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Siddharthnagar News: आज कराएं बीमा...सर्वे होते ही मिलेगा मुआवजा
Tue, 23 Jul 2024 03:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 23 Jul 2024 03:17 AM IST
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बाढ़ में फसल गंवाने वाले अधिक से अधिक किसानों को लाभ दिलाने के लिए शुरू हुई कवायद
जिलाधिकारी ने सर्वे के बजाए गांव-गांव अभियान चलाकर बीमा कराने पर दिया जोर
कृषि विभाग अधिक से अधिक किसानों का कराएगा फसल बीमा, मिलेगा नुकसान का मुआवजा
डुमरियागंज, शोहरतगढ़ तहसील सबसे अधिक रहा है प्रभावित
आपदा, कृषि विभाग कर रहा है नुकसान का सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए अच्छी खबर है। पहले बीमा कराएं और फिर बाढ़ से क्षति हुई फसल का मुआवजा लें। अधिक से अधिक किसानों को बाढ़ से नष्ट फसलों के नुकसान का लाभ मिल सके। इसके लिए बीमा कराने पर प्रशासन जोर दे रहा है। क्योंकि जितना अधिक बीमा होगा, उतने किसानों को आसानी से मुआवजा राशि मिल सकेगी।
बाढ़ में नुकसान को देखते हुए सीडीओ ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि गांव-गांव में कैंप लगाकर किसानों को बीमा करें। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर बीमा कराएं। ऐसे में योजना का लाभ लेने के लिए खुद आने और बीमा कराने की जरूरत। वहीं, तहसील प्रशासन नुकसान के सर्वे में लगा हुआ है। अभी तक केवल डुमरियागंज तहसील में लगभग 55 हजार बीघा फसल नष्ट होने की बात सामने आ चुकी है। जबकि चार तहसीलों की रिपोर्ट आना शेष है। इसमें भी शोहरतगढ़ भारी नुकसान हुआ है।
नेपाल में भारी बारिश के बाद डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में राप्ती और शोहरतगढ़ क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती, बानगांगा और घोराही नदी में आए सैलाब से नदियों एक लगभग 12 दिन से तक खतरे से ऊपर बहने लगी। यही नदी आगे बढ़ी तो इटवा, बांसी को प्रभावित की और उधर नौगढ़ तहसील को प्रभावित किया। 300 से अधिक गांव बाढ़ से अधिक प्रभावित थे। जबकि, 150 गांव मैरुंड हो गए थे। संपर्क मार्ग कटा, दुश्वारी हुई। इन सबके बीच धान की फसलों को बहुत नुकसान हुआ।
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कई दिनों तक पानी भरा होने के कारण धान की फसल नष्ट हो गई। प्रशासन की ओर से किसानों को राहत दिलाए जाने के लिए सर्वे का कार्य शुरू कर किया है। इसी बीच किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत नुकसान हो चुके फसलों को बीमा कराकर नुकसान देने की प्रक्रिया शुरू की है। बसर्ते बाढ़ प्रभावित किसानों को फसल का बीमा कराना होगा। बीमा गांव- गांव कैंप लगाकर किया जाएगा। इस संबंध में सीडीओ की ओर से कृषि विभाग को निर्देश देकर बीमा कंपनी से बीमा कराने के लिए कहा गया है।
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बीमा होगा, तभी मिलेगा मुआवजा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित है। इसके तहत खरीफ सीजन 2024 के लिए यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को नामित किया गया है। प्रशासन के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से व्यापक क्षेत्रफल पर बाढ़ का प्रभाव है जिससे काफी मात्रा में फसल की क्षति हुई है। फसल की क्षति पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्राविधानों के अनुसार किसानों की फसल का बीमा कराया जाना अनिवार्य है। जनपद में फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि कृषि विभाग के कर्मचारी एवं कामन सर्विस सेंटर के कर्मचारी द्वारा बाढ़ प्रभावित ग्रामों में शिविर के माध्यम से फसल बीमा कराया जा रहा है। किसान अपनी फसल का बीमा 31 जुलाई 2024 तक करा सकते हैं। इससे किसानों को लाभ मिलेगा।
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इतने की बीमा राशि, इतना मिलेगा लाभ
फसल बीमित होने पर किसी तरह की प्राकृतिक आपदा आने पर किसानों की आर्थिक क्षति नहीं होगी। योजना के अंतर्गत फसलों को क्षति होने की स्थिति में बीमित कृषकों को बीमा कवर क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाता है। जनपद में खरीफ मौसम के लिए अधिसूचित धान की फसल के लिए क्षतिपूर्ति धनराशि 86200 रुपये प्रति हेक्टेयर के सापेक्ष कृषक अंश प्रीमियम धनराशि 1724 रुपये प्रति हेक्टेयर है।
