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औदही कला पहुंची आईसीएमआर की टीम
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औदही कला पहुंची आईसीएमआर की टीम
दूसरी कंपनी का टीका लगने के मामले में शुरू हुई रिसर्च
टीम ने 20 लोगों के लिया ब्लड सैंपल, होगी रिसर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा (सिद्धार्थनगर)। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) गोरखपुर ने शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के औदही कला गांव में 20 लोगों को दूसरे डोज में दूसरी कंपनी का टीका लगाने के मामले में रिसर्च शुरू कर दी है। टीका लगवाने वाले लोगों को एंटीजन टाइटल हो रहा है। इसमें पता चलेगा कि दूसरी कंपनी की टीका लगने के बाद उनके शरीर में बनने वाले रोग प्रतिरोधक क्षमता पर क्या असर हुआ। आईसीएमआर के दो वैज्ञानिकों समेत पांच सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को गांव में ब्लड सैंपल लिया।
बढ़नी पीएचसी के अंतर्गत गांव के उपकेंद्र में बीते 14 मई को लापरवाही के कारण 20 लोगों को कोवैक्सिन का टीका लगा दिया गया, जबकि उन्हें पहली डोल कोविशिल्ड की लगी थी। उसके बाद यह गांव अचानक चर्चा में आ गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर सचिव अमित मोहन प्रसाद ने आईसीएमआर के डीजी को पत्र भेजकर औदही कलां में स्वास्थ्य कर्मियों के लापरवाही का शिकार हुए लोगों की समुचित जांच करने का निर्देश दिया है। इस दौरान सभी 20 लोगों को एंटीजन सहित कुल सात प्रकार की जांच होगी। टीम ने डिप्टी सीएमओ डॉ. एके आजाद की मौजूदगी में सभी 20 लोगों के खून का सैंपल लिया। आईसीएमआर गोरखपुर की पांच सदस्यीय टीम वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गौरव राज द्विवेदी के नेतृत्व में पहुंची। सबसे पहले टीम ने कोरोना से बचाव के लिए अलग-अलग कंपनियों के दोनों डोज लगवाने वाले औदही कलां के 17, झिंगहा के दो और मानपुर के एक लोग से मुलाकात की। टीम ने ब्लड सैंपल को हीरो कन्वर्जन की जांच के लिए आईसीएमआर के एनआईवी केंद्र पुणे भेजा। आईसीएमआर गोरखपुर के वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि इन 20 लोगों का कुल चार बार आईसीएमआर की टीम जांच कराएगी। दूसरी बार एक माह बाद, तीसरी बार छह माह बाद और फिर एक वर्ष बाद जांच की जाएगी। इस दौरान डिप्टी सीएमओ डॉ. एके आजाद, पीएचसी बढ़नी के एमओआईसी डॉ. धीरेंद्र चौधरी, आईसीएमआर जांच टीम के सदस्य कमलेश, रविशंकर, अमरेंद्र कुमार, रमी, एनएमए जयशंकर दूबे, आशा गायत्री देवी आदि मौजूद रहीं।
तीन स्तर पर होगी जांच
डिप्टी सीएमओ डॉ. एके आजाद ने बताया कि एक सप्ताह बाद फिर आईसीएमआर की टीम गांव में आएगी। पहली बार में दोनों कंपनी के टीके लगवाने का सैंपल लिया गया है। उसके बाद दोनों डोज कोवि शिल्ड और दोनों डोज कोवैक्सीन लगवाने की जांच की जाएगी। उसके बाद पता चलेगा कि किन लोगों के शरीर में ज्यादा रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी है।
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गांव वालों को मिली तसल्ली
मानपुर निवासी नन्दलाल चौधरी ने कहा कि अच्छा लगा,कम से कम स्वास्थ्य विभाग और शासन को हम लोगों की चिंता तो है।औदही कलां निवासी मो.इकराम ने कहा कि जांच टीम खून का सैंपल ले गई है, हमें विभाग पर भरोसा है।औदही कलां निवासी सनेही ने कहा कि एंटीजन जांच के लिए हमारे खून का सैम्पल लिया गया है।हम पूरी तरह स्वस्थ हैं। शासन ने सराहनीय काम किया है। औदही कलां निवासी रामसूरत वरुण ने कहा कि अगर इस ढ़लती उम्र में हम देश के काम आ जाए तो यह हमारे लिए सौभाग्य की बात हैं। क्योंकि ये रिसर्च भावी पीढ़ी के लिए भी उपयोगी होगी।
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दूसरी कंपनी का टीका लगने के मामले में शुरू हुई रिसर्च
टीम ने 20 लोगों के लिया ब्लड सैंपल, होगी रिसर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा (सिद्धार्थनगर)। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) गोरखपुर ने शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के औदही कला गांव में 20 लोगों को दूसरे डोज में दूसरी कंपनी का टीका लगाने के मामले में रिसर्च शुरू कर दी है। टीका लगवाने वाले लोगों को एंटीजन टाइटल हो रहा है। इसमें पता चलेगा कि दूसरी कंपनी की टीका लगने के बाद उनके शरीर में बनने वाले रोग प्रतिरोधक क्षमता पर क्या असर हुआ। आईसीएमआर के दो वैज्ञानिकों समेत पांच सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को गांव में ब्लड सैंपल लिया।
बढ़नी पीएचसी के अंतर्गत गांव के उपकेंद्र में बीते 14 मई को लापरवाही के कारण 20 लोगों को कोवैक्सिन का टीका लगा दिया गया, जबकि उन्हें पहली डोल कोविशिल्ड की लगी थी। उसके बाद यह गांव अचानक चर्चा में आ गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर सचिव अमित मोहन प्रसाद ने आईसीएमआर के डीजी को पत्र भेजकर औदही कलां में स्वास्थ्य कर्मियों के लापरवाही का शिकार हुए लोगों की समुचित जांच करने का निर्देश दिया है। इस दौरान सभी 20 लोगों को एंटीजन सहित कुल सात प्रकार की जांच होगी। टीम ने डिप्टी सीएमओ डॉ. एके आजाद की मौजूदगी में सभी 20 लोगों के खून का सैंपल लिया। आईसीएमआर गोरखपुर की पांच सदस्यीय टीम वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गौरव राज द्विवेदी के नेतृत्व में पहुंची। सबसे पहले टीम ने कोरोना से बचाव के लिए अलग-अलग कंपनियों के दोनों डोज लगवाने वाले औदही कलां के 17, झिंगहा के दो और मानपुर के एक लोग से मुलाकात की। टीम ने ब्लड सैंपल को हीरो कन्वर्जन की जांच के लिए आईसीएमआर के एनआईवी केंद्र पुणे भेजा। आईसीएमआर गोरखपुर के वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि इन 20 लोगों का कुल चार बार आईसीएमआर की टीम जांच कराएगी। दूसरी बार एक माह बाद, तीसरी बार छह माह बाद और फिर एक वर्ष बाद जांच की जाएगी। इस दौरान डिप्टी सीएमओ डॉ. एके आजाद, पीएचसी बढ़नी के एमओआईसी डॉ. धीरेंद्र चौधरी, आईसीएमआर जांच टीम के सदस्य कमलेश, रविशंकर, अमरेंद्र कुमार, रमी, एनएमए जयशंकर दूबे, आशा गायत्री देवी आदि मौजूद रहीं।
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तीन स्तर पर होगी जांच
डिप्टी सीएमओ डॉ. एके आजाद ने बताया कि एक सप्ताह बाद फिर आईसीएमआर की टीम गांव में आएगी। पहली बार में दोनों कंपनी के टीके लगवाने का सैंपल लिया गया है। उसके बाद दोनों डोज कोवि शिल्ड और दोनों डोज कोवैक्सीन लगवाने की जांच की जाएगी। उसके बाद पता चलेगा कि किन लोगों के शरीर में ज्यादा रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी है।
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गांव वालों को मिली तसल्ली
मानपुर निवासी नन्दलाल चौधरी ने कहा कि अच्छा लगा,कम से कम स्वास्थ्य विभाग और शासन को हम लोगों की चिंता तो है।औदही कलां निवासी मो.इकराम ने कहा कि जांच टीम खून का सैंपल ले गई है, हमें विभाग पर भरोसा है।औदही कलां निवासी सनेही ने कहा कि एंटीजन जांच के लिए हमारे खून का सैम्पल लिया गया है।हम पूरी तरह स्वस्थ हैं। शासन ने सराहनीय काम किया है। औदही कलां निवासी रामसूरत वरुण ने कहा कि अगर इस ढ़लती उम्र में हम देश के काम आ जाए तो यह हमारे लिए सौभाग्य की बात हैं। क्योंकि ये रिसर्च भावी पीढ़ी के लिए भी उपयोगी होगी।