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Siddharthnagar News: दस्ताने कर्बला देती है इंसानियत का पैगाम
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डुमरियागंज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित अंजुमन गुलदस्ता मातम के सालाना अशरे की दूसरी मजलिस को दिल्ली से आए मौलाना कल्बे रुशैद ने किया संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलम गीर सानी इमामबाड़े में अंजुमन गुलदस्ता मातम की ओर से आयोजित सालाना अशरे की दूसरी मजलिस शनिवार रात में हुई। इसमें दिल्ली से आए मौलाना कल्बे रुशैद ने संबोधित कर दीन इस्लाम और वाकयाते कर्बला पर विस्तार से रोशनी डाली।
मौलाना ने कहा कि मजलिसे आदमी को इंसान बनाती है और उसे नेकी, सच्चाई, भलाई के रास्ते पर चलने की सीख देती है। अगर इंकलाब देखना चाहते हो तो कर्बला चलो, देखो गुनहगार आया हुर बन गया। नूह की कश्ती में जो चढ़ा, वहीं उतरा, यानी बदलाव नहीं हुआ, लेकिन कर्बला में बदलाव हुआ इंकलाब बंद कमरे में नहीं आता, इंकलाब देखना है तो कर्बला देखो, इंकलाब बदलाव को कहते हैं।
उन्होंने कहा कि जिसे इंसानियत समझ नहीं आ सकती, उसे हुसैनियत नहीं समझ में आ सकती। इंसान को जिंदगी मिली है वो दूसरों के काम आने के लिए है। मजलूमों का ख्याल रखो भूखों को खाना खिलाओ, हक का साथ दो जालिमों के खिलाफ खड़े हो जाओ, नमाज कायम करोए कुरआन की तिलावत करो, दस्ताने कर्बला हमें यही सिखाती हैस मौलाना ने मजलिस के आखिर में कर्बला वालों के मासायब को बयां किया। मजलिस से पूर्व खुर्शीद अहमद और उनके सहयोगी ने मर्सिया पढ़ा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलम गीर सानी इमामबाड़े में अंजुमन गुलदस्ता मातम की ओर से आयोजित सालाना अशरे की दूसरी मजलिस शनिवार रात में हुई। इसमें दिल्ली से आए मौलाना कल्बे रुशैद ने संबोधित कर दीन इस्लाम और वाकयाते कर्बला पर विस्तार से रोशनी डाली।
मौलाना ने कहा कि मजलिसे आदमी को इंसान बनाती है और उसे नेकी, सच्चाई, भलाई के रास्ते पर चलने की सीख देती है। अगर इंकलाब देखना चाहते हो तो कर्बला चलो, देखो गुनहगार आया हुर बन गया। नूह की कश्ती में जो चढ़ा, वहीं उतरा, यानी बदलाव नहीं हुआ, लेकिन कर्बला में बदलाव हुआ इंकलाब बंद कमरे में नहीं आता, इंकलाब देखना है तो कर्बला देखो, इंकलाब बदलाव को कहते हैं।
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उन्होंने कहा कि जिसे इंसानियत समझ नहीं आ सकती, उसे हुसैनियत नहीं समझ में आ सकती। इंसान को जिंदगी मिली है वो दूसरों के काम आने के लिए है। मजलूमों का ख्याल रखो भूखों को खाना खिलाओ, हक का साथ दो जालिमों के खिलाफ खड़े हो जाओ, नमाज कायम करोए कुरआन की तिलावत करो, दस्ताने कर्बला हमें यही सिखाती हैस मौलाना ने मजलिस के आखिर में कर्बला वालों के मासायब को बयां किया। मजलिस से पूर्व खुर्शीद अहमद और उनके सहयोगी ने मर्सिया पढ़ा।
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