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इस प्रकार से करा सकेंगे बीमा
गैर ऋणी कृषक अपना मोबाइल नंबर आधार कार्ड, फसल बुआई का घोषणा पत्र, खतौनी की नकल, बैंक खाते का विवरण, आईएफ एससी कोड के साथ आयोजित होने वाले शिविर में निकट के कामन सर्विस सेंटर अथवा बैंक शाखा से फसल पर देय प्रीमियम अंश को जमा करते हुए अपनी फसल का बीमा 31 जुलाई 2024 तक करा सकते हैं। यदि फसल की क्षति किसी दैवीय आपदा से होती है तो टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर अपनी सूचना दर्ज करा सकते हैं।
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दो तहसीलों में हुआ इतना नुकसान
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ से 6158 हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ है। यानी लगभग 55 हजार बीघा रकबा नष्ट हो गया। वहीं, शोहरतगढ़ तहसील की बात करें तो यहां 5100 हेक्टयर फसल नुकसान होने की पुष्टि हुई है। कुल लगभग 45 हजार बीघा फसल नष्ट हुआ है। जबकि, इटवा, बांसी और नौगढ़ तहसील में भी नुकसान हुआ है, जिसकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। इन दोनों की तहसीलों की तुलना में कुछ कम रकबे का नुकसान हुआ है।
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बोले किसान
हमने पूरी धान की रोपाई कर दी थी। फसल बीमा कराने के लिए सोचा था। मगर इसी बीच आए बाढ़ ने फसल नष्ट कर दिया। बाढ़ खत्म होने के एक सप्ताह बाद भी नुकसान का सर्वे नहीं हुआ और न ही अभी मुआवजा राशि मिलने की संभावना दिख रही है।
-ललाऊ पांडेय, तेनुई
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घर की पूंजी लगाकर धान की रोपाई कराई थी। रोपाई के पांचवें दिन राप्ती के बाढ़ ने पूरी फसल को डूबा कर सड़ा दिया। जिसका फसल बीमा भी नहीं करा पाया था। अगर नुकसान हुए फसल का सर्वे करा कर कुछ सहायता मिल जाता तो दुबारा रोपाई कर देता।
-नजीमुद्दीन, जुड़वनियां
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बोले जिम्मेदार
बाढ़ से नुकसान हुए फसलों का सर्वे टीम की ओर से किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कृषि विभाग के सहयोग से नामित बीमा कंपनी गांव-गांव शिविर लगाकर बीमा करेगी। अधिक से अधिक किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा करवा लें, जिससे उन्हें क्षति का लाभ मिल सके।
-जयेंद्र कुमार, सीडीओ
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जिलाधिकारी ने सर्वे के बजाए गांव-गांव अभियान चलाकर बीमा कराने पर दिया जोर
कृषि विभाग अधिक से अधिक किसानों का कराएगा फसल बीमा, मिलेगा नुकसान का मुआवजा
डुमरियागंज, शोहरतगढ़ तहसील सबसे अधिक रहा है प्रभावित
आपदा, कृषि विभाग कर रहा है नुकसान का सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए अच्छी खबर है। पहले बीमा कराएं और फिर बाढ़ से क्षति हुई फसल का मुआवजा लें। अधिक से अधिक किसानों को बाढ़ से नष्ट फसलों के नुकसान का लाभ मिल सके। इसके लिए बीमा कराने पर प्रशासन जोर दे रहा है। क्योंकि जितना अधिक बीमा होगा, उतने किसानों को आसानी से मुआवजा राशि मिल सकेगी।
बाढ़ में नुकसान को देखते हुए सीडीओ ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि गांव-गांव में कैंप लगाकर किसानों को बीमा करें। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर बीमा कराएं। ऐसे में योजना का लाभ लेने के लिए खुद आने और बीमा कराने की जरूरत। वहीं, तहसील प्रशासन नुकसान के सर्वे में लगा हुआ है। अभी तक केवल डुमरियागंज तहसील में लगभग 55 हजार बीघा फसल नष्ट होने की बात सामने आ चुकी है। जबकि चार तहसीलों की रिपोर्ट आना शेष है। इसमें भी शोहरतगढ़ भारी नुकसान हुआ है।
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नेपाल में भारी बारिश के बाद डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में राप्ती और शोहरतगढ़ क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती, बानगांगा और घोराही नदी में आए सैलाब से नदियों एक लगभग 12 दिन से तक खतरे से ऊपर बहने लगी। यही नदी आगे बढ़ी तो इटवा, बांसी को प्रभावित की और उधर नौगढ़ तहसील को प्रभावित किया। 300 से अधिक गांव बाढ़ से अधिक प्रभावित थे। जबकि, 150 गांव मैरुंड हो गए थे। संपर्क मार्ग कटा, दुश्वारी हुई। इन सबके बीच धान की फसलों को बहुत नुकसान हुआ।
