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Siddharthnagar News: मछली पालन को मिलेगी गति...सशक्त होंगी महिलाएं
Tue, 05 Mar 2024 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 05 Mar 2024 11:36 PM IST
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सिद्धार्थनगर। मछली पालन करने वाले मत्स्य पालकों खास करके मछुआ समुदाय के लिए अच्छी खबर है। अब पुरुष के साथ ही महिलाएं भी मछली पालन करके तरक्की कर सकेंगी। सरकार ने मछली पालन से जुड़े परिवार की महिलाओं को सशक्त बनाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए माता सुकेता महिला मत्स्य पालक सशक्तीकरण योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत मछली पालन के लिए सरकारी जलाशय, तालाब देने के साथ ही सरकार अनुदान भी दे रही है। जिससे वह रोजगार करके आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। मछली पालन में प्रदेश में नंबर वन जनपद के लिए यह योजना उपयोगी साबित होगी।
जिले में धान और गेहूं की खेती के साथ ही मछली पालन पर लोगों को बड़ा जोर है। बढ़नी, खुनियांव, शोहरतगढ़, डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र में खेत में जलाशय बनवाकर मछली पालन कर रहे हैं। मछली के रोजगार की स्थिति यह कि यहां से कई शहरों में मछली जाती है। इसमें मछुआ समुदाय की सहभागिता हो और वह भी खुद मछली पालन करके बिक्री कर सकें। इसके लिए बहुत पहले से ग्रामीण क्षेत्र के तालाबों को प्रशासन की ओर से पट्टा पर दिया जाता है।
महिलाएं भी इस रोजगार से जुड़कर तरक्की कर सकें। इसके लिए शासन ने मत्सय पालक, मछुआ परिवार की महिलाओं को सशक्त और आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए माता सुकेता महिला मत्सय पालन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत सरकारी जलाशय में मछली पालन के लिए देगा। इसमें उनमें महिलाएं केज स्थापित करके पालन कर सकेंगी। इसके लिए 60 प्रतिशत अनुदान सरकार देगी। जबकि पूंजी का 40 प्रतिशत लाभार्थी महिला को लगाना होगा। माना जा रहा है कि इस योजना के शुरू होने से मछली पालन और बढ़ावा मिलेगा।
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एक केज के लिए तीन लाख निर्धारित
मछली पालन के लिए लगाए जाने वाले केज की लंबाई छह मीटर होगी। जबकि चौड़ाई चार मीटर होगी। वहीं, जलाशय की गहराई लगभग 10 मीटर होनी चाहिए है। इससे पानी की कमी न हो और मछली तेजी से विकास कर सकें। केज एक घेरा टाइप होगा। इसमें सीमित दायरा होगा, जिससे उसकी आसानी से देखरेख हो सकेगा। साथ ही मछलियों को पकड़ने में भी दिक्कत नहीं होगी।
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एक केज पर इतनी धनराशि निर्धारित
जानकारी के अनुसार एक केज की स्थापना के लिए तीन लाख रुपये निर्धारित है। इसमें 60 प्रतिशत धनराशि अनुदान एवं 40 प्रतिशत लाभार्थी के अंश के आधार पर संचालित की जाएगी। इसमें 1.80 लाख लाभार्थी कोष को माध्यम से देय होगा। जबकि एक 1.20 लाख चयनित लाभार्थी की ओर से किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण के माध्यम से या फिर स्वयं के संसाधन पर व्यय किया जाएगा। प्रति महिला को एक केज लगाने की अनुमति होगी। लाभार्थी को विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन करना होगा।
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जिले में मछुआ समुदाय से जुड़े हैं इतने लोग
मछुआ समुदाय की आबादी पर गौर करें तो तकरीबन तीन लाख की आबादी होगी। इसमें 50 प्रतिशत लोग मछली के कारोबार से जड़े हुए हैं। अधिकांश लोग खरीदकर लाकर बेचने का कार्य करते हैं। चंद लोग ही खुद मछली का पालन करते हैं।
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अकरहरा में बना है प्लांट
बढ़नी ब्लॉक के सबसे बड़े क्षेत्रफल में मछली पालन का कारोबार लोग करते हैं। इसमें पहले विभिन्न शहरों से मछली के लिए दाना खरीदकर लाते थे। लेकिन अब क्षेत्र के ही अकरहरा गांव में प्रधानमंत्री मत्सय संपदा योजना के तहत 6.5 करोड़ की लागत से आहार प्लांट बनाया जा रहा है। अब यहीं पर दाना उत्पादन होगा। इससे मत्स्य पालकों को लाभ मिलेगा। कारण मछली का दाना जब यहीं पर मिलेगा तो और लोग मछली पालन से जुडेंगे। क्योंकि दाना सस्ता मिलेगा तो फायदा होगा।
