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Siddharthnagar News: भक्त प्रह्लाद की तरह रखें ईश्वर पर विश्वास
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-भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र में चल रही है श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। हर मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए, कि वह हर समय हर जगह है। उक्त विचार क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार की रात कथा वाचक राकेश शास्त्री ने प्रवचन करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि हिरणाकश्यप ब्राह्मा जी के वरदान के कारण मद में आ गया और खुद को भगवान मानने लगा। उनकी पत्नी कयाधु के चार पुत्रों में सबसे छोटे बेटा प्रह्लाद पिता व भाइयों से अलग विष्णुजी का भक्त था, उनके पिता हिरणाकश्यप पूरे राज्य में खुद को भगवान होने की घोषणा कर भगवान विष्णु की पूजा बंद करा दी, मगर प्रह्लाद ने पिता को भगवान मानने से इनकार कर दिया। इस पर हिरणाकश्यप ने अपने गुरु संडमृग से प्रह्लाद को पढ़ाने के साथ ही विष्णु के प्रति नफरत पैदा करने का अनुरोध किया। काफी प्रयास के बाद भी गुरु जी से अलग प्रह्लाद भगवान विष्णु को ही अपना आराध्य मानते थे। हिरणाकश्यप प्रह्लाद को अपना शत्रु मान कर उन्हें मारने के लिए तरह-तरह के उपाय करने लगा। हर जगह असफल होने पर खुद खंभे में बांध तलवार लेकर मारने चला, और कहा बुलाओ अपने भगवान को प्रह्लाद की पुकार सुन भगवान ब्रह्मा के वरदान के कारण भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण कर हिरणाकश्यप का अंत किया।
इस दौरान गायत्री प्रसाद मिश्र, इंद्रावती देवी, पं. केशवानंद त्रिपाठी, आचार्य अमित पांडेय, पं. शिवपूजन दूबे, पं. राजन शास्त्री, महंथ मिश्र, डॉ. रमेश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। हर मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए, कि वह हर समय हर जगह है। उक्त विचार क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार की रात कथा वाचक राकेश शास्त्री ने प्रवचन करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि हिरणाकश्यप ब्राह्मा जी के वरदान के कारण मद में आ गया और खुद को भगवान मानने लगा। उनकी पत्नी कयाधु के चार पुत्रों में सबसे छोटे बेटा प्रह्लाद पिता व भाइयों से अलग विष्णुजी का भक्त था, उनके पिता हिरणाकश्यप पूरे राज्य में खुद को भगवान होने की घोषणा कर भगवान विष्णु की पूजा बंद करा दी, मगर प्रह्लाद ने पिता को भगवान मानने से इनकार कर दिया। इस पर हिरणाकश्यप ने अपने गुरु संडमृग से प्रह्लाद को पढ़ाने के साथ ही विष्णु के प्रति नफरत पैदा करने का अनुरोध किया। काफी प्रयास के बाद भी गुरु जी से अलग प्रह्लाद भगवान विष्णु को ही अपना आराध्य मानते थे। हिरणाकश्यप प्रह्लाद को अपना शत्रु मान कर उन्हें मारने के लिए तरह-तरह के उपाय करने लगा। हर जगह असफल होने पर खुद खंभे में बांध तलवार लेकर मारने चला, और कहा बुलाओ अपने भगवान को प्रह्लाद की पुकार सुन भगवान ब्रह्मा के वरदान के कारण भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण कर हिरणाकश्यप का अंत किया।
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इस दौरान गायत्री प्रसाद मिश्र, इंद्रावती देवी, पं. केशवानंद त्रिपाठी, आचार्य अमित पांडेय, पं. शिवपूजन दूबे, पं. राजन शास्त्री, महंथ मिश्र, डॉ. रमेश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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