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Siddharthnagar Flood: सैलाब का सितम जारी, मच्छरों के साथ कट रही रात

Fri, 21 Oct 2022 04:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 21 Oct 2022 04:01 PM IST
सार

सैलाब में फंसे लोगों की चिंता उनके अपनों को सताती है तो पुरसाहाल लेने का एक मात्र सहारा मोबाइल ही नजर आता है। बिजली गुल होने से सबसे बढ़ी समस्या मोबाइल चार्ज न हो पाने की है। ऐसे में लोग अपनों का हालचाल तक ले पाने के लिए तरस रहे हैं।

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Flood continues, night is cutting with mosquitoes
धनोहरा पेंड़ारी मुस्तहकम के सड़क पर बाढ़ में पानी में आवागमन करते ग्रामीण। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR

विस्तार

सिद्धार्थनगर जिले के बाढ़ प्रभावित सैकड़ों गांवों में अब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है। पावर स्टेशनों में पानी भर जाने के कारण लोगों की रात अंधेरे में बीत रही है। चारों तरफ से पानी से घिरे होने के साथ स्याह रात ने पीड़ितों की परेशानी और भी बढ़ा दी है।

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नदियों में आए सैलाब में अपना सब कुछ गवां चुके लोगों की जीवन की गाड़ी अब भी पटरी पर नहीं लौट रही है। एक पखवारे से बाढ़ की त्रासदी झेल रहे लोगों पर सैलाब का सितम जारी है और राप्ती तथा बूढ़ी राप्ती खतरे के निशान से नीचे आने का नाम नहीं ले रही है। नदियों के किनारे बसे गांव, निचले क्षेत्र और कछार के इलाके पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 566 हो गई है।
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जिले में वीरपुर एहतमाली, भरवठिया, सूपा राजा, नगवां, तनेजवा, रीवा नानकार, खैरी शीतलगढ़ आदि दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां केवल नाव के जरिए आवागमन हो रहा है। इस विकट स्थिति में जीवन यापन कर रहे पीड़ितों को बिजली भी मयस्सर नहीं हो रही है। बाढ़ से घिरे गांवों में रात के अंधेरे की बीच जी रहे लोग डरे और सहमे हुए हैं।
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एक ओर उन्हें जहां जहरीले जलीय जीवों का खतरा बना हुआ है, वहीं खुली जगहों पर सोने की वजह से मच्छरों का प्रकोप इस कदर है कि पूरी रात जग-जग कर बीत रही है। प्रभावित गांवों में मच्छरों से बचाव के लिए न तो मच्छरदानी प्रयाप्त संख्या में लोगों के पास है और न ही उससे बचने के लिए दवाओं का छिड़काव संभव हो पा रहा है।

 

संक्रामक बीमारियों का खतरा

 बाढ़ के बाद आमतौर पर संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पानी से घिरे होने के कारण अपना घर छोड़कर खुली जगहों पर रहने की वजह से मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पीड़ितों के पास पर्याप्त मच्छरदानी नहीं है और खुले जगहों पर मच्छर भगाने वाले क्वाइल काम नहीं कर रहा है। डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच मच्छरों के बीच रहने को मजबूर लोगों में मच्छरजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है।

बंद मोबाइल ने अपनों से बढ़ाई दूरी
सैलाब में फंसे लोगों की चिंता उनके अपनों को सताती है तो पुरसाहाल लेने का एक मात्र सहारा मोबाइल ही नजर आता है। बिजली गुल होने से सबसे बढ़ी समस्या मोबाइल चार्ज न हो पाने की है। ऐसे में लोग अपनों का हालचाल तक ले पाने के लिए तरस रहे हैं। गांव में किसी के घर सोलर प्लेट लगा है तो वहां मोबाइल चार्ज करने के लिए मारामारी मची हुई है। कई जगहों पर लोगों ने चंदा लगाकर जनरेटर के जरिए मोबाइल चार्ज करने का रास्ता निकाला है।

उजाले के लिए मोमबत्ती ही सहारा
सिद्धार्थनगर। बिजली कटने से बाढ़ प्रभावित गांवों में अंधेरा है। रात के समय खाना बनाने और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए लोगों की सारी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। केरोसिन की सप्लाई बंद होने से गांवों में लालटेन, ढिबरी आदि उजाला करने के साधन पहले ही बंद हो चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में चल रही छोटी-मोटी दुकानों पर मोमबत्ती नहीं मिल पा रही है और पानी से घिरे होने के कारण लोग बाजार जा नहीं सकते। ऐसे में रोशनी करने का एक सहारा बची मोमबत्ती के लिए लोग प्रशासन की बाट जोह रहे हैं।

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