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कई दिनों तक पानी भरा होने के कारण धान की फसल नष्ट हो गई। प्रशासन की ओर से किसानों को राहत दिलाए जाने के लिए सर्वे का कार्य शुरू कर किया है। इसी बीच किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत नुकसान हो चुके फसलों को बीमा कराकर नुकसान देने की प्रक्रिया शुरू की है। बसर्ते बाढ़ प्रभावित किसानों को फसल का बीमा कराना होगा। बीमा गांव- गांव कैंप लगाकर किया जाएगा। इस संबंध में सीडीओ की ओर से कृषि विभाग को निर्देश देकर बीमा कंपनी से बीमा कराने के लिए कहा गया है।
बीमा होगा, तभी मिलेगा मुआवजा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित है। इसके तहत खरीफ सीजन 2024 के लिए यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को नामित किया गया है। प्रशासन के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से व्यापक क्षेत्रफल पर बाढ़ का प्रभाव है जिससे काफी मात्रा में फसल की क्षति हुई है। फसल की क्षति पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्राविधानों के अनुसार किसानों की फसल का बीमा कराया जाना अनिवार्य है। जनपद में फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि कृषि विभाग के कर्मचारी एवं कामन सर्विस सेंटर के कर्मचारी द्वारा बाढ़ प्रभावित ग्रामों में शिविर के माध्यम से फसल बीमा कराया जा रहा है। किसान अपनी फसल का बीमा 31 जुलाई 2024 तक करा सकते हैं। इससे किसानों को लाभ मिलेगा।
इतने की बीमा राशि, इतना मिलेगा लाभ
फसल बीमित होने पर किसी तरह की प्राकृतिक आपदा आने पर किसानों की आर्थिक क्षति नहीं होगी। योजना के अंतर्गत फसलों को क्षति होने की स्थिति में बीमित कृषकों को बीमा कवर क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाता है। जनपद में खरीफ मौसम के लिए अधिसूचित धान की फसल के लिए क्षतिपूर्ति धनराशि 86200 रुपये प्रति हेक्टेयर के सापेक्ष कृषक अंश प्रीमियम धनराशि 1724 रुपये प्रति हेक्टेयर है।
इस प्रकार से करा सकेंगे बीमा
गैर ऋणी कृषक अपना मोबाइल नंबर आधार कार्ड, फसल बुआई का घोषणा पत्र, खतौनी की नकल, बैंक खाते का विवरण, आईएफ एससी कोड के साथ आयोजित होने वाले शिविर में निकट के कामन सर्विस सेंटर अथवा बैंक शाखा से फसल पर देय प्रीमियम अंश को जमा करते हुए अपनी फसल का बीमा 31 जुलाई 2024 तक करा सकते हैं। यदि फसल की क्षति किसी दैवीय आपदा से होती है तो टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर अपनी सूचना दर्ज करा सकते हैं।
दो तहसीलों में हुआ इतना नुकसान
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ से 6158 हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ है। यानी लगभग 55 हजार बीघा रकबा नष्ट हो गया। वहीं, शोहरतगढ़ तहसील की बात करें तो यहां 5100 हेक्टयर फसल नुकसान होने की पुष्टि हुई है। कुल लगभग 45 हजार बीघा फसल नष्ट हुआ है। जबकि, इटवा, बांसी और नौगढ़ तहसील में भी नुकसान हुआ है, जिसकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। इन दोनों की तहसीलों की तुलना में कुछ कम रकबे का नुकसान हुआ है।
बोले किसान
हमने पूरी धान की रोपाई कर दी थी। फसल बीमा कराने के लिए सोचा था। मगर इसी बीच आए बाढ़ ने फसल नष्ट कर दिया। बाढ़ खत्म होने के एक सप्ताह बाद भी नुकसान का सर्वे नहीं हुआ और न ही अभी मुआवजा राशि मिलने की संभावना दिख रही है।
-ललाऊ पांडेय, तेनुई
घर की पूंजी लगाकर धान की रोपाई कराई थी। रोपाई के पांचवें दिन राप्ती के बाढ़ ने पूरी फसल को डूबा कर सड़ा दिया। जिसका फसल बीमा भी नहीं करा पाया था। अगर नुकसान हुए फसल का सर्वे करा कर कुछ सहायता मिल जाता तो दुबारा रोपाई कर देता।
-नजीमुद्दीन, जुड़वनियां
बोले जिम्मेदार
बाढ़ से नुकसान हुए फसलों का सर्वे टीम की ओर से किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कृषि विभाग के सहयोग से नामित बीमा कंपनी गांव-गांव शिविर लगाकर बीमा करेगी। अधिक से अधिक किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा करवा लें, जिससे उन्हें क्षति का लाभ मिल सके।
-जयेंद्र कुमार, सीडीओ