिधर हैं। बावजूद इसके उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल रहा है। वह पिछले आठ सालों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। पीड़ित ने बताया कि पास के रहने वाले दो लोग जबरिया उनकी जमीन पर कब्जा जमाए हैं। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी उन लोगों ने बनवा डाला। कब्जा करने वालों के विरुद्ध फर्जी कागजात लगाकर जमीन हड़पने के इसी मामले में केस भी चल रहा है।
उन्हाेंने बताया कि अपनी जमीन वापस पाने के लिए तहसील से लेकर जिले तक के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कहीं कोई सुनवाई न होने पर सीएम के जनता दर्शन में भी अपनी फरियाद सुनाई। इसके बाद जिले के अधिकारी कुछ समय के लिए हरकत में तो आए लेकिन बाद में उनका मामला संज्ञान में नहीं लिया गया। संतोष का कहना है कि पुलिस के सहयोग से वह संतुष्ट हैं। लेकिन राजस्व विभाग में पैमाइश का मामला अटक गया।
वर्जन
आईजीआरएस सहित अन्य मामलों का निस्तारण तेजी से किया जा रहा है। पुराने मामलों में भी फरियादियों को न्याय दिलाया जा रहा है। आईजीआरएस में मामला निस्तारित है और फरियादी चक्कर काट रहे हैं। ऐसे केस में और तत्परता से मामले निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी
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आईजीआरएस या वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करने पर भी नहीं हो रही निचले स्तर पर जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। वैसे तो आईजीआरएस के पोर्टल में बहुत कम संख्या में आवेदनों का निस्तारण नहीं हुआ है। हकीकत ये है कि जिनके आवेदनों को पोर्टल पर निस्तारित दर्शा दिया गया है वे भी भटक रहे हैं। आईजीआरएस पर शिकायत करें या वरिष्ठ अधिकारी से, जांच फिर निचले पायदान पर पहुंच जाती है। इन पर गलत रिपोर्ट लगाने के आरोप पहले से लगे हुए हैं। ऐसे में शिकायतकर्ता प्रार्थनापत्र लेकर अफसरों की चौखट पर दस्तक देने के लिए मजबूर हैं।
डीएम, एडीएम, सीडीओ, एसडीएम और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के कार्यालय को देखा जाए तो यहां पुरानी शिकायतों के साथ फरियादियों की लंबी भीड़ लग रही है। जनसुनवाई से संबंधित तहसील और थाना में आयोजित वाले प्रत्येक समाधान दिवस में जिले भर से औसतन 500 से 600 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इसमें सर्वाधिक भूमि विवाद, भूमि पैमाइश, अवैध कब्जा एवं पुलिस से संबंधित मामले शामिल हैं। किसी विशेष मामले को छोड़ दें तो अधिकतर के निस्तारण का माध्यम संबंधित विभाग के मौके के ही अधिकारी ही बन रहे हैं। ऐसे में फरियादियों की समस्याओं के समाधान में बरसों लग जाते हैं। सभी तहसीलों में सबसे अधिक भूमि पैमाइश के मामले अटके हुए हैं।
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तहसीलों में भी फरियादियों की भीड़
जिले की पांचों तहसीलों में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर फरियादियों की भीड़ रोज जुट रही है। खारिज दाखिल, वरासत, पैमाइश, खतौनी में सुधार, बंटवारा आदि प्रकरणों की भरमार है। तहसील स्तरीय न्यायालयों में सुनवाई के लिए फाइलों से आल्मारियां भरी पड़ी हैं। फरियादियों को यह उम्मीद रहती है कि आला अधिकारी की मौजूदगी में प्रार्थना पत्र देने से उन्हें त्वरित न्याय मिलेगा। मगर, यहां भी उसी पुराने ढर्रे पर संबंधित विभाग को प्रार्थनापत्र स्थानांतरित कर दिया जा रहा है।
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आईजीआरएस पर शिकायतों के निस्तारण की स्थिति
विभाग कुल प्राप्त आवेदन लंबित आवेदनों की संख्या
प्रधानमंत्री संदर्भ 1414, 33,
मुख्यमंत्री संदर्भ 1631, 34
जिलाधिकारी संदर्भ 7273, 140
ऑनलाइन संदर्भ 20, 854, 581
संपूर्ण समाधान दिवस 4789, 00
सीएम हेल्पलाइन संदर्भ 21, 702, 289
(सितंबर 2023 तक की रिपोर्ट )
2017 से न्याय की दरकार
बांसी क्षेत्र के महादेव ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल, डीएम या मंत्री, मुख्यमंत्री से शिकायत की लेकिन निचले स्तर पर सुनवाई नहीं हुई है। पोर्टल से शिकायत उन्हीं के पास पहुंच रही, जिनसे न्याय की उम्मीद नहीं है। उनका आरोप है कि उनकी जमीन पर गांव के एक दबंग ने कब्जा कर लिया है। 2017 में जमीन को खाली करवाने व एक हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके बाद भी जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। बार-बार संपूर्ण समाधान दिवस, आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इन शिकायतों से कोई फायदा नहीं हुआ।
सीएम पोर्टल पर की शिकायत, फिर भी नहीं हुई पैमाइश
सिद्धार्थनगर। बांसी तहसील क्षेत्र के ग्राम बसंतपुर निवासी संतोष कुमार ने जमीन पर कब्जा न मिलने से क्षुब्ध होकर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। सीएम पोर्टल पर 24 अप्रैल 2023 शिकायत की है, लेकिन उनकी भूमि की पैमाइश नहीं हुई और पोर्टल पर मामला निस्तारित दिखा दिया गया है। शिकायती पत्र में उन्होंने कहा कि शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र स्थित गांव पकड़िहवा, पश्चिमडीह में वह एक जमीन के संक्रमणीय भूमिधर हैं। बावजूद इसके उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल रहा है। वह पिछले आठ सालों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। पीड़ित ने बताया कि पास के रहने वाले दो लोग जबरिया उनकी जमीन पर कब्जा जमाए हैं। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी उन लोगों ने बनवा डाला। कब्जा करने वालों के विरुद्ध फर्जी कागजात लगाकर जमीन हड़पने के इसी मामले में केस भी चल रहा है।
उन्हाेंने बताया कि अपनी जमीन वापस पाने के लिए तहसील से लेकर जिले तक के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कहीं कोई सुनवाई न होने पर सीएम के जनता दर्शन में भी अपनी फरियाद सुनाई। इसके बाद जिले के अधिकारी कुछ समय के लिए हरकत में तो आए लेकिन बाद में उनका मामला संज्ञान में नहीं लिया गया। संतोष का कहना है कि पुलिस के सहयोग से वह संतुष्ट हैं। लेकिन राजस्व विभाग में पैमाइश का मामला अटक गया।
वर्जन
आईजीआरएस सहित अन्य मामलों का निस्तारण तेजी से किया जा रहा है। पुराने मामलों में भी फरियादियों को न्याय दिलाया जा रहा है। आईजीआरएस में मामला निस्तारित है और फरियादी चक्कर काट रहे हैं। ऐसे केस में और तत्परता से मामले निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी