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Siddharthnagar News: फाइनेंस कंपनियाें की होगी जांच, पुलिस कसेगी शिकंजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेसरहा। ढोलगाढ़ा गांव की महिलाएं माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के दिए गए लोन के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को थाने पहुंची। यहां लेनदेन से संबंधित दस्तावेज थानाध्यक्ष को सौंपे। अब पुलिस उनकी जांच करेगी। इसके बाद संबंधित के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करेगी।
महिलाओं ने बताया कि लोन की किस्त चुकता करने के बाद भी उक्त कंपनी से संबंधित लोग गांव पहुंच कर परेशान कर रहे हैं, जिससे घातक कदम उठाने को कई महिलाएं विवश हो गई थीं।
क्षेत्र की नासिरगंज ग्राम पंचायत का टोला ढोलगाढ़ा गांव में लगभग पांच वर्ष पूर्व माइक्रो फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधियों ने गांव पहुंचकर महिलाओं में रोजगार के लिए कम ब्याज पर कर्ज देने का प्रचार किया। उनकी बातों में आकर गांव की लगभग 15 से 20 महिलाओं ने उत्कर्ष कंपनी से 20 से 30 हजार का पहला लोन लिया।
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कंपनी द्वारा लोन देने की शर्त में केवल आधार कार्ड व फोटो ही लिया जाता था। लोन देने के बाद कंपनी से संबंधित लोग इंश्योरेंस व अन्य खर्च के लिए अच्छी खासी रकम ले लेते।
लोन की वसूली 15 दिन में किस्त के माध्यम से देनी होती है। बताया जाता है कि तीन माह तक किस्त न जमा करने पर कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी को बुलाकर उस व्यक्ति की आईडी बदल कर दो से तीन गुना अधिक धनराशि का कर्ज दे दिया जाता था, जिसमें प्रथम बार लोन देने वाली कंपनी अपना बकाया ले लेती और भुगतान देने वाली दूसरी कंपनी इंश्योरेंस सहित अन्य खर्च निकाल कर रुपया उपभोक्ता को दे देती थी। इसी तरह से कंपनी के लोग आईडी बदलवाकर तीसरी चौथी कंपनियों से लोन का सिलसिला वर्षों तक चलता रहा। ी
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खेसरहा। ढोलगाढ़ा गांव की महिलाएं माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के दिए गए लोन के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को थाने पहुंची। यहां लेनदेन से संबंधित दस्तावेज थानाध्यक्ष को सौंपे। अब पुलिस उनकी जांच करेगी। इसके बाद संबंधित के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करेगी।
महिलाओं ने बताया कि लोन की किस्त चुकता करने के बाद भी उक्त कंपनी से संबंधित लोग गांव पहुंच कर परेशान कर रहे हैं, जिससे घातक कदम उठाने को कई महिलाएं विवश हो गई थीं।
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क्षेत्र की नासिरगंज ग्राम पंचायत का टोला ढोलगाढ़ा गांव में लगभग पांच वर्ष पूर्व माइक्रो फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधियों ने गांव पहुंचकर महिलाओं में रोजगार के लिए कम ब्याज पर कर्ज देने का प्रचार किया। उनकी बातों में आकर गांव की लगभग 15 से 20 महिलाओं ने उत्कर्ष कंपनी से 20 से 30 हजार का पहला लोन लिया।
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कंपनी द्वारा लोन देने की शर्त में केवल आधार कार्ड व फोटो ही लिया जाता था। लोन देने के बाद कंपनी से संबंधित लोग इंश्योरेंस व अन्य खर्च के लिए अच्छी खासी रकम ले लेते।
लोन की वसूली 15 दिन में किस्त के माध्यम से देनी होती है। बताया जाता है कि तीन माह तक किस्त न जमा करने पर कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी को बुलाकर उस व्यक्ति की आईडी बदल कर दो से तीन गुना अधिक धनराशि का कर्ज दे दिया जाता था, जिसमें प्रथम बार लोन देने वाली कंपनी अपना बकाया ले लेती और भुगतान देने वाली दूसरी कंपनी इंश्योरेंस सहित अन्य खर्च निकाल कर रुपया उपभोक्ता को दे देती थी। इसी तरह से कंपनी के लोग आईडी बदलवाकर तीसरी चौथी कंपनियों से लोन का सिलसिला वर्षों तक चलता रहा। ी