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Siddharthnagar News: किसानों से पूछताछ, बेनकाब होंगे कई बड़े चेहरे

Mon, 17 Feb 2025 11:14 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Feb 2025 11:14 PM IST
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Farmers will be interrogated, many big faces will be exposed
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। धान खरीद में 16 करोड़ रुपये से अधिक घोटाले का मामला एसआईटी गठित होने और जांच शुरू होने के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ने के साथ- साथ कई बड़े चेहरे बेनकाब होंंगे। क्योंकि मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच टीम किसानों से बिक्री के बारे में जानकारी हासिल करेगी। किसानों से एसआईटी को जाे जानकारी मिलेगी वह चौंकाने वाली हो सकती है।
सूत्रों की मानें तो किसानों से अब तक मिली जानकारी में एक बात यह पुख्ता हो गई है कि किसानों ने धान बेचा, भुगतान हुआ, लेकिन गोदाम तक न पहुंचने के बीच मुनाफे का खेल हुआ। एक प्रकार से कहा जाए तो बीच में ही मुनाफाखोरी के लिए बेच लिया गया। जांच के दायरे में तकरीबन पांच हजार से अधिक किसान हैं। वहीं, किसानों के बयान के बाद जांच की आंच इस खेल में शामिल सैकड़ों लोगों पर पड़ेगी। जो भविष्य में सलाखों के पीछे जा सकते हैं। फिलहाल अभी तक चार क्रय केंद्र प्रभारी जेल जा चुके हैं।
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धान खरीद में 16 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया था। पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक की तहरीर पर पीसीएफ के जिला प्रबंधक अमित चौधरी और चार अन्य केंद्र प्रभारियों पर सरकारी धन के गबन सहित अन्य धारा में केस दर्ज हुआ। इसमें आरोप था कि धान की खरीद हुई, लेकिन उठान नहीं हुआ, और रुपये की हेराफेरी कर ली गई। केस दर्ज होने के बाद अब तक चार क्रय केंद्र प्रभारी जेल जा चुके हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी दिनेश कुमार पी. ने सीओ सदर की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया है। तीन इंस्पेक्टर, एक सीओ के लिए डिजिटल जानकारी के लिए अन्य तकनीक के जानकारों का सहयोग लिया जा रहा है, जिससे बैंक खातों के लेनदेन सहित अन्य जानकारी मिल सके। एसआईटी ने अपना काम शुरू कर दिया है।

टीम की जांच करने के साथ ही भ्रष्टाचार की परत दर परत सच्चाई निकलकर सामने आ रही है। अभी पहले चरण में पांच हजार किसानों को ट्रेस किया जा रहा है। इसमें टीम से जुड़े अधिकारी किसानों से जानकारी ले रहे हैं कि किस तिथि में धान उन्होंने बेचा। कितना क्विंटल बेचा। कब धनराशि खाते में आई। धनराशि आई की नहीं। सहित कई बिंदुओं की जांच की जा रही है। क्योंकि पूर्व में धान खरीद के घोटाले के जो मामले में सामने आए, उसमें पता चला कि बिना धान बेचे ऐसे किसानों के नाम पर भुगतान कर दिया गया, जिनके पास जमीन ही नहीं है।
मामले का पर्दाफाश होने के बाद विभागीय लोगों के अलावा, खरीद से जुड़े अन्य सरकारी विभाग के लोग जद में आ सकते हैं।
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