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मछली पालक महिलाओं के लिए माता सुकेता महिला मछली पालन योजना की शुरुआत हुई है। इसमें केज में मछली पालन किया जाएगा। यह योजना केवल महिलाओं के लिए है। इसमें 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा और 40 प्रतिशत राशि लाभार्थी को खर्च करना होगा।
-नंद किशोर प्रसाद, जिला मत्सय अधिकारी
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जिले में धान और गेहूं की खेती के साथ ही मछली पालन पर लोगों को बड़ा जोर है। बढ़नी, खुनियांव, शोहरतगढ़, डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र में खेत में जलाशय बनवाकर मछली पालन कर रहे हैं। मछली के रोजगार की स्थिति यह कि यहां से कई शहरों में मछली जाती है। इसमें मछुआ समुदाय की सहभागिता हो और वह भी खुद मछली पालन करके बिक्री कर सकें। इसके लिए बहुत पहले से ग्रामीण क्षेत्र के तालाबों को प्रशासन की ओर से पट्टा पर दिया जाता है।
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महिलाएं भी इस रोजगार से जुड़कर तरक्की कर सकें। इसके लिए शासन ने मत्सय पालक, मछुआ परिवार की महिलाओं को सशक्त और आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए माता सुकेता महिला मत्सय पालन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत सरकारी जलाशय में मछली पालन के लिए देगा। इसमें उनमें महिलाएं केज स्थापित करके पालन कर सकेंगी। इसके लिए 60 प्रतिशत अनुदान सरकार देगी। जबकि पूंजी का 40 प्रतिशत लाभार्थी महिला को लगाना होगा। माना जा रहा है कि इस योजना के शुरू होने से मछली पालन और बढ़ावा मिलेगा।
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एक केज के लिए तीन लाख निर्धारित
मछली पालन के लिए लगाए जाने वाले केज की लंबाई छह मीटर होगी। जबकि चौड़ाई चार मीटर होगी। वहीं, जलाशय की गहराई लगभग 10 मीटर होनी चाहिए है। इससे पानी की कमी न हो और मछली तेजी से विकास कर सकें। केज एक घेरा टाइप होगा। इसमें सीमित दायरा होगा, जिससे उसकी आसानी से देखरेख हो सकेगा। साथ ही मछलियों को पकड़ने में भी दिक्कत नहीं होगी।
एक केज पर इतनी धनराशि निर्धारित
जानकारी के अनुसार एक केज की स्थापना के लिए तीन लाख रुपये निर्धारित है। इसमें 60 प्रतिशत धनराशि अनुदान एवं 40 प्रतिशत लाभार्थी के अंश के आधार पर संचालित की जाएगी। इसमें 1.80 लाख लाभार्थी कोष को माध्यम से देय होगा। जबकि एक 1.20 लाख चयनित लाभार्थी की ओर से किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण के माध्यम से या फिर स्वयं के संसाधन पर व्यय किया जाएगा। प्रति महिला को एक केज लगाने की अनुमति होगी। लाभार्थी को विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन करना होगा।
जिले में मछुआ समुदाय से जुड़े हैं इतने लोग
मछुआ समुदाय की आबादी पर गौर करें तो तकरीबन तीन लाख की आबादी होगी। इसमें 50 प्रतिशत लोग मछली के कारोबार से जड़े हुए हैं। अधिकांश लोग खरीदकर लाकर बेचने का कार्य करते हैं। चंद लोग ही खुद मछली का पालन करते हैं।
अकरहरा में बना है प्लांट
बढ़नी ब्लॉक के सबसे बड़े क्षेत्रफल में मछली पालन का कारोबार लोग करते हैं। इसमें पहले विभिन्न शहरों से मछली के लिए दाना खरीदकर लाते थे। लेकिन अब क्षेत्र के ही अकरहरा गांव में प्रधानमंत्री मत्सय संपदा योजना के तहत 6.5 करोड़ की लागत से आहार प्लांट बनाया जा रहा है। अब यहीं पर दाना उत्पादन होगा। इससे मत्स्य पालकों को लाभ मिलेगा। कारण मछली का दाना जब यहीं पर मिलेगा तो और लोग मछली पालन से जुडेंगे। क्योंकि दाना सस्ता मिलेगा तो फायदा होगा।
मछली पालक महिलाओं के लिए माता सुकेता महिला मछली पालन योजना की शुरुआत हुई है। इसमें केज में मछली पालन किया जाएगा। यह योजना केवल महिलाओं के लिए है। इसमें 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा और 40 प्रतिशत राशि लाभार्थी को खर्च करना होगा।
-नंद किशोर प्रसाद, जिला मत्सय अधिकारी