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दूसरे जिलों में भेजी गईं डायलिसिस की पांच मशीनें
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जिला अस्पताल में स्थित डायलिसिस सेंटर। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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दूसरे जिलों में भेजी गईं डायलिसिस की पांच मशीनें
निजी अस्पताल में डायलिसिस कराने में ढीली हो रही मरीजों की जेब
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में नौ माह पहले आईं डायलिसिस की पांच मशीनें दूसरे जिलों में भेज दी गई हैं। वजह डायलिसिस करने वाली फर्म को एनएचएम से अनुमति नहीं मिल पाई है।
संयुक्त जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में दस मशीनों से प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। गंभीर मरीजों की सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इन मशीनों से करीब 80 मरीजों की नियमित डायलिसिस हो पा रही है। नई मशीनों के इंस्टाल होने के बाद 45 नए मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिल सकती थी।
गुर्दा के जिन मरीजों की सरकारी अस्पताल में डायलिसिस नहीं हो पाती है, उन्हें निजी अस्पताल में एक बार डायलिसिस कराने पर 2500 से 3000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। डायलिसिस करने वाली संस्था के क्षेत्रीय प्रबंधक शुभम गिरि ने बताया कि कजिले में नौ माह तक डायलिसिस की पांच मशीनें रखीं थीं, लेकिन शुरू करने की अनुमति नहीं मिल पाई। मशीनों की वारंटी अवधि समाप्त हो रही थी, इस कारण चार मशीनों को संतकबीरनगर एवं एक मशीन को महराजगंज भेजा गया है।
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कोट
जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में पांच नई मशीनों की आवश्यकता है। यूनिट में मशीनों की संख्या बढ़ाने के लिए पुन: पत्र लिखा जाएगा। पहले अनुमति प्राप्त की जाएगी, फिर मशीन मंगाई जाएगी।
डॉ. एके झा, प्रभारी सीएमएस
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निजी अस्पताल में डायलिसिस कराने में ढीली हो रही मरीजों की जेब
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में नौ माह पहले आईं डायलिसिस की पांच मशीनें दूसरे जिलों में भेज दी गई हैं। वजह डायलिसिस करने वाली फर्म को एनएचएम से अनुमति नहीं मिल पाई है।
संयुक्त जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में दस मशीनों से प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। गंभीर मरीजों की सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इन मशीनों से करीब 80 मरीजों की नियमित डायलिसिस हो पा रही है। नई मशीनों के इंस्टाल होने के बाद 45 नए मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिल सकती थी।
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गुर्दा के जिन मरीजों की सरकारी अस्पताल में डायलिसिस नहीं हो पाती है, उन्हें निजी अस्पताल में एक बार डायलिसिस कराने पर 2500 से 3000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। डायलिसिस करने वाली संस्था के क्षेत्रीय प्रबंधक शुभम गिरि ने बताया कि कजिले में नौ माह तक डायलिसिस की पांच मशीनें रखीं थीं, लेकिन शुरू करने की अनुमति नहीं मिल पाई। मशीनों की वारंटी अवधि समाप्त हो रही थी, इस कारण चार मशीनों को संतकबीरनगर एवं एक मशीन को महराजगंज भेजा गया है।
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जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में पांच नई मशीनों की आवश्यकता है। यूनिट में मशीनों की संख्या बढ़ाने के लिए पुन: पत्र लिखा जाएगा। पहले अनुमति प्राप्त की जाएगी, फिर मशीन मंगाई जाएगी।
डॉ. एके झा, प्रभारी सीएमएस