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Siddharthnagar News: पहले कुशीनगर और बिहार अब लखीमपुर खीरी के तस्कर सक्रिय

Mon, 13 Jan 2025 11:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2025 11:20 PM IST
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First smugglers of Kushinagar and Bihar now active in Lakhimpur Kheri
-पशु तस्करों का स्थानीय स्तर पर नेटवर्क क्षेत्र के संदिग्धों से मिलकर पहले पशुओं को करते हैं एकत्र
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-पहले भी सेफ जोन रहा बलरामपुर और गोंडा के पास तस्करों के लिए त्रिलोकपुर और भवानीगंज केंद्र क्षेत्र का बस्ती मार्ग

संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भवानीगंज क्षेत्र के धनकरपुर पशु तस्करों के पकड़े जाने के बाद पुलिस अलर्ट हो गई है। क्योंकि एकाएक दो साल बाद पशु तस्करों का नेटवर्क सक्रिय हुआ है। पूर्व की तरह से कनेक्शन बिहार तो जुड़ा है, लेकिन इस बार कुशीनगर और बिहार के गोपालगंज नहीं, बल्कि लखीमपुर खीरी के तस्कर पकड़े गए हैं।
ऐसे में पुलिस को अब नए गैंग की कमर तोड़ने के लिए मेहनत करनी होगी। क्योंकि अब तक की पशु तस्करी की वारदात में पहली बारी बिहार और खीरी का कनेक्शन जुड़ा है। जहां धरपकड़ हुई वह तीन जनपदों का बाॅर्डर है। इसमें बस्ती, गोंडा और बलरामपुर इलाका लगता है। ऐसे में यहां से अवैध गतिविधि होने की गुंजाइश अधिक है। भवानीगंज, डुमरियागंज और त्रिलोकपुर थाने का कुछ इलाका पशु तस्करी के लिए पहले से बदनाम था। ऐसे में पूर्व में इस अपराध में लिप्त लोगों की कुंडली खंगाली जा रही है। क्योंकि इस इलाके में स्थानीय लोगों के सहयोग से गोशाला से पशुओं को लाद ले जाने का मामला सामने आ चुका है।
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पशु तस्करी में निकलकर आई यह जानकारी
पशु तस्करी के धंधे की हकीकत जानने की कोशिश की गई तो पूर्व में इसमें सक्रिय जो अब बुजुर्ग हो चुका है। उक्त व्यक्ति ने बताया कि पहले पशुओं को बाहर ले जाने के लिए साधन नहीं थे। अगर ले जाते थे तो गांव-गांव जाकर खरीदना पड़ता था। इसमें वह पशु मिलते थे जो बूढ़े होते, या ऐसी गाय मिलती, जो बच्चा नहीं देती थी। आज पुलिस की सख्ती बढ़ी है, पर पशुओं को लादकर ले जाने में कई वाहन हैं। मशीन से जुताई होने के कारण बैल कोई रख नहीं रहा है। गाय तक लोग छोड़ दे रहे हैं। जो इन धंधे में लिप्त हैं, वह तस्कर स्थानीय लोगों से मिलते हैं। सीवान में जहां अक्सर पशु घूमते हैं, उन पर निगाह बनाते हैं। फिर रेकी के बाद गाड़ी खड़ी करते हैं और कुछ लिखाकर ले जाते हैं। अब यह बड़े रिस्क का कार्य हो गया है। हमने अपनी आगे की पीढ़ी को कमाने खाने के लिए दिल्ली, मुंबई भेज दिया है। जिले में भी बाहरी न आएं तो यहां के लोगों ने लगभग धंधा छोड़ दिया है।
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रात में गायब हो गए डेढ़ दर्जन गोवंश
डुमरियागंज थाना क्षेत्र के मंगराव गांव के पोखरे के पास 30 अक्टूबर 2024 को गोपालक गांव निवासी बड़कू व चिन्नी लाल यादव डेढ़ दर्जन गोवंश बांध कर पंचायत भवन में सोने चले गए। सुबह करीब पांच बजे जगने पर देखा तो सभी गायब थीं। इसकी सूचना पीड़ित ने पुलिस को दी। पुलिस को पशुओं के स्थान पर महराजगंज के पेट्रोल पंप की रसीद मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच आरंभ की। दो बार तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने पीड़ित गो पालकों को थाने बुलाया, मगर आज तक तस्करों का सुराग नहीं लगा।
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पशु तस्करों के कुचलने से चली गई थी जान
बांसी कोतवाली क्षेत्र के बांसी- इटवा मार्ग पर स्थित गोल्हौरा से आगे लगभग दो साल पहले भागने के चक्कर मेंं पशु तस्करों ने बाइक सवार को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में उसकी जान चली गई थी। पिकअप से कई पशुओं को मुक्त करवाया था। इसमें बिहार के पशु तस्कर पकड़े गए। कुछ ही दिन बाद गोल्हौरा थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड में पशु तस्कर पकड़े गए, जो बिहार और कुशीनगर के थे। इस मुठभेड़ के बाद यहां पशु तस्करों की आवाजाही बंद हो गई। जांच में पता चला कि गोंडा, बलरामपुर होते हुए सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर के रास्ते गोरखपुर और कुशीनगर से बिहार जाते थे।
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12 जनवरी की कार्रवाई
क्षेत्र के उतरौला-बस्ती मार्ग पर धनखरपुर से एक पिकअप पकड़ी गई। तलाशी में चार पशु और एक बछिया बंधी थी। पशुओं को छुड़ाया गया। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि दो लखीमपुर खीरी के निवासी हैं। आरोपियों में अनुदित मौर्य निवासी वार्ड नंबर छह सिगंही कला थाना सिगांही कला लखीमपुर खीरी (वाहन चालक) और हरजीत सिंह निवासी खेरतिया कश्यपनगर थाना तिकोनिया जनपद लखीमपुर खीरी शामिल थे। पूछताछ में इनके द्वारा बताया गया कि यह पशुओं को लेकर बिहार जा रहे थे।

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भवानीगंज थाना क्षेत्र बस्ती व गोंडा की सीमा होने के नाते संवेदनशील है। पुलिस टीम द्वारा बॉर्डर क्षेत्र में नियमित चेकिंग अभियान रात में चलाया जा रहा है। इस दौरान सभी संदिग्ध व्यक्तियों के साथ ही वाहनों का विशेष सतर्कता पूर्वक सघन जांच की जा रही है। साथ ही पकड़े गए तस्करों के बारे में और जानकारी ली जा रही है। हर स्तर से जांच किया जा रहा है।
-रामदेव, थानाध्यक्ष भवानीगंज
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