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मेहनत के बल पर परिवार को समृद्ध बना रहीं गायत्री

Sun, 18 Oct 2020 10:15 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 10:15 PM IST
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Gayatri became insipiration
मेहनत के बल पर परिवार को समृद्ध बना रही गायत्री वाली खबर में.. गायत्री देवी। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
मेहनत के बल पर परिवार को समृद्ध बना रहीं गायत्री
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आर्थिक तंगी से निजात पाने को कामकाज करने की ठानी, प्रेरणास्रोत बनीं
पति के ई-रिक्शा का ऋण चुकता किया, मास्क बिक्री से पचास हजार कमाया
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। महिलाएं न सिर्फ आर्थिक स्थिति को सुधार रहीं बल्कि अपनी मेहनत के बल पर परिवार का पालन-पोषण भी कर रही हैं। कुछ ऐसा ही कार्य करके मिसाल पेश कर रही हैं सदर ब्लॉक के महनगा गांव की गायत्री देवी। गायत्री अपने हुनर के बल पर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हुए क्षेत्र की काफी लड़कियों और महिलाओं को गुणी भी बना रही हैं।
शहर से सटे गांव महनगा में गायत्री की अमित से शादी हुई तो उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए उन्होंने कामकाज करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह के गठन में रुचि दिखाई। ज्योति स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जुड़कर उन्होंने सर्वप्रथम पति की ओर से ई-रिक्शा का छह माह का ऋण चुकता किया। इसके बाद कोरोना काल का दौर शुरू हुआ तो पति की भी कमाई बंद हो गई। इससे परेशान गायत्री ने ब्लॉक और जिला स्तरीय अफसरों के उत्साहवर्धन से मास्क बनाना शुरू कर दिया। कोरोना काल में कलेक्ट्रेट, विकास भवन समेत अन्य सरकारी कार्यालयों में मास्क की बिक्री की। इससे पचास हजार रुपये की कमाई की। दो बेटियों और एक बेटे की मां गायत्री देवी से गांव की महिलाएं पहले अनमने ढंग से बात किया करती थीं, पर अब उनका आर्थिक स्वावलंबन देखकर उनसे सीखने को लालायित रहती हैं। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पहले से घर में ही चल रही किराने की दुकान में पूूंजी लगाई। आज स्थिति यह है कि किराने की दुकान से परिवार का जीविकोपार्जन बेहतर ढंग से चल रहा है। धीरे-धीरे गांव की लड़कियां, महिलाएं भी आर्थिक रूप से आगे बढ़ रही हैं।
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बच्चियों को बेहतर पढ़ाई का लक्ष्य
महनगा गांव की गायत्री देवी कहती हैं कि बड़ी बेटी 12 वर्ष, दूसरी 11 वर्ष और बेटा आठ वर्ष का है। अभी तीनों एक हिंदी माध्यम से संचालित स्कूलों में नामांकित हैं। आर्थिक स्थिति सुधरने की दिशा में भविष्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ाने का लक्ष्य है।
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