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ककरहवा के ऐतिहासिक रामलीला में हुआ रावण का दहन
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ककरहवा में आयोजित रामलीला मेले में पुतला दहन के लिए कंधे पर बैठाकर राम और लक्ष्मण को ले जाते हनुम?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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ककरहवा के ऐतिहासिक रामलीला में हुआ रावण का दहन
ककरहवा। रामलीला मंचन से समाज को सीख मिलती है। रावण दहन का उद्देश्य तभी सफल होगा, जब आप अहंकार और बुराई समाप्त करने की प्रेरणा लें। ये बातें विधायक प्रतिनिधि सत्यप्रकाश राही ने ककरहवा बाजार में रावण दहन कार्यक्रम के बाद कहीं। प्राचीन रामलीला मेले में रविवार को रावण दहन देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
विगत 70 वर्षों से लगातार आयोजित हो इस मेले में आसपास के गांवों के अलावा नेपाल से भी लोग आते हैं। रावण दहन में आए विधायक प्रतिनिधि सत्यप्रकाश राही ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने में यहां मेले की परंपरा शुरू हुई थी। आयोजन को शानदार और सुरक्षित बनाने में यहां के लोगों की भूमिका सराहनीय है। मेला आयोजक ग्राम प्रधान नीतू पांडेय ने कहा कि रावण रूपी अत्याचारी को दहन कर देने मात्र से हमें विजय नहीं मिलेगी। विजय पाने के लिए हमको अपने अंदर की बुराई और अहंकार को जलाकर मारना होगा।
ग्रामीणों के सहयोग से लगातार इस मेले की परंपरा बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी। मेले में बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया। मेले में सब प्रकार की दुकानें लगाई गई हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। खासकर झूला, मौत का कुंआ, जादूगर, खिलौने के दुकान, मिठाई, चाट व अन्य खाने-पीने की दुकानों ने लोगों को खूब लुभाया। शनिवार से शुरू मेला सोमवार को खत्म होगा। इस दौरान दिलीप पांडेय, नागेंद्र मिश्र, बुद्धिसागर मिश्र, अमन जायसवाल, वीरेंद्र पांडेय, गुलाब जायसवाल, मार्कंडेय मिश्रा, मनी पांडेय, गुड्डा, पवन आदि मौजूद रहे।
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ककरहवा। रामलीला मंचन से समाज को सीख मिलती है। रावण दहन का उद्देश्य तभी सफल होगा, जब आप अहंकार और बुराई समाप्त करने की प्रेरणा लें। ये बातें विधायक प्रतिनिधि सत्यप्रकाश राही ने ककरहवा बाजार में रावण दहन कार्यक्रम के बाद कहीं। प्राचीन रामलीला मेले में रविवार को रावण दहन देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
विगत 70 वर्षों से लगातार आयोजित हो इस मेले में आसपास के गांवों के अलावा नेपाल से भी लोग आते हैं। रावण दहन में आए विधायक प्रतिनिधि सत्यप्रकाश राही ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने में यहां मेले की परंपरा शुरू हुई थी। आयोजन को शानदार और सुरक्षित बनाने में यहां के लोगों की भूमिका सराहनीय है। मेला आयोजक ग्राम प्रधान नीतू पांडेय ने कहा कि रावण रूपी अत्याचारी को दहन कर देने मात्र से हमें विजय नहीं मिलेगी। विजय पाने के लिए हमको अपने अंदर की बुराई और अहंकार को जलाकर मारना होगा।
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ग्रामीणों के सहयोग से लगातार इस मेले की परंपरा बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी। मेले में बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया। मेले में सब प्रकार की दुकानें लगाई गई हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। खासकर झूला, मौत का कुंआ, जादूगर, खिलौने के दुकान, मिठाई, चाट व अन्य खाने-पीने की दुकानों ने लोगों को खूब लुभाया। शनिवार से शुरू मेला सोमवार को खत्म होगा। इस दौरान दिलीप पांडेय, नागेंद्र मिश्र, बुद्धिसागर मिश्र, अमन जायसवाल, वीरेंद्र पांडेय, गुलाब जायसवाल, मार्कंडेय मिश्रा, मनी पांडेय, गुड्डा, पवन आदि मौजूद रहे।
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