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Siddharthnagar News: रामलला को टेंट में देख भर आती थीं आंखें, अब भव्य मंदिर से मिलती है ऊर्जा
Tue, 23 Jan 2024 05:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 23 Jan 2024 05:00 AM IST
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सिद्धार्थनगर। पिछले 20 वर्ष से अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दर्शन पूजन के लिए जाते रहे है, तब रामलला को टेंट में देखकर आंख भर जाती थी। इसके साथ वहां चहुंओर पसरी अव्यवस्था व गंदगी से मन विचलित होता था। अब वहां भव्य मंदिर निर्माण से उर्जा मिलती है, साथ ही सड़क मार्ग दुरुस्त होने और सभी तरफ सफाई दिखने से वहां जाना अब अच्छा लगता है। यह कहना है शहर के सिविल लाइन निवासी मनोज उर्फ मुन्ना तिवारी का।
मुन्ना तिवारी कहते है कि वर्ष 1995 से अब तक वह हर साल दो बार अयोध्या जाते रहे है। पहले जब वहां जाते थे तो सड़क व गलियों के साथ मंदिरों के आसपास भी गंदगी फैली रहती थी। यहां तक सरयू नदी में गंदगी के कारण स्नान करना भी मुश्किल रहता था। लेकिन बीते कुछ वर्ष से वहां बहुत सुधार हुआ है। दो माह पहले अयोध्या गया था। चारो तरफ साफ-सफाई के साथ ही मंदिर एवं भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी गंदगी नहीं दिख रही थी। अब टेंट की जगह भव्य मंदिर में रामलला स्थापित हो गए है तो अगले माह उनका दर्शन करने जाएंगे। कुछ ऐसा ही पहले और हाल के दिनों में अयोध्या जाने वाले अन्य श्रद्धालुओं का भी कहना था।
आजादी की लड़ाई जैसा था मंदिर निर्माण आंदोलन
अयोध्या में मंदिर निर्माण आंदोलन आस्था के साथ ही अस्तित्व के लिए भी संघर्ष था, जो आजादी की लड़ाई से कमतर नहीं था। अब मंदिर निर्माण होने से विजय भाव महसूस कर रहे है।
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डॉ. नरसिंह त्रिपाठी, पूर्व प्रधानाचार्य
पीढि़यों तक संघर्ष एवं पूर्वजों के त्याग, बलिदान के बदौलत अब जाकर मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हुए, जिससे बहुत प्रसन्नता है।
रामचंदर दास, पुजारी हनुमान मंदिर
जिस मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा कर जेल जाना पड़ा, उसके निर्माण से बड़ी उपलब्धि जीवन में और कुछ नहीं है, इस अवसर पर पूजन व भजन कर प्रसाद वितरण किया गया है।
चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, पूर्व प्रधानाचार्य
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मुन्ना तिवारी कहते है कि वर्ष 1995 से अब तक वह हर साल दो बार अयोध्या जाते रहे है। पहले जब वहां जाते थे तो सड़क व गलियों के साथ मंदिरों के आसपास भी गंदगी फैली रहती थी। यहां तक सरयू नदी में गंदगी के कारण स्नान करना भी मुश्किल रहता था। लेकिन बीते कुछ वर्ष से वहां बहुत सुधार हुआ है। दो माह पहले अयोध्या गया था। चारो तरफ साफ-सफाई के साथ ही मंदिर एवं भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी गंदगी नहीं दिख रही थी। अब टेंट की जगह भव्य मंदिर में रामलला स्थापित हो गए है तो अगले माह उनका दर्शन करने जाएंगे। कुछ ऐसा ही पहले और हाल के दिनों में अयोध्या जाने वाले अन्य श्रद्धालुओं का भी कहना था।
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आजादी की लड़ाई जैसा था मंदिर निर्माण आंदोलन
अयोध्या में मंदिर निर्माण आंदोलन आस्था के साथ ही अस्तित्व के लिए भी संघर्ष था, जो आजादी की लड़ाई से कमतर नहीं था। अब मंदिर निर्माण होने से विजय भाव महसूस कर रहे है।
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पीढि़यों तक संघर्ष एवं पूर्वजों के त्याग, बलिदान के बदौलत अब जाकर मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हुए, जिससे बहुत प्रसन्नता है।
रामचंदर दास, पुजारी हनुमान मंदिर
जिस मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा कर जेल जाना पड़ा, उसके निर्माण से बड़ी उपलब्धि जीवन में और कुछ नहीं है, इस अवसर पर पूजन व भजन कर प्रसाद वितरण किया गया है।
चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, पूर्व प्रधानाचार्य

रिद्धि मिश्रा।

रिद्धि मिश्रा।

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