{"_id":"66312e0265cbee815e0b09c2","slug":"if-the-land-is-deeded-then-check-whether-it-is-ceiling-or-government-land-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1004-116647-2024-04-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: बैनामे की जमीन है तो जांच लें...कहीं सीलिंग या सरकारी तो नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: बैनामे की जमीन है तो जांच लें...कहीं सीलिंग या सरकारी तो नहीं
Tue, 30 Apr 2024 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 30 Apr 2024 11:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में कई जगहों पर सरकारी भूमि के फर्जी तरीके से नाम कराने के आ चुके हैं मामले
शहर समेत बांसी, शोहरतगढ़ में फर्जीवाड़े में हो चुकी है कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर आप आशियाना बनाने अथवा कृषि कार्य के लिए भूमि क्रय कर रहे हैं तो अभिलेखों की छानबीन कर लें, नहीं तो धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं। सरकारी भूमि को फर्जी तरीके से अभिलेखों में अपने नाम दर्ज कराने के बाद जालसाज इसे दूसरे को बेंच देते हैं। इसका खुलासा तब होता है जब बैनामे के बाद अभिलेखों में उस भूमि पर नाम चढ़ाने जाएंगे।
शहर के निकट करौंदा मसिना में एक व्यक्ति ने सड़क किनारे भूमि दिखाकर दूसरे को महंगी कीमत में बेंच दी। बाद में यह भूमि एनएच चौड़ीकरण में आ गई तो पता चला कि सड़क किनारे तो सरकारी भूमि थी, उसके पीछे की भूमि उसने खरीदी थी। जिससे उसे सरकार की तरफ भूमि मुआवजे की धनराशि बहुत कम मिली। हालांकि इससे पीड़ित को बहुत आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन उसने कोई शिकायत नहीं की। इसी तरह ककरहवा में एक व्यक्ति ने फर्जीवाड़ा कर सरकारी भूमि अपने नाम करा ली थी। वह भूमि इंडो-नेपाल सीमा सड़क के निर्माण लिए अधिग्रहित की गई तो फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्ति को एक करोड़ मुआवजा बन गया। इसमें उसे 50 लाख रुपये भुगतान भी हुआ, लेकिन इसी बीच मामले का खुलासा हो गया। जिसके बाद प्रशासन ने उससे भुगतान की गई धनराशि रिकवरी कर ली, लेकिन उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे कई मामले है जहां आशियाने के लिए महंगे कीमत पर भूमि खरीद करने वाले ठगी के शिकार हो गए है।
फर्जीवाड़ा कर सौ बीघा भूमि करा लिया नाम
बांसी क्षेत्र के चंवरताल में ग्राम सभा की सौ बीघा से अधिक सरकारी भूमि फर्जीवाड़ा कर अपना नाम दर्ज कराने के मामले का बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के जांच में खुलासा हुआ। जिसके बाद उस मामले में दाखिल वाद की सुनवाई करते हुए बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने संबंधित भूमि 15 से अधिक गाटों से उसका नाम हटाकर नवीन परती भूमि दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर फर्जीवाड़ा करने वाले के विरुद्ध केस दर्ज कराने का निर्देश चकबंदी अधिकारी बांसी को दिया था। मामले में दाखिल वाद की सुनवाई करते हुए एडीएम उमाशंकर ने भी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के निर्णय को सही ठहराया।
विज्ञापन
भीमापार में सरकारी भूमि पर हो गया कब्जा
शहर के भीमापार में सड़क किनारे स्थित बेशकीमती सरकारी पांच बीघा से अधिक भूमि को भू-माफियाओं ने राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर नाले के दर्शा दिया। साथ ही पीछे स्थित निजी भूमि को आगे दिखाकर सस्ती भूमि को महंगे कीमत में बेंच कर मालामाल हो गए। आरटीआई कार्यकर्ता प्रशस्ति उपाध्याय कहते हैं कि अगर इसकी जांच हो तो कई राजस्वकर्मी इस फर्जीवाड़े में फंसेंगे और सड़क किनारे खड़े हो गए कई मकान को ध्वस्त करना पड़ेगा।
फर्जी अभिलेख तैयार कर करा दिया बैनामा
जालसाजों ने फर्जी आधार कार्ड व फर्जी पता का अभिलेख बनवाकर शोहरतगढ़ में स्थित 14 बीघा जमीन बैनामा कर दो लोगों को ठग लिया। मामले में पुलिस ने छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। जालसाजों ने जमीन के मालिक मुशापाल सिंह निवासी ग्राम इटवा, तहसील नागौद जिला सतना राज्य मध्यप्रदेश के नाम से फर्जी आधार कार्ड और जरूरी अभिलेख तैयार किया। जिसके बाद 10 अप्रैल को शोहरतगढ़ निबंध कार्यालय पर 14 बीघा जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर दिया। पुलिस जमीन की देखरेख रेख करने वाले गनचौरा निवासी रामदेव यादव की तहरीर पर केस दर्जकर कार्रवाई में जुटी है।
किसी भी भूमि की खरीद करने के पहले उसके समस्त दस्तावेज का उचित पटल पर जांच कराना बेहद जरूरी है, जिससे ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं।
-अनिल कुमार विश्वकर्मा, अधिवक्ता
बिना अभिलेखों की जांच के भूमि खरीद करने पर फर्जीवाड़े का शिकार हो सकते हैं, साथ ही भूमि और धनराशि का नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
-मनीष सहाय, अधिवक्ता
विज्ञापन
शहर समेत बांसी, शोहरतगढ़ में फर्जीवाड़े में हो चुकी है कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर आप आशियाना बनाने अथवा कृषि कार्य के लिए भूमि क्रय कर रहे हैं तो अभिलेखों की छानबीन कर लें, नहीं तो धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं। सरकारी भूमि को फर्जी तरीके से अभिलेखों में अपने नाम दर्ज कराने के बाद जालसाज इसे दूसरे को बेंच देते हैं। इसका खुलासा तब होता है जब बैनामे के बाद अभिलेखों में उस भूमि पर नाम चढ़ाने जाएंगे।
शहर के निकट करौंदा मसिना में एक व्यक्ति ने सड़क किनारे भूमि दिखाकर दूसरे को महंगी कीमत में बेंच दी। बाद में यह भूमि एनएच चौड़ीकरण में आ गई तो पता चला कि सड़क किनारे तो सरकारी भूमि थी, उसके पीछे की भूमि उसने खरीदी थी। जिससे उसे सरकार की तरफ भूमि मुआवजे की धनराशि बहुत कम मिली। हालांकि इससे पीड़ित को बहुत आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन उसने कोई शिकायत नहीं की। इसी तरह ककरहवा में एक व्यक्ति ने फर्जीवाड़ा कर सरकारी भूमि अपने नाम करा ली थी। वह भूमि इंडो-नेपाल सीमा सड़क के निर्माण लिए अधिग्रहित की गई तो फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्ति को एक करोड़ मुआवजा बन गया। इसमें उसे 50 लाख रुपये भुगतान भी हुआ, लेकिन इसी बीच मामले का खुलासा हो गया। जिसके बाद प्रशासन ने उससे भुगतान की गई धनराशि रिकवरी कर ली, लेकिन उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे कई मामले है जहां आशियाने के लिए महंगे कीमत पर भूमि खरीद करने वाले ठगी के शिकार हो गए है।
विज्ञापन
फर्जीवाड़ा कर सौ बीघा भूमि करा लिया नाम
बांसी क्षेत्र के चंवरताल में ग्राम सभा की सौ बीघा से अधिक सरकारी भूमि फर्जीवाड़ा कर अपना नाम दर्ज कराने के मामले का बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के जांच में खुलासा हुआ। जिसके बाद उस मामले में दाखिल वाद की सुनवाई करते हुए बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने संबंधित भूमि 15 से अधिक गाटों से उसका नाम हटाकर नवीन परती भूमि दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर फर्जीवाड़ा करने वाले के विरुद्ध केस दर्ज कराने का निर्देश चकबंदी अधिकारी बांसी को दिया था। मामले में दाखिल वाद की सुनवाई करते हुए एडीएम उमाशंकर ने भी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के निर्णय को सही ठहराया।
विज्ञापन
भीमापार में सरकारी भूमि पर हो गया कब्जा
शहर के भीमापार में सड़क किनारे स्थित बेशकीमती सरकारी पांच बीघा से अधिक भूमि को भू-माफियाओं ने राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर नाले के दर्शा दिया। साथ ही पीछे स्थित निजी भूमि को आगे दिखाकर सस्ती भूमि को महंगे कीमत में बेंच कर मालामाल हो गए। आरटीआई कार्यकर्ता प्रशस्ति उपाध्याय कहते हैं कि अगर इसकी जांच हो तो कई राजस्वकर्मी इस फर्जीवाड़े में फंसेंगे और सड़क किनारे खड़े हो गए कई मकान को ध्वस्त करना पड़ेगा।
फर्जी अभिलेख तैयार कर करा दिया बैनामा
जालसाजों ने फर्जी आधार कार्ड व फर्जी पता का अभिलेख बनवाकर शोहरतगढ़ में स्थित 14 बीघा जमीन बैनामा कर दो लोगों को ठग लिया। मामले में पुलिस ने छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। जालसाजों ने जमीन के मालिक मुशापाल सिंह निवासी ग्राम इटवा, तहसील नागौद जिला सतना राज्य मध्यप्रदेश के नाम से फर्जी आधार कार्ड और जरूरी अभिलेख तैयार किया। जिसके बाद 10 अप्रैल को शोहरतगढ़ निबंध कार्यालय पर 14 बीघा जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर दिया। पुलिस जमीन की देखरेख रेख करने वाले गनचौरा निवासी रामदेव यादव की तहरीर पर केस दर्जकर कार्रवाई में जुटी है।
किसी भी भूमि की खरीद करने के पहले उसके समस्त दस्तावेज का उचित पटल पर जांच कराना बेहद जरूरी है, जिससे ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं।
-अनिल कुमार विश्वकर्मा, अधिवक्ता
बिना अभिलेखों की जांच के भूमि खरीद करने पर फर्जीवाड़े का शिकार हो सकते हैं, साथ ही भूमि और धनराशि का नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
-मनीष सहाय, अधिवक्ता