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अधिवक्ताओं ने उड़ाया गुलाल और गले मिले
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 19 Mar 2016 11:31 PM IST
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सिद्धार्थनगर में आयोजित कवि सम्मेलन में मौजूद वकील।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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होली का रंग सब पर चढने लगा है। इससे अधिवक्ता भी अछूते नहीं रहे। शनिवार को दीवानी कचहरी में कानून विदें ने दिन भर के तनाव को दूर करते हुए जमकर मस्ती किया। अबीर-गुलाल से एक दूसरे को सराबोर कर गले मिले। कवि सम्मेलन चकल्लस, होली की हुडदंग में गंगा जमुनी तहजीब की धारा प्रवाहित किया।
मुख्य अतिथि सांसद जगदबिंका पाल ने शांति पूर्वक होली को मनाने के लिए कहा। अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह ने अधिवक्ताओं ने कहा कि होली में प्यार के रंग को भरे। कवि सम्मेलन में एडवोकेट शादाब शब्बीर ने स्वरचित रचना, आएगी ईद आपको सेवंई खिलाऊंगा, पहले ये शर्त है हमें गुझिया खिलाइए से त्यौहार का मिठास घोलने के साथ ही गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाया।
पंकज सिंह ने रचना बसंत बहार आया है, मिलन मधुमास आया है, बहकता है बहकने दो, ऋतुराज आया है, रचना में लोगों की तालियां बटोरी। हमदम शिवानी ने जबसे देखा है ख्वाब में तुमको, मेरे घर में बहुत उजाला है, फाल्गुन मास का वर्णन किया।
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डा. फजलुर्रहम ने किस का हंसने का जी नहीं करता, कौन दुनिया में दिलफेगार नहीं सुनाया। नियाज कपिलवस्तुवी ने रचना के माध्यम से दूरियां मिटाने का संदेश दिया। रंग लगाए, रंग लगाए होली में, अपना असली रंग दिखाए होली में को सुनाया और लोगों को सोचने के साथ ही ठहाका लगाने को मजबूर किया।
मंजर अब्बास रिजवी ने होली के दिन नशा करने वालों पर कटाक्ष किया और सुनाया ये कैसा आंखों को मंजर दिखाई देता है, नशे में नाला समंदर दिखाई देता है। डा. नौशाद आजमी ने जमाने की ये चाहत है तेरी यादे मिटा दू मैं, तेरी यादें मिटा कर मैं जिंदा नहीं रह सकता सुनाया।
डा. जावेद कमाल ने गंगा में नहा कर कितनों ने पाप धोया, जमुना में वुजू करके हमने भी सर को झुकाया है सुनाकर लोगों को आजके माहौल पर सोचने का मजबूर किया। जावेद सरवर ने आज के हालात पर बनाई रचना जब भी कमाने कोई भी परदेश गया, गांव की याद दिलाने आई है होली, को सुनाया। कार्यक्रम की शुरूआत स्थानीय कलाकार माटी का धोधा ने सरस्वती वंदना से किया।
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मुख्य अतिथि सांसद जगदबिंका पाल ने शांति पूर्वक होली को मनाने के लिए कहा। अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह ने अधिवक्ताओं ने कहा कि होली में प्यार के रंग को भरे। कवि सम्मेलन में एडवोकेट शादाब शब्बीर ने स्वरचित रचना, आएगी ईद आपको सेवंई खिलाऊंगा, पहले ये शर्त है हमें गुझिया खिलाइए से त्यौहार का मिठास घोलने के साथ ही गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाया।
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पंकज सिंह ने रचना बसंत बहार आया है, मिलन मधुमास आया है, बहकता है बहकने दो, ऋतुराज आया है, रचना में लोगों की तालियां बटोरी। हमदम शिवानी ने जबसे देखा है ख्वाब में तुमको, मेरे घर में बहुत उजाला है, फाल्गुन मास का वर्णन किया।
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डा. फजलुर्रहम ने किस का हंसने का जी नहीं करता, कौन दुनिया में दिलफेगार नहीं सुनाया। नियाज कपिलवस्तुवी ने रचना के माध्यम से दूरियां मिटाने का संदेश दिया। रंग लगाए, रंग लगाए होली में, अपना असली रंग दिखाए होली में को सुनाया और लोगों को सोचने के साथ ही ठहाका लगाने को मजबूर किया।
मंजर अब्बास रिजवी ने होली के दिन नशा करने वालों पर कटाक्ष किया और सुनाया ये कैसा आंखों को मंजर दिखाई देता है, नशे में नाला समंदर दिखाई देता है। डा. नौशाद आजमी ने जमाने की ये चाहत है तेरी यादे मिटा दू मैं, तेरी यादें मिटा कर मैं जिंदा नहीं रह सकता सुनाया।
डा. जावेद कमाल ने गंगा में नहा कर कितनों ने पाप धोया, जमुना में वुजू करके हमने भी सर को झुकाया है सुनाकर लोगों को आजके माहौल पर सोचने का मजबूर किया। जावेद सरवर ने आज के हालात पर बनाई रचना जब भी कमाने कोई भी परदेश गया, गांव की याद दिलाने आई है होली, को सुनाया। कार्यक्रम की शुरूआत स्थानीय कलाकार माटी का धोधा ने सरस्वती वंदना से किया।