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Siddharthnagar News: सिद्धार्थनगर समेत मंडल में छह स्थानों पर बनेंगे एफएसटीपीफ
Wed, 20 May 2026 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 20 May 2026 01:59 AM IST
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बस्ती। मंडल में पहली बार शासन ने छह एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) मंजूर किए हैं। इनका निर्माण पर करीब छह करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनसे बस्ती मंडल वासियों को सेप्टिक टैंक खाली कराने की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा।
वहीं, इसके लिए अब तक जमीन न तलाश पाने पर कमिश्नर बस्ती मंडल अखिलेश सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अब तीनों जिले के डीएम को पत्र भेजकर जल्द जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
स्वच्छ भारत मिशन फेज तृतीय के अंतर्गत बस्ती जनपद में दो एफएसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। इसी तरह सिद्धार्थनगर में दो और संतकबीरनगर में भी दो प्लांट बनाए जाएंगे। बताया गया कि जमीन तलाशने के लिए 10 माह पहले आदेश जारी हुआ था, मगर अभी तक भूमि चिह्नित नहीं की जा सकी है। इस पर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए बताया गया कि प्रत्येक प्लांट की क्षमता 10 केएलडी होगी। इनका निर्माण उन गांवों की जमीन पर कराया जाएगा, जहां से जिले के सभी 14 ब्लॉक कवर किए जा सकें।
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इनका निर्माण कराने के लिए जलभराव रहित और ठोस जमीन चाहिए। प्रदूषण की संभावना खत्म करने के लिए जिन गांवों में भूजल स्तर काफी नीचे होगा, वहां इनका निर्माण होगा। आबादी क्षेत्र से 250 से 500 मीटर दूरी पर इनका निर्माण होगा ताकि लोगों को दुर्गंध, शोर तथा संक्रमण की समस्या का सामना न करना पड़े। एफएसटीपी के संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली और पांच हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। इसका फायदा ग्रामीणों को होगा क्योंकि सेप्टिक टैंक खाली कराकर मल निस्तारण की सुविधा मिल सकेगी।
बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के निदेशक अमित कुमार सिंह ने डीपीआरओ को पत्र भेजकर मंजूर किए दोनों ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन चिह्नित कर 30 जून 2025 तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। वहीं, पत्र आने के 10 माह बीत जाने के बाद भी भूमि न मिलने पर आयुक्त ने नराजगी जताई।
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वहीं, इसके लिए अब तक जमीन न तलाश पाने पर कमिश्नर बस्ती मंडल अखिलेश सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अब तीनों जिले के डीएम को पत्र भेजकर जल्द जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
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स्वच्छ भारत मिशन फेज तृतीय के अंतर्गत बस्ती जनपद में दो एफएसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। इसी तरह सिद्धार्थनगर में दो और संतकबीरनगर में भी दो प्लांट बनाए जाएंगे। बताया गया कि जमीन तलाशने के लिए 10 माह पहले आदेश जारी हुआ था, मगर अभी तक भूमि चिह्नित नहीं की जा सकी है। इस पर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए बताया गया कि प्रत्येक प्लांट की क्षमता 10 केएलडी होगी। इनका निर्माण उन गांवों की जमीन पर कराया जाएगा, जहां से जिले के सभी 14 ब्लॉक कवर किए जा सकें।
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इनका निर्माण कराने के लिए जलभराव रहित और ठोस जमीन चाहिए। प्रदूषण की संभावना खत्म करने के लिए जिन गांवों में भूजल स्तर काफी नीचे होगा, वहां इनका निर्माण होगा। आबादी क्षेत्र से 250 से 500 मीटर दूरी पर इनका निर्माण होगा ताकि लोगों को दुर्गंध, शोर तथा संक्रमण की समस्या का सामना न करना पड़े। एफएसटीपी के संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली और पांच हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। इसका फायदा ग्रामीणों को होगा क्योंकि सेप्टिक टैंक खाली कराकर मल निस्तारण की सुविधा मिल सकेगी।
बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के निदेशक अमित कुमार सिंह ने डीपीआरओ को पत्र भेजकर मंजूर किए दोनों ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन चिह्नित कर 30 जून 2025 तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। वहीं, पत्र आने के 10 माह बीत जाने के बाद भी भूमि न मिलने पर आयुक्त ने नराजगी जताई।