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बदहाल सड़कों पर कैसे दौड़े विकास रथ
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:44 PM IST
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महादेव बुजुर्ग व गुलरी के बीच सड़क पर बना गड्ढा।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। सड़कें विकास का सच बयां करती हैं। जिले का विकास भी यहां की सड़कों जैसा ही बदहाल है। गड्ढों ने सड़कों की सूरत बिगाड़ दी है। धूल-मिट्टी का गुबार कोढ़ में खाज साबित हो रहा है। नतीजा विकास का पहिया भी इन सड़कों पर दौड़ने से कतराता है। जिले में सड़कों की यह बदहाली तब है, जब यहां के कई जनप्रतिनिधि शासन-सत्ता में प्रभावशाली पदों पर हैं। सड़कों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और दिया भी तो लूटखसोट से बचाने में नाकाम रहे। गड्ढायुक्त सड़कों में हिचकोले खाते लोगों के लिए बदहाल सड़कें इस चुनाव में मुद्दा बनेंगी।
बात चाहे जिला मुख्यालय से गुजरने वाली सड़कों की करें या फिर सुदूर ग्राम्यांचलों की। हर सड़क की सूरत कमोवेश एक जैसी ही है। गड्ढों में पिच गुम हो चुकी है। कई जगहों पर सड़क जानलेवा स्थिति में है। यही कारण है कि जिले में सड़क हादसों की तादाद लगातार बढ़ रही है। नौगढ़-शोहरतगढ़-बढ़नी-श्रावस्ती नेशनल हाईवे का जिक्र करें तो विभागीय रिकॉर्ड में पिछले दो सालों से यह सड़क बन रही है। निर्माण कहां हो रहा है, किसी को नहीं पता। जिले की सीमा में करीब 65 किमी लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर और गड्ढे में तब्दील है।
निर्माण की कुछ ऐसी ही दशा रुधौली-ककरहवा मार्ग की है। डेढ़ साल पहले यह सड़क बननी शुरू हुई थी, लेकिन निर्माण अधूरा है। गांव-गिरांव की सड़कों की हालत तो इससे भी बदतर है। ऐसा नहीं इन सड़कों के निर्माण के लिए जनता कभी उग्र नहीं हुई। अलबत्ता कई बार आंदोलन हो चुके हैं। नाराज लोगों ने रास्ता भी रोका था, मगर निर्माण तेज कराने की बजाए प्रशासन ने उल्टे उन्हीं पर केस दर्ज करा दिया। बावजूद कोई नेतृत्व उनकी आवाज उठाने नहीं पहुंचा। गड्ढायुक्त सड़कों पर आवागमन की पीड़ा झेलते और जिले के पिछड़ेपन से आजिज लोग चुनाव में इसे मुद्दा बनाकर उछालने की तैयारी में हैं। उनका साफ कहना है कि जो भी दल या प्रत्याशी जिले की सड़कों के उद्धार के लिए सार्थक प्रयास करेगा, जनता उसी के साथ होगी।
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बात चाहे जिला मुख्यालय से गुजरने वाली सड़कों की करें या फिर सुदूर ग्राम्यांचलों की। हर सड़क की सूरत कमोवेश एक जैसी ही है। गड्ढों में पिच गुम हो चुकी है। कई जगहों पर सड़क जानलेवा स्थिति में है। यही कारण है कि जिले में सड़क हादसों की तादाद लगातार बढ़ रही है। नौगढ़-शोहरतगढ़-बढ़नी-श्रावस्ती नेशनल हाईवे का जिक्र करें तो विभागीय रिकॉर्ड में पिछले दो सालों से यह सड़क बन रही है। निर्माण कहां हो रहा है, किसी को नहीं पता। जिले की सीमा में करीब 65 किमी लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर और गड्ढे में तब्दील है।
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निर्माण की कुछ ऐसी ही दशा रुधौली-ककरहवा मार्ग की है। डेढ़ साल पहले यह सड़क बननी शुरू हुई थी, लेकिन निर्माण अधूरा है। गांव-गिरांव की सड़कों की हालत तो इससे भी बदतर है। ऐसा नहीं इन सड़कों के निर्माण के लिए जनता कभी उग्र नहीं हुई। अलबत्ता कई बार आंदोलन हो चुके हैं। नाराज लोगों ने रास्ता भी रोका था, मगर निर्माण तेज कराने की बजाए प्रशासन ने उल्टे उन्हीं पर केस दर्ज करा दिया। बावजूद कोई नेतृत्व उनकी आवाज उठाने नहीं पहुंचा। गड्ढायुक्त सड़कों पर आवागमन की पीड़ा झेलते और जिले के पिछड़ेपन से आजिज लोग चुनाव में इसे मुद्दा बनाकर उछालने की तैयारी में हैं। उनका साफ कहना है कि जो भी दल या प्रत्याशी जिले की सड़कों के उद्धार के लिए सार्थक प्रयास करेगा, जनता उसी के साथ होगी।
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