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Siddharthnagar News: सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगा मेला, हिंदू व मुस्लिमों ने लिया भाग
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लोटन के एकडेग्वा के टोला लमुईया स्थित दरगाह पर शुरू हुआ बाले मिया का मेला।
लोटन (सिद्धार्थनगर)। मोहब्बत एवं भाईचारगी का पैगाम देने वाले सूफी संत सैयद सालार मसूद गाजी उर्फ बाले मियां का मेला एकडेग्वा गांव के टोला लमुईया स्थित दरगाह पर शुरू हुआ। रविवार की सुबह से जायरीनों के आने का शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चलता रहा। कनूरी, पलंग, पीढ़ी एवं चादर लेकर श्रद्धालु गाजे बाजे और ढोल नगाड़े के साथ बाबा की दरगाह पर पहुंचे। हालांकि, मेले की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को हो गई थी।
बाले मियां के प्रति लोगों की दीवानगी देखते ही बनती थी। उनके करम की उम्मीद लिए क्षेत्र समेत कई जिलों से श्रद्धालु दरगाह पहुंचे थे। भीड़ के कारण मेला परिसर छोटा पड़ गया। कुछ मन्नतें मांगने आए थे, तो कोई मन्नतें पूरी होने पर माथा टेकने के साथ-साथ निशान लोगों ने खड़ा किया था। शाम छह बजे से श्रद्धालु नाचते गाते पलंग पीढ़ी लेकर मन्नतें मांगने दरगाह पर पहुंचे। फिर जोहरा बीबी की रूहानी शादी की रस्म अदा की गई। इतना निशान कैसे और किन लोगों ने खड़ा किया, के सवाल के जवाब में ग्राम नेतवर के मनोज ने बताया सैयद सालार गाजी की ताकत के भरोसे महिलाओं के ऊपर गलत रुहानी रुहों को मैं हटाता हूं। ठीक होने पर उसके बदले निशान खड़ा करने की मनौती पर ठीक होती है।
सैयद सालार मसूद गाजी के मेले में हिंदू हों या मुसलमान, पूरी आस्था के साथ पहुंचते हैं, इसीलिए इन्हें हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी माना गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने इंसानियत एवं मोहब्बत का पैगाम दिया है। बस जरूरत इस बात की है कि उनकी बताई बातों पर अमल किया जाए।
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बाले मियां के प्रति लोगों की दीवानगी देखते ही बनती थी। उनके करम की उम्मीद लिए क्षेत्र समेत कई जिलों से श्रद्धालु दरगाह पहुंचे थे। भीड़ के कारण मेला परिसर छोटा पड़ गया। कुछ मन्नतें मांगने आए थे, तो कोई मन्नतें पूरी होने पर माथा टेकने के साथ-साथ निशान लोगों ने खड़ा किया था। शाम छह बजे से श्रद्धालु नाचते गाते पलंग पीढ़ी लेकर मन्नतें मांगने दरगाह पर पहुंचे। फिर जोहरा बीबी की रूहानी शादी की रस्म अदा की गई। इतना निशान कैसे और किन लोगों ने खड़ा किया, के सवाल के जवाब में ग्राम नेतवर के मनोज ने बताया सैयद सालार गाजी की ताकत के भरोसे महिलाओं के ऊपर गलत रुहानी रुहों को मैं हटाता हूं। ठीक होने पर उसके बदले निशान खड़ा करने की मनौती पर ठीक होती है।
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सैयद सालार मसूद गाजी के मेले में हिंदू हों या मुसलमान, पूरी आस्था के साथ पहुंचते हैं, इसीलिए इन्हें हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी माना गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने इंसानियत एवं मोहब्बत का पैगाम दिया है। बस जरूरत इस बात की है कि उनकी बताई बातों पर अमल किया जाए